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गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में आयोजित चिकित्सा मनोविज्ञान के राष्ट्रीय वार्षिक सम्मेलन में 160 शोध-पत्र प्रस्तुत 

ग्रेटर नोएडा:गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में 51वें राष्ट्रीय वार्षिक चिकित्सा मनोविज्ञान सम्मेलन 2026 के अंतर्गत कुल 160 शोध प्रस्तुतियाँ सफलतापूर्वक संपन्न हुईं, जिनमें प्रतिभागियों ने विभिन्न समसामयिक विषयों पर अपने शोध एवं विचार साझा किए। इस सम्मेलन में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों की उल्लेखनीय सहभागिता रही। इटली, अमेरिका एवं जर्मनी जैसे देशों के साथ-साथ भारत के प्रमुख संस्थानों— ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ नई दिल्ली , इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज़ (दिल्ली) तथा नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज़ (बेंगलुरु)—से आए विशेषज्ञों ने कार्यक्रम को समृद्ध किया। सम्मेलन के दौरान विभिन्न शैक्षणिक सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें की-नोट सत्र, प्लेनरी सत्र, पैनल चर्चा, 19 संगोष्ठियाँ (सिम्पोजियम), कार्यशालाएँ, प्रायोजित व्याख्यान (स्पॉन्सर टॉक), पुरस्कार सत्र एवं समानांतर सत्र शामिल रहे।

सम्मेलन की शुरुआत श्रीलंका से आए डॉ. सनथ महाविथानागे और थाईलैंड से आए डॉ. सुरियादेव त्रिपाठी के मुख्य भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने न्यूरोसाइंस ऑफ माइंडफुलनेस एंड मोरल माइंड को सरल भाषा में समझाया। इसके बाद आयोजित पैनल चर्चा में प्रो. विभा शर्मा, प्रो. कल्पना श्रीवास्तव, प्रो. रुशी, प्रो. अन्विति गुप्ता, डॉ. श्वेता सिंह और डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव ने आज के समय में क्लीनिकल मनोविज्ञान में नैतिक चुनौतियों, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग पर अपने विचार रखे।

सम्मेलन में व्यावहारिक प्रशिक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया गया। अमेरिका से आए प्रो. बी. एल. दुबे के नेतृत्व में “प्रोजेक्टिव साइकोलॉजी ” पर प्रशिक्षण दिया गया, इटली से आए डॉ. एंटोनियो सर्विग्नी और डॉ. निकोल ने साइकोड्रामा के बारे में चर्चा की । वहीं जर्मनी से आए डॉ. रुडिगर शेलेंबर्ग ने न्यूरो और बायोफीडबैक थेरेपी के बारे में जानकारी दी। प्रो. उदय कुमार सिन्हा ने भारत की जुवेनाइल जस्टिस सिस्टम में मनोवैज्ञानिकों की भूमिका और चुनौतियों को समझाया।

सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों ने बताया कि आज के समय में मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में ए.आई और डिजिटल तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। प्रो. सोनाली झांजी, प्रो. नीना कोहली, प्रो. वहीदा खान, डॉ. नवीन कुमार, प्रो. देव व्रत कुमार, डॉ. रितु चौहान, प्रो. पूजा महौर और डॉ. मेहफूज़ अहमद ने डिजिटल इलाज, वर्चुअल ऑटिज्म और थेरेपी में आने वाली नई चुनौतियों पर चर्चा की।

सिम्पोजियम सत्रों में ए.आई आधारित उपचार, इंटरनेट गेमिंग की लत, डिजिटल पैरेंटिंग और बदलते समय में थेरेपिस्ट-रोगी संबंध जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसमें डॉ. विजय प्रसाद, डॉ. शाहजादी मल्होत्रा, डॉ. उर्मी चक्रवर्ती, डॉ. शाजिया सिद्दीकी और डॉ. नितिन आनंद सहित अमनप्रीत कौर, वेदा सिद्धार्थ, ललित कुमार सिंह, गगनदीप सिंह, अमित कुमार सोनी और मोहित कुमार ने ऑनलाइन थेरेपी, युवाओं में नशे की समस्या और प्रशिक्षण से जुड़ी चुनौतियों पर अपने शोध प्रस्तुत किए।

सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा समानांतर वैज्ञानिक सत्र रहा, जिसमें देशभर के शोधकर्ताओं ने अपने शोध प्रस्तुत किए। इन सत्रों में नशे की समस्या, इंटरनेट की लत, तनाव, डिप्रेशन, ट्रॉमा और मस्तिष्क से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। युवाओं में बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और ए.आई के प्रभाव जैसे मुद्दे भी सामने आए जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया की लत, इंटरनेट गेमिंग डिसऑर्डर, मानसिक आघात (ट्रॉमा), माइंडफुलनेस और न्यूरो साइकोलॉजी जैसे आधुनिक और महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। इन सत्रों से यह ज्ञात होता है कि मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ नई चुनौतियाँ भी सामने आ रही हैं।

इस प्रकार, सम्मेलन ने न केवल ज्ञान-विस्तार का मंच प्रदान किया, बल्कि राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विचारों के आदान-प्रदान को भी सशक्त बनाया। अंत में आईएसीपी सदस्यों की जनरल बॉडी मीटिंग और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसने पूरे दिन को एक उत्सव जैसा बना दिया।

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