ग्रेटर नोएडा

संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के 649 वी जयंती पर विचार गोष्ठी का आयोजन

बिलासपुर:संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के 649 वी जयंती पर गांव छपरावत में वाल्मीकि विकास संघ द्वारा विचार गोष्ठी आयोजित हुई । गोष्ठी का विषय ” वाल्मीकि रविदास चेतना संगम”- बहुजन एकता एवं सामाजिक चिंतन रहा।

विचार गोष्ठी की अध्यक्षता बहुजन विकास मंच के राष्ट्रीय मुख्य उपाध्यक्ष श्री सुरेन्द्र सिंह धनकड़ (रिटायर्ड पुलिस उपनिरीक्षक ) खुशहालपुर वालों ने की, संचालन श्री अजय कुमार महरौलिया ने किया।

यहां एक नारा दिया गया कि “वाल्मीकि का ज्ञान, रविदास का सम्मान – एकता से ही बनेगा बहुजन समाज महान।”

भारतीय जनता पार्टी की मंडल उपाध्यक्ष श्रीमती सीमा तेवतिया ने कहा कि वाल्मीकि विकास संघ के बैनर तले संत शिरोमणि रविदास की की जयंती की अध्यक्षता कर रहे धनकड़ साहब कार्यक्रम में उपस्थित भाजपा की नेता विनीता शर्मा राष्टीय अध्यक्ष विजय कुमार महरौलिया जी के द्वारा कार्यक्रम का संयोजन करना ये दर्शाता हैं कि ये बेजोड़ कार्यक्रम है। भाजपा की जिला महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष श्रीमती विनीता शर्मा ने कहा कि माता सीता का भगवान राम के द्वारा त्यागे जाने पर वाल्मीकि आश्रम में शरण लेकर अपने बच्चों को जन्म देना और छ सौ साल पहले मीरा बाई द्वारा संत शिरोमणि रविदास जी को अपना गुरु बनाना इस बात का प्रतीक है कि जागरूक महिलाओं ने पूर्व के वर्षों में अपनी आत्मा की आवाज सुन उचित निर्णय लिए थे। उन्होंने नारा दिया कि। “जाति -पति के बन्धन तोड़ो , वाल्मीकि रविदास के संदेशों से नाता जोड़ों ।

इस मौके पर विशिष्ट वक्ता संजय कुमार चौटाला ने दोनों महापुरुषों के संदेश जो मानवता और जीव कल्याण उपयोगी है विस्तार से चर्चा की, उन्होंने बताया कि दोनों महापुरुषों ने हमें जन्म की बजाय कर्म को श्रेष्ठ बताया। मानवीय समानता का दर्शन बहुत शानदार बताया भगवान वाल्मीकि राम राज्य की कल्पना करते हैं तो रविदास बेगमपुरा की कल्पना करते हैं दोनों न्याय पूर्ण और भेदभाव मुक्त समाज की वकालत करते हैं। दोनों भक्ति और सत्य का मार्ग के विषय में सत्य को ही ईश्वर बताते हैं वाल्मीकि जी ने रामायण के माध्यम से मानवीय मूल्य की स्थापना की तो संत रविदास ने वाह्य आडंबरों का विरोध कर मन चंगा तो कटौती में गंगा का संदेश दिया।

समकालीन विमर्श में ये दोनों महापुरुषों को हम मानवता की स्वाभिमान की प्रति के रूप में याद करते हैं। 600 वर्ष पूर्व संत रविदास उस समय के मेवाड़ के राजा राणा सांगा और उनके परिवार के आध्यात्मिक गुरु हो सकते हैं उसकी आज के लोग कल्पना करने को तैयार नहीं है। लेकिन सत्य सत्य है। राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार महरौलिया जी ने कहा कि सभी जातियों को इन महापुरुषों का सम्मान करते हुए मानवीय एकता के लिए आगे आना चाहिए ।

और नारा दिया।

“एक ही जोत से सब जग उपजा, एकता ही हमारा सबसे बड़ा धर्म।”

गोष्ठी के अध्यक्ष धनकड़ जी ने गोष्ठी का समापन इस नारे के साथ किया

“बेगमपुरा का सपना, जब हर घर हो शिक्षित और संगठित अपना।”

अजय सिंह क़ीर प्रदेश महामंत्री वाल्मीकि विकास संघ इसके प्रेरक रहे,

रिपोर्टर गोपाल बसु

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