गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय से राष्ट्रीय बौद्धिक संवाद की नई शुरुआत, ‘भारत बोध संवाद शृंखला 2025–26’ का भव्य शुभारंभ

ग्रेटर नोएडा : गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) एक बार फिर राष्ट्रीय बौद्धिक और सांस्कृतिक विमर्श का केंद्र बना | विश्वविद्यालय परिसर में ‘भारत बोध संवाद शृंखला 2025–26’ के अंतर्गत 100 सत्रों की राष्ट्रीय संवाद शृंखला के उद्घाटन समारोह का आयोजन किया गया । यह शृंखला भारत की शाश्वत सभ्यतागत, दार्शनिक और सांस्कृतिक परंपराओं के पुनरावलोकन और समकालीन संदर्भों में उनके महत्व को रेखांकित करने की एक महत्वपूर्ण अकादमिक कदम है।
इस राष्ट्रीय संवाद शृंखला की परिकल्पना एवं आयोजन ईशान बोध और निश्रेयस द्वारा किया गया है। यह शृंखला भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद (आईसीपीआर), शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार तथा केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित की गई , जिससे इसे अकादमिक विश्वसनीयता के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रभाव प्राप्त हो रहा है।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि माननीय मंत्री श्री सरबानंदा सोनोवाल ने अपना संबोधन शुरू करने से पूर्व छात्रों से इस विषय पर उनके नजरिये को जानना फिर अपने वक्तव्य में कहा कि “भारत बोध संवाद जैसी पहलें हमारी सभ्यतागत चेतना, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और राष्ट्रीय दृष्टि को सुदृढ़ करती हैं। भारतीय दर्शन, वैदिक विरासत और सांस्कृतिक मूल्यों को समकालीन विमर्श से जोड़ना आज की आवश्यकता है। ऐसे संवाद राष्ट्र निर्माण की दिशा में वैचारिक आधार प्रदान करते हैं।”
गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने कहा, “भारत बोध संवाद शृंखला विश्वविद्यालय के उस शैक्षणिक दृष्टिकोण का विस्तार है, जिसमें ज्ञान, मूल्य और संस्कृति का समन्वय निहित है। यह शृंखला विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और समाज के बीच भारतीय चिंतन परंपरा को नए सिरे से समझने का अवसर प्रदान करेगी।”
इंडियन काउंसिल ऑफ फिलॉसॉफिकल रिसर्च (आईसीपीआर) के सदस्य सचिव प्रो. सच्चिदानंद मिश्र ने अपने वक्तव्य में कहा, “भारतीय दर्शन केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि समकालीन वैश्विक चुनौतियों के समाधान की क्षमता रखता है। भारत बोध संवाद शृंखला इस दार्शनिक परंपरा को समाज के व्यापक वर्ग तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम बनेगी।”
वहीं आयोजन समिति के सदस्य प्रो. रजनीश कुमार मिश्र ने बताया कि “भारत बोध संवाद शृंखला 2025–26 के अंतर्गत प्रस्तावित 100 सत्र देश के विभिन्न प्रमुख शैक्षणिक और सांस्कृतिक केंद्रों में आयोजित किए जाएंगे, जिससे भारत की विविध बौद्धिक परंपराओं को एक साझा मंच प्राप्त होगा।”
मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. मोधो गोविंद ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा की “ भारत को जानो , भारत को मानो और तब भारत को अपनाओ , यह संवाद शृंखला भारतीय संस्कृति, इतिहास और सामाजिक मूल्यों पर गंभीर विमर्श को प्रोत्साहित करेगी और अकादमिक जगत में बहुआयामी चिंतन को बल देगी।”
भारत बोध संवाद शृंखला के अंतर्गत विमर्श के प्रमुख विषयों में भारतीय संस्कृति, दर्शन एवं इतिहास, सांस्कृतिक संरक्षण एवं पुरातात्विक विरासत, समुद्री विरासत एवं भू-राजनीतिक महत्व, संवैधानिक मूल्य एवं सुशासन, पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्रीय सुरक्षा, तकनीकी आत्मनिर्भरता तथा सामाजिक समरसता शामिल हैं।
यह शृंखला दिल्ली-एनसीआर सहित असम, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गोवा, केरल, ओडिशा, मध्य प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों के प्रमुख शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक केंद्रों में आयोजित की जाएगी।
कार्यक्रम के समापन उपरांत माननीय मंत्री श्री सरबानंदा सोनोवाल ने जीबीयू के सभी अधिस्थतगण , विभागाध्यक्ष और संकाय सदयों के साथ इस विषय पर खुली चर्चा की |







