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वैश्विक शोध संवाद का केंद्र बना गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय: IEEE अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन बौद्धिक मंथन चरम पर 

ग्रेटर नोएडा:गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में आयोजित द्वितीय IEEE अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 2026 (IC3ECSBHI-2026) का दूसरा दिन गहन बौद्धिक विमर्श, वैश्विक सहभागिता और अत्याधुनिक शोध चर्चाओं के साथ अत्यंत प्रभावशाली रूप से सम्पन्न हुआ। इंजीनियरिंग, संचार, विज्ञान एवं बायोमेडिकल हेल्थ इन्फॉर्मेटिक्स में कॉग्निटिव कंप्यूटिंग पर केंद्रित यह सम्मेलन अब एक सशक्त अंतरराष्ट्रीय अकादमिक मंच के रूप में उभर कर सामने आया है।

माननीय कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह के मार्गदर्शन में हुए इस सम्मेलन की व्यापकता पर प्रकाश डालते हुए डीन अकादमिक प्रो. राजीव वार्ष्णेय ने सम्मेलन के व्यापक स्तर पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसमें 2,300 से अधिक शोध पत्र प्राप्त हुए हैं, जो वास्तविक दुनिया की चुनौतियों के समाधान में आधुनिक शोध की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन कॉग्निटिव कंप्यूटिंग के माध्यम से सुदृढ़ इंजीनियरिंग प्रणालियों के डिज़ाइन, अनुकूलनीय संचार नेटवर्क के विकास तथा सटीक एवं रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है।

सम्मेलन का सफल संचालन विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. चंदर कुमार सिंह, जनरल चेयर प्रो. एम. ए. अंसारी, कॉन्फ्रेंस चेयर प्रो. कीर्ति पाल तथा कॉन्फ्रेंस सेक्रेटरी डॉ. निधि सिंह और डॉ. इंद्रजीत सिंह के नेतृत्व में किया जा रहा है।

दूसरे दिन की शैक्षणिक गरिमा को प्रतिष्ठित कीनोट वक्ताओं ने और सशक्त किया। अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए प्रो. वाई यी लियोंग (आई एन टी आई इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी , मलेशिया) ने वैश्विक शोध रुझानों पर प्रकाश डाला। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर प्रो. अखिलेश तिवारी (आई आई आई टी अलाहबाद ), प्रो. निश्‍चल के. वर्मा (आई आई टी कानपुर), प्रो. अभय बंसल (बेनेट यूनिवर्सिटी) तथा प्रो. मोहम्मद रिहान, महानिदेशक (नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोलर एनर्जी ) ने अपने-अपने क्षेत्रों की नवीनतम प्रगति साझा की।

इसके अतिरिक्त, जीबीयू के आंतरिक विशेषज्ञों—डॉ. राजेश मिश्रा, प्रो. कीर्ति पाल, डॉ. ओमवीर सिंह, डॉ. इंदु उप्रेती और डॉ. अनुराग बघेल ने तकनीकी सत्रों को समृद्ध बनाया।

दिनभर की गतिविधियों का केंद्र चार उच्च-प्रभावी तकनीकी सत्र रहे।

पहले सत्र में एआई, एनालिटिक्स और स्मार्ट कंप्यूटिंग के अंतर्संबंध, विशेष रूप से कॉग्निटिव सिग्नल्स और उन्नत कंप्यूटर विज़न पर चर्चा हुई।

दूसरे सत्र में नेक्स्ट-जेन इंटेलिजेंट इंजीनियरिंग के हार्डवेयर आयाम—वीएलएसआई डिज़ाइन, नैनोइलेक्ट्रॉनिक्स और इंटीग्रेटेड सर्किट्स—पर फोकस किया गया।

तीसरे सत्र में जिम्मेदार, सुरक्षित और सतत एआई के साथ स्मार्ट एनर्जी सिस्टम्स पर मंथन हुआ।

वहीं चौथे सत्र में परसेप्चुअल कंप्यूटिंग, सॉफ्ट कंप्यूटिंग के कॉग्निटिव दृष्टिकोण तथा पावर कन्वर्टर्स और एनर्जी मैनेजमेंट में तकनीकी नवाचारों पर चर्चा की गई।

दिन का बौद्धिक शिखर “एआई और क्वांटम कंप्यूटिंग” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा रही, जिसमें शिक्षा और उद्योग के बीच गहन संवाद देखने को मिला। इस सत्र में कुशल पाल सिंह (सैमसंग इंडिया) और एर. सत्यानारायण पाल (एरिक्सन इंडिया ) ने उद्योग जगत के दृष्टिकोण से एआई और क्वांटम तकनीकों के संगम पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। इस विचारोत्तेजक सत्र का कुशल संचालन डॉ. मनमोहन सिंह सिसोदिया ने किया।

सम्मेलन का दूसरा दिन वैश्विक शोध, नवाचार और उद्योग–अकादमिक सहयोग का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा, जिसने गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय शोध मानचित्र पर और अधिक सुदृढ़ किया।

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