ग्रेटर नोएडा

साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए डॉ. रेनू यादव को मिला ‘कमला चौधरी सम्मान’ व ‘संत ग्लोबल नेक्स्टजेन आइकॉन अवार्ड’

ग्रेटर नोएडा:गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के भारतीय भाषा एवं साहित्य विभाग की असिस्टेंट प्रोफ़ेसर डॉ. रेनू यादव पिछले 15 वर्षों से विश्वविद्यालय में अपनी सेवाएँ दे रही हैं । डॉ. रेनू यादव का बचपन से ही लेखन में झुकाव रहा है, उन्होंने लेखन की शुरूआत छंदबद्ध कविताओं से की तथा धीरे धीरे अतुकांत कविताओं तथा कहानियों पर कलम चलाने लगीं । कहानी, कविता, आलोचना के क्षेत्र में उन्होंने विशेष सफलता अर्जित की । जिसके लिए उन्हें कई पुरस्कार एवं सम्मान से पुरस्कृत एवं सम्मानित किया जा चुका है । पूर्व में इन्हें इफको द्वारा श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको युवा साहित्य सम्मान – 2024 से सम्मानित, भारतीय-नार्वेजीय सूचना एवं सांस्कृतिक फोरम द्वारा ‘अंतर्राष्ट्रीय प्रेमचंद सम्मान-2025’ से सम्मानित, बैखरी संस्था द्वारा ‘काला सोना’ कहानी-संग्रह ‘गोवर्धन लाल चौमाल कहानी पुरस्कार – 2023’ से पुरस्कृत, सृजन-सम्मान बहुआयामी सांस्कृतिक संस्था एवं प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान, रायपुर (छत्तीसगढ़) से ‘सृजन श्री’ सम्मान 2013, भारतीय दलित साहित्य अकादमी, दिल्ली से ‘विरांगना सावित्रीबाई फूले नेशनल फेलोशिप अवार्ड – 2012’ प्राप्त हो चुके हैं ।

इस वर्ष 2026 में डॉ. रेनू यादव को महिला-दिवस के अवसर पर साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए मूर्ति-देवी मालती देवी महिला सम्मान समारोह समिति द्वारा ‘कमला चौधरी सम्मान’ के प्रमाण-पत्र, शॉल एवं एक लाख रूपये की धनराशि प्राप्त हुई तथा गृहस्वामिनी पत्रिका द्वारा आयोजित संत ग्लोबल अवार्ड के अंतर्गत ‘संत ग्लोबल नेक्स्टजेन आइकॉन अवार्ड’ प्राप्त हुआ है।

डॉ. रेनू यादव हिन्दी की संजीदा युवा कवयित्री एवं लेखिका मानी जाती हैं । ये हिन्दी और भोजपुरी में लिखती हैं । पुस्तकों में खुखड़ी (भोजपुरी कहानी-संग्रह) 2025, काला सोना (कहानी-संग्रह) 2022, कथाओं के आलोक में : सुधा ओम ढींगरा (आलोचनात्मक) 2023, महादेवी वर्मा के काव्य में वेदना का मनोविश्लेषण (आलोचनात्मक) 2010, साक्षात्कारों के आईने में : सुधा ओम ढींगरा (संपादित) 2020 प्रकाशित चुकी हैं ।

डॉ. रेनू यादव पुरस्कारों के संदर्भ कहती हैं, “यह पुरस्कार मुझे प्रोत्साहित करते हैं और लेखन के प्रति मेरी प्रतिबद्धता को और अधिक बढ़ाते हैं । इसमें मेरे पुस्तकों के प्रकाशकों (शिवना प्रकाशन, सर्वभाषा ट्रस्ट, अन्नपूर्णा प्रकाशन) का विशेष योगदान है कि वे मेरी पुस्तकों को लगातार पाठकों तक पहुँचा रहे हैं ।“

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