रमजान माह में भी नहीं मिली रोजेदारों को गन्दे पानी से निजात
नमाजियों को कींचड और गन्दे पानी से होकर पहुंचना पड़ता है मस्जिद ,जी भर कर कोस रहे नगरपंचायत के बे-लगाम सर्वे सर्वाओं को

औरंगाबाद( बुलंदशहर )कस्बे के मौहल्ला देहली दरवाजा में वाल्मीकि बस्ती, लोहारू मस्जिद, और पुराने वीसीआर के आसपास,नालियों में कींचड गन्दे पानी और सड़क पर हो रहा जलभराव कस्बे के तमाम विकास कार्यों की पोल पट्टी खोल ता साफ नजर आ रहा है। खास बात यह है कि मुस्लिम समुदाय के सबसे अहम और पाक रमजान माह में भी नमाजियों और रोजेदारों को इस समस्या से रोजाना जूझते हुए नमाज अदा करने लोहारू मस्जिद तक पहुंचना पड़ रहा है। लेकिन भृष्टाचार और घपलों में मशगूल सर्वेसर्वा चैन की नींद ले रहे हैं। नगर पंचायत में कार्यरत कर्मचारियों तक को इस गन्दे पानी से होकर गुजरता साफ देखा जा सकता है लेकिन सर्वेसर्वाओं की कारगुजारी के चलते वो भी बेबस नजर आ रहे हैं।
नगर पंचायत औरंगाबाद में भले ही सर्वेसर्वा बेहतर जल निकासी,चाक चौबंद सफाई व्यवस्था और गुणवत्तापूर्ण विकास कार्यों का ढोल पीटने में लगे हुए हों हकीकत इसके विपरीत है। यदि आपको सफाई व्यवस्था और गुणवत्तापूर्ण विकास कार्यों की हकीकत देखनी है तो वाल्मीकि चौक से लोहारू मस्जिद तक , पुराने वीसीआर तक मौका मुआयना करें। यहां आपको नालियों में कींचड गंदगी सड़कों पर लबालब बदबू दार गंदगी युक्त पानी बहता नजर आएंगे। इसी पानी से होकर तमाम मौहल्ले वाले, स्कूली बच्चे, लोहारू मस्जिद में नमाज अदा करने वाले नमाजियों और रोजेदारों को गुजरना पड़ता है। इसके अलावा कोई विकल्प है भी नहीं। ऐसा नहीं है कि मौहल्ले वालों ने नगर पंचायत के सर्वे सर्वाओं को स्थिति से अवगत ना कराया हो बार बार कहने गुहार लगाने के बाबजूद किसी के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती। फोटो खिंचवाने और विकास कार्यों का ढिंढोरा पीटने से यदि फुर्सत मिले तो इस मौहल्ले वालों की परेशानी भी दूर हो। लेकिन आंखों पर बंधी भृष्टाचार की पट्टी किसी भी सर्वेसर्वा को कुछ देखने ही नहीं देती। जिसके चलते देहली दरवाजे वाले नरक की जिंदगी जीने को विवश होकर सर्वेसर्वाओं को जी भर कर कोसते साफ नजर आते हैं।
रिपोर्टर राजेंद्र अग्रवाल






