जीबीयू के छात्रों ने किया हस्तिनापुर के ऐतिहासिक स्थलों का शैक्षणिक भ्रमण: विद्यार्थियों ने जानी पुरातात्विक एवं जैन विरासत

ग्रेटर नोएडा:गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के इतिहास एवं सभ्यता विभाग द्वारा प्राचीन नगरी हस्तिनापुर में एक शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन किया गया। इस अध्ययन यात्रा में बी.ए. एवं एम.ए. के 40 विद्यार्थियों, 5 संकाय सदस्यों तथा एक शोधार्थी ने सहभागिता की। विभागाध्यक्ष डॉ. रितिका जोशी के नेतृत्व में संपन्न यह भ्रमण विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं अनुभवात्मक रहा।

भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने हस्तिनापुर के प्रमुख पुरातात्विक स्थल का अवलोकन किया। स्थल प्रभारी अरविंद राणा ने उत्खनन प्रक्रिया, प्राप्त प्राचीन सिक्कों एवं अन्य पुरावशेषों के ऐतिहासिक महत्व तथा प्राचीन नगर संरचना के बारे में विस्तृत जानकारी दी। अरविंद राणा जी बताया कि इस स्थल का महत्वपूर्ण उत्खनन वर्ष 1952 में प्रसिद्ध पुरातत्वविद् बी. बी. लाल के निर्देशन में किया गया था, जिसने हस्तिनापुर की ऐतिहासिक परतों को समझने में आधारभूत भूमिका निभाई। इसके पश्चात वर्ष 2022 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन अधीक्षण पुरातत्वविद् डी. बी. गर्नायक के नेतृत्व में भी क्षेत्र में उत्खनन एवं अध्ययन कार्य को आगे बढ़ाया गया।
इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों ने हस्तिनापुर क्षेत्र के प्रमुख जैन धार्मिक स्थलों का भी भ्रमण किया। विशेष रूप से जंबूद्वीप जैन मंदिर सहित अन्य जैन मंदिरों की स्थापत्य विशेषताओं, धार्मिक महत्व एवं तीर्थ परंपरा पर विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर ने विद्यार्थियों को क्षेत्र की बहुआयामी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर प्रदान किया।
विभागाध्यक्ष डॉ. रितिका जोशी ने बताया कि ऐसे शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों से परे प्रत्यक्ष ऐतिहासिक साक्ष्यों से जोड़ते हैं और उनमें शोधपरक दृष्टिकोण विकसित करने में सहायक सिद्ध होते हैं। उन्होंने कहा कि पुरातात्विक एवं धार्मिक स्थलों का संयुक्त अध्ययन क्षेत्रीय इतिहास को समझने का प्रभावी माध्यम है।
इस शैक्षणिक यात्रा में विभाग के संकाय सदस्यों के रूप में डॉ. उपेन्द्र सिंह, डॉ. अंजू, डॉ. प्रियंका एवं डॉ. अनुराधा उपस्थित रहीं, जबकि शोधार्थी आयुष द्विवेदी ने भी सक्रिय सहभागिता की।
यह शैक्षणिक यात्रा विद्यार्थियों के लिए अनुभवात्मक अधिगम का एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हुई, जिससे उनमें इतिहास, पुरातत्व और सांस्कृतिक विरासत के प्रति गहरी रुचि एवं जागरूकता विकसित हुई।







