आस्था

आय के साथ-साथ भगवान की शरणागत भी – गोल्डी तेवतिया

बुलंदशहर:आय के साथ-साथ भगवान की शरणागत में रहकर प्रभु का भी होता है स्मरण यह कहना है गोल्डी तेवतिया एण्ड म्यूजिकल ग्रुप के डायरेक्टर गोल्डी तेवतिया का 24×7 के सह संपादक संजय गोयल से हुई एक वार्ता में जब हमारे संवाददाता ने गोल्डी तेवतिया से प्रश्न किया कि इंटर में अच्छे अंकों से पढ़ाई कर ढोलक वादन ही क्यों चुना तो गोल्डी तेवतिया ने कहा मुझे बचपन से ही ढोलक बजाने का शौक था और मेरे पापा भी जागरण पार्टी करते हैं मुझे अच्छा लगा कि भजन या जागरण मंडली में ढोलक बजाकर आय भी होगी और भगवान का स्मरण भी आगे बताया कि मैं दिन में दो से तीन प्रोग्राम तक कर लेता हूं बता दें की ढोलक बजाने में निपुण गोल्डी तेवतिया ने मात्र 12 वर्ष की बाल अवस्था से ही सुंदरकांड व भजन कीर्तन का कार्यक्रम शुरू कर दिया था और आज मात्र 17 साल की आयु में जब गोल्डी तेवतिया ढोलक बजाते हैं तो थिरकर उठते हैं भक्त बाल कलाकार गोल्डी ने बताया कि यह सब प्रेरणा मुझे अपने पापा बब्बू चौधरी और मम्मी जीतू चौधरी से मिली आज मैं जो भी हूं उन्हीं के आशीर्वाद से हूं,

रिपोर्ट-संजय गोयल सह संपादक ग्लोबल न्यूज़ 24×7

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