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AI से आत्मनिर्भरता तक: ‘मन की बात’ में विकसित भारत का दृष्टिकोण

प्रधानमंत्री का आह्वान — तकनीकी प्रगति से राष्ट्रनिर्माण तक

खेल, करुणा और कौशल का संदेश लेकर आया ‘मन की बात’ का 131वाँ संस्करण

नवभारत की नवचेतना: ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री का प्रेरक उद्बोधन

ग्रेटर नोएडा:भारत के दूरदर्शी एवं जननायक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 131वें संस्करण का सामूहिक श्रवण आज भारतीय जनता पार्टी, जिला गौतमबुद्धनगर के नगर अध्यक्ष अभिषेक शर्मा तथा ग्रेटर नोएडा मण्डल अध्यक्ष अर्पित तिवारी के संरक्षण में ग्रेटर नोएडा मण्डल के समस्त बूथों पर श्रद्धा, समर्पण और उत्साहपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यकर्ताओं एवं उनके परिजनों ने कार्यक्रम को राष्ट्रीय चेतना के पर्व के रूप में आत्मसात किया।

अपने प्रेरक उद्बोधन में प्रधानमंत्री ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में भारत की तीव्रगामी प्रगति का उल्लेख करते हुए नई दिल्ली में आयोजित एआई शिखर सम्मेलन की ऐतिहासिक उपलब्धियों को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत आज तकनीकी नवोन्मेष का वैश्विक ध्रुव बनकर उभर रहा है। AI अब केवल औद्योगिक परिधि तक सीमित नहीं, बल्कि कृषि, पशुपालन, स्वास्थ्य और जनजीवन के विविध आयामों में परिवर्तनकारी भूमिका निभा रहा है। यह ‘विकास से विश्वास’ की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक सशक्त कदम है।

खेल जगत का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने टी20 विश्व कप 2026 में विभिन्न देशों की टीमों में भारतीय मूल के खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन पर गौरव व्यक्त किया। “जो खेलता है, वही खिलता है” जैसे प्रेरक शब्दों के माध्यम से उन्होंने युवाओं में अनुशासन, परिश्रम और आत्मविश्वास का संचार किया। यह संदेश केवल खेल तक सीमित न रहकर जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सक्रियता और साधना का आह्वान करता है।

सामाजिक संवेदनशीलता को स्पर्श करते हुए प्रधानमंत्री ने केरल की एक नन्हीं बालिका के दुःखद निधन का उल्लेख कर अंगदान एवं स्वास्थ्य-जागरूकता के महत्व पर राष्ट्र का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने इसे मानवता, सहानुभूति और जीवन-मूल्यों के प्रति जागरूक होने का मार्मिक अवसर बताया। साथ ही, रमज़ान एवं होली जैसे पावन पर्वों के आगमन पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए सामाजिक समरसता, सौहार्द और राष्ट्रीय एकात्मता का संदेश दिया।

तकनीक और जन-जीवन के संबंध में उन्होंने युवाओं को नवाचार, स्टार्टअप एवं अनुसंधान के क्षेत्र में अग्रसर होने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि प्रौद्योगिकी का संतुलित, सकारात्मक और मानव-केंद्रित उपयोग ही राष्ट्र को आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में अग्रसर करेगा।

यह सामूहिक श्रवण कार्यक्रम न केवल विचारों का आदान-प्रदान था, अपितु राष्ट्रनिर्माण के संकल्प का पुनःस्मरण भी था।

 

रिपोर्ट -भगवत प्रसाद शर्मा

 

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