गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा जैव प्रौद्योगिकी में नई दिशाएँ

ग्रेटर नोएडा:गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी “स्वास्थ्य और चिकित्सा जैव प्रौद्योगिकी में नवीनतम प्रगति” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में विभिन्न प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञों को पुनर्योजी चिकित्सा, ऑर्गेनोइड्स और सार्वजनिक स्वास्थ्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों पर अत्याधुनिक शोध पर चर्चा करने के लिए एक साझा मंच प्रदान किया। इस संगोष्ठी में 130 से अधिक छात्रों एवं शोधार्थियों ने सहभागिता की, जिससे कार्यक्रम अत्यंत संवादात्मक एवं ज्ञानवर्धक रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय कुलसचिव प्रो. चंदर कुमार सिंह के प्रेरक उद्घाटन संबोधन से हुआ। उन्होंने कहा, “जैव प्रौद्योगिकी आज स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रही है। विश्वविद्यालय ऐसे मंच प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, जहाँ विद्यार्थी प्रत्यक्ष रूप से अग्रणी वैज्ञानिकों से संवाद कर सकें और अनुसंधान की नवीन संभावनाओं को समझ सकें।”
स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी की अधिष्ठाता प्रो. धनलक्ष्मी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा, “यह संगोष्ठी विद्यार्थियों को पुनर्योजी चिकित्सा, ऑर्गेनोइड्स और सार्वजनिक स्वास्थ्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे उभरते क्षेत्रों से परिचित कराने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। हमारा लक्ष्य है कि छात्र अनुसंधान उन्मुख दृष्टिकोण अपनाएँ और वैश्विक चुनौतियों के समाधान में योगदान दें।”
संगोष्ठी का मुख्य आकर्षण विश्वविद्यालय माननीय कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह का मुख्य भाषण रहा। उन्होंने ट्यूमर विषमता (ट्यूमर हेरेरोजिनिटी) और उसके चिकित्सीय प्रभावों पर विस्तृत व्याख्यान देते हुए कहा, “आधुनिक चिकित्सा में व्यक्तिगत उपचार की अवधारणा तेजी से विकसित हो रही है। ट्यूमर की जटिल संरचना को समझना प्रभावी उपचार रणनीतियों के विकास की कुंजी है। युवा शोधकर्ताओं को अंतर्विषयक अनुसंधान को अपनाना चाहिए।”
सत्रों में आईएलबीएस से डॉ. सवनीत कौर, एम्स नई दिल्ली से प्रो. सुजाता मोहंती, आईआईटी दिल्ली से प्रो. रितु कुलश्रेष्ठ एवं डॉ. सचिन कुमार बी, तथा टीएचएसटीआई से डॉ. संतोष एस. मथापति सहित अनेक प्रतिष्ठित वक्ताओं ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने लिवर ऑर्गेनोइड्स, कार्टिलेज पुनर्जनन, बायोमार्कर खोज और पुनर्योजी चिकित्सा जैसे विषयों पर अपने शोध साझा किए।
दोपहर सत्र में आईसीएमआर से डॉ. हरप्रीत सिंह, शारदा विश्वविद्यालय से डॉ. अनवर आलम एवं सुश्री बंदना कौर ने तपेदिक दवा लक्ष्यीकरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डाला।
संगोष्ठी के दौरान आयोजित पोस्टर प्रस्तुति में सुश्री साक्षी सिंह , सुश्री सिमरन सिंह और सुश्री राधवी माहेश्वरी प्रदर्शनी के विजेता रहे | छात्रों की सक्रिय भागीदारी और जिज्ञासु प्रश्नों ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विकास में इस आयोजन की सफलता को रेखांकित किया।
कार्यक्रम का समापन औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ।





