गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में पगोडा प्रतिष्ठा समारोह एवं अंतरराष्ट्रीय मामलों के निदेशक कार्यालय के नवीनीकरण का उद्घाटन

ग्रेटर नोएडा:गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू), ग्रेटर नोएडा में “पगोडा प्रतिष्ठा – न्यू मॉडल सेरेमनी” के अवसर पर एक महत्वपूर्ण एवं आध्यात्मिक रूप से समृद्ध कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय मामलों के निदेशक कार्यालय के नवीनीकरण का उद्घाटन भी किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने मुख्य अतिथि डॉ. टियो चू गुआन, संस्थापक एवं अध्यक्ष, वाकी रिलिक म्यूजियम, मलेशिया की गरिमामयी उपस्थिति में किया।
कार्यक्रम की शुरुआत डीन एकेडमिक्स प्रो. राजीव वार्ष्णेय के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने बौद्ध परंपरा में पगोडा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे ज्ञान, शांति और पवित्र अवशेषों के संरक्षण का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि पगोडा आध्यात्मिक स्थलों के रूप में श्रद्धा और सजगता (माइंडफुलनेस) को प्रेरित करते हैं।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के निदेशक एवं स्कूल ऑफ बौद्ध स्टडीज एंड सिविलाइजेशन के अध्यक्ष डॉ. चिंतला वेंकट सिवासाई, जो इस कार्यक्रम के समन्वयक भी थे, ने पगोडा की अवधारणा और “धम्म के उपहार” के गूढ़ विचार को विस्तार से समझाया। उन्होंने इसके पाली कैनन में निहित महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि न्यू मॉडल पगोडा सेरेमनी एक अभिनव पहल है, जो प्राचीन परंपरा को आधुनिक शैक्षणिक और वैश्विक परिप्रेक्ष्य से जोड़ती है तथा अंतर-सांस्कृतिक संवाद और आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ावा देती है।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने आंतरिक चेतना के विकास पर बल देते हुए कहा कि पगोडा आधुनिक समाज में माइंडफुलनेस, नैतिक जीवन और आध्यात्मिक जागरण के प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।
मुख्य अतिथि डॉ. टियो चू गुआन ने वाकी इंटरनेशनल ग्रुप के प्रेरणादायक दृष्टिकोण को साझा करते हुए बताया कि उनका लक्ष्य विश्व के 42 देशों में 84,000 पगोडा स्थापित और दान करना है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय इस वैश्विक आध्यात्मिक अभियान का हिस्सा बना है। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय के भिक्षुओं और भिक्षुणियों को नए पगोडा मॉडल औपचारिक रूप से भेंट किए, जो सीमाओं के पार धम्म के प्रसार का प्रतीक है।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के डीन, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, शोधार्थी तथा भिक्षु-भिक्षुणियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिससे यह आयोजन शैक्षणिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध बन गया।
अंत में डॉ. चिंतला वेंकट सिवासाई ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए कुलपति, मुख्य अतिथि, सभी विशिष्ट अतिथियों एवं सहभागियों का आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग से यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।






