राष्ट्रीय

मन की बात के 132वें संस्करण में प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम प्रेरक संदेश

प्रधानमंत्री का देशवासियों से आह्वान: जिम्मेदारी, संयम और सहभागिता से बनेगा आत्मनिर्भर भारत

मन की बात’ में गूंजा सामूहिक शक्ति का संदेश: 140 करोड़ भारतीयों की एकता ही सबसे बड़ी ताकत संकट के समय एकता का संदेश: प्रधानमंत्री ने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का किया आह्वान

भारत के दूरदर्शी एवं जननायक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 132वें संस्करण का सामूहिक श्रवण आज भारतीय जनता पार्टी, जिला गौतमबुद्धनगर के अध्यक्ष अभिषेक शर्मा तथा ग्रेटर नोएडा मण्डल अध्यक्ष अर्पित तिवारी के संरक्षण में ग्रेटर नोएडा मण्डल के समस्त बूथों पर श्रद्धा, समर्पण और उत्साहपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ।

प्रधानमंत्री ने आज ‘मन की बात’ के 132वें संस्करण के माध्यम से देशवासियों को संबोधित करते हुए वर्तमान वैश्विक परिदृश्य, राष्ट्रीय एकता, जनसहभागिता तथा सतत विकास के विविध आयामों पर अपने विचार व्यक्त किए। उनके उद्बोधन में समकालीन चुनौतियों के प्रति सजगता, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा सामूहिक चेतना का सशक्त आह्वान परिलक्षित हुआ।

प्रधानमंत्री ने विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में व्याप्त संघर्षपूर्ण परिस्थितियों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इन घटनाक्रमों का प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था एवं ऊर्जा संसाधनों पर स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर हो रहा है। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना एवं अफवाहों से स्वयं को दूर रखते हुए केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही विश्वास करें, जिससे सामाजिक सौहार्द एवं स्थिरता अक्षुण्ण रह सके।

अपने संबोधन में उन्होंने राष्ट्रीय एकता की अनिवार्यता पर बल देते हुए कहा कि संकट के समय समस्त देशवासियों का दायित्व है कि वे व्यक्तिगत एवं राजनीतिक भिन्नताओं से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 140 करोड़ भारतीयों की सामूहिक शक्ति किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम है।

जल संरक्षण के विषय में प्रधानमंत्री ने देश के विभिन्न अंचलों से प्राप्त प्रेरणादायक उदाहरणों का उल्लेख किया, जहाँ जनभागीदारी के माध्यम से वर्षा जल संचयन एवं जल प्रबंधन के अभिनव प्रयास सफलतापूर्वक क्रियान्वित किए जा रहे हैं। उन्होंने इसे ‘जन-आंदोलन’ का स्वरूप प्रदान करने का आह्वान किया, जिससे भावी पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित हो सके।

भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में ‘ज्ञान भारतम’ पहल का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने पास सुरक्षित प्राचीन पांडुलिपियों एवं ऐतिहासिक दस्तावेजों की जानकारी साझा कर इस राष्ट्रीय अभियान में सहभागी बनें। उन्होंने इसे राष्ट्र की बौद्धिक धरोहर के पुनर्संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

स्वास्थ्य एवं जीवनशैली के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने संतुलित आहार एवं संयमित उपभोग पर विशेष बल देते हुए चीनी एवं खाद्य तेल के अत्यधिक प्रयोग में कटौती करने की सलाह दी। साथ ही, उन्होंने योग एवं नियमित व्यायाम को दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया।

युवा शक्ति की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री ने खेल, नवाचार एवं राष्ट्र-निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी को देश की प्रगति का आधार बताया। उन्होंने विभिन्न मंचों के माध्यम से युवाओं की बढ़ती सहभागिता को सकारात्मक संकेत करार दिया तथा उन्हें निरंतर सृजनात्मक योगदान हेतु प्रेरित किया।

अपने संदेश के समापन में प्रधानमंत्री ने स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण तथा स्थानीय उत्पादों के प्रोत्साहन को जन-आंदोलन का रूप देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इन सामूहिक प्रयासों के माध्यम से ही आत्मनिर्भर एवं सशक्त भारत के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा।

मन बात कार्यक्रम में ग्रेटर नौएडा मण्डल के अध्यक्ष अर्पित तिवारी के साथ इनकी टीम के सदस्य राघवेंद्र त्रिपाठी, सुनील पंडित, विजय कसाना, दुष्यंत चौहान, कपिल भाटी, संजय चौहान। मुकेश दीक्षित, रवि श्रीवास्तव।अमीता सिंह, भारत भूषण परमार, गौरव तोमर, भूपेन्द्र कुमार, गजेन्द्र विधुडी, पुनीत दीक्षित, आर्य कोरी। प्रभात अग्रवाल, अरूण मलेठा और भगवत प्रसाद शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे।

रिपोर्ट-भगवत प्रसाद शर्मा

 

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