हम दो हमारे बाह्तर, सनातन पर राजा भैया की चिंता उचित – दिव्य अग्रवाल (विचारक एवं लेखक)

विचार:छोटी छोटी बातें जिनका सामाजिक प्रभाव अकल्पनीय होता है भारत सरकार की आयुष्मान योजना का लाभ अधिकतर हिंदू परिवार प्राप्त ही नहीं कर पाते क्योंकि ऐसे हिंदू दंपतियों की संख्या बहुत कम है जिनके चार बच्चे हों इसी प्रकार शिक्षा के नाम पर हजारों करोड़ आबंटित होते हैं परंतु उनका लाभ मात्र मदरसों को मिलना और भारत एवं सनातन की आत्मा संस्कृत भाषा और गुरुकुल को न मिलना भी सामाजिक हित में नहीं है।
इन दोनों विषयों को बिना किसी विरोधाभास के सकारात्मक रूप से सरकार के समक्ष रखना और संपूर्ण सदन को गंभीर चिंतन करने हेतु कुंडा विधायक राजा भैया ने जिस प्रकार अपनी बात उत्तर प्रदेश विधानसभा में रखी है वह अभिनंदनीय है।
यह अत्यंत पीड़ादायक है कि हिंदू समाज अपने व्यक्तिगत जीवन में विभिन्न आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहा है जिसके निदान हेतु योगी जी महाराज की सरकार निरंतर प्रयासरत है तत्पश्चात भी बहुत से विषय ऐसे होते हैं जो सरकार के समक्ष उस दृष्टिकोण से रखने आवश्यक हो जाते हैं जिनमें कुछ सुधार की आवश्यकता होती है।
इसी क्रम में राजा भैया ने सुझाव दिया कि आयुष्मान योजना के नियमों में बदलाव अत्यंत आवश्यक है क्योंकि आयुष्मान का लाभ हिंदू परिवारों को कम जनसंख्या होने के कारण नहीं मिल रहा तो बात सही भी है जब हम दो हमारे दो के उदघोष को राष्ट्र हित में प्रोत्साहित किया जा रहा है तो आयुष्मान योजना का लाभ उन लोगों को क्यों जो हम दो और हमारे बाह्तर की योजना पर चलकर राष्ट के संसाधनों पर कब्जा करना चाहते हैं।
मात्र मदरसों को हजारों करोड़ का अनुदान देने के साथ साथ यदि राष्ट्र और सनातन की जीवनदायनी संस्कृत भाषा को प्रोत्साहित करने हेतु भी सरकार आर्थिक सहयोग करे तो इससे न केवल वेद पाठ करने वाले ब्राह्मणों को अपितु गुरुकुल परंपरा को भी पुनर्जीवित किया जा सकता है जिससे सनातन समाज को बहुत अधिक बल मिलेगा।
राजा भैया ,सनातन और राष्ट्रहित में अपने अनुभवों और सामाजिक चुनौतियों को समाज के समक्ष विभिन्न माध्यमों से निरंतर रख रहे हैं। अतः इन दोनों विषयों पर तार्किक विचार रखने हेतु राजा भैया साधुवाद के पात्र हैं।







