सौदामिनी संस्कृत महाविद्यालय का द्वितीय दिवस शताब्दी समरोह हुआ संपन्न

प्रयागराज : आज सौदामिनी संस्कृत महाविद्यालय के शताब्दी समारोह के द्वितीय दिवस का समारम्भ उद्घाटन सत्र से प्रारम्भ हुआ।(इस सत्र की अध्यक्षता प्रो० भगवत्शरण शुक्ल एवं सारस्वत अतिथि के रूप में हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रथयागराज के प्रधानमंत्री श्री कुन्तक मिश्र एवं मुख्य चित्र एवं वक्ता के रूप में पूर्व प्रशासनिक अधिकारी डॉ० सुरेन्द्र सुमार पाण्डेय उपस्थित रहे। मंचस्थ अतिथियों के कर कमलों द्वारा दीप जलाते हुए सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण द्वारा श्री गणेश हुआ। इस क्रम में क्षात्रों द्वारा वैदिक मंगलाचरण एवं लौकिक मंगलाचरण क्षात्रों द्वारा समपन्न हुआ तथा सभी अतिथियों का अंगवस्त्रम एवं माल्यार्पण द्वारा अभिनन्दन हुआ । इस अवसर पर सर्ववार्य इण्टर कालेज के प्रधानाचार्य डॉ. मुरार जी त्रिपाठी द्वारा संस्कृत में रचित ‘शब्दस्वरुप विमर्श कृति का विमोचन अतिथियो द्वारा किया गया। लेखक ने बताया कि यह पुस्तक भारतीय ज्ञानपरम्परा के महत्वपूर्ण सोपानों पर गहराई से प्रकाश डालती है।
इस अवसर पर मुख्यवक्ता डॉ. ऐस. के. पाण्डेय ने कहा कि संस्कृत में हमारे संस्कारों का समवेत स्वरूप निहित हैं जो हमारी संस्कृति के मूल है। जीवन में छोटी-छोटी बातें अत्यन्त महत्व की होती हैं जिनपर विद्वानों को प्रकाश डालने की आवश्यकता है। सारस्वत अतिथि श्री कुंतक मिश्र जी ने संस्कृतभाषा को जीवनोपयोगी एवं विज्ञान के युग में प्रभावकारी भाषा बताया। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ.भगवत शरण शुक्ल ने छात्रों को प्रतियोगिता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए समझाया कि विद्यार्थी श्रद्धा एवं आस्था तथा गुरु सेवा के द्वारा ही ज्ञानार्जन किया जा सकता है।
इसके अनन्तर प्रतियोगिताओं का क्रम शुरु हुआ और सर्वप्रथम सामूहिक गीतगान प्रक्रियोगिता डॉ० शम्भुनाथ त्रिपाठी अंशुल डॉ.राजेन्द्र त्रिपाठी, रसराज तथा श्रीमती सुरुचि त्रिपाठी के निर्णायकत्व में सम्पन्न हुई जिसमें सौदामिनी स. म. वि. प्रयाग प्रथम, केशलवन वेदविद्यालय द्वितीय,महर्षिपाणिनी स. उ. मा. प्रयागराज तृतीय,गंगा नाथ झा के. स. वि. सांत्वना पुरस्कार को प्राप्त हुआ।
इसके बाद तर्क संग्रह कंठस्ठीकरण प्रतियोगिता के निर्णायक डॉ० कृपा शंकर मिश्र, जो मूलचन्द्र शुक्ल, एवं डॉ० शेषनारायण शुक्ल रहे। जिसमें शिवाकान्त मिश्र प्रथम, विशाल दिवेदी द्वितीय ऋषभ पाण्डेय तृतीय एवं अखिलकुमार सान्त्वना स्थान प्राप्त करने में सफल रहे। पुनः अमरकोश कंठस्थी करण प्रतियोगिता की योजना में डॉ० यशवन्त त्रिवेदी, डॉ राजकुमार मिश्र, डॉ० आशीष त्रिपाठी के निर्णायकत्व में शिवाकान्त मिश्र प्रथम, लवकुश दुबे -द्वितीय प्रहलाद मिश्र तृतीय एवं आशुतोष तिवारी, सान्त्वना पुरस्कार प्राप्त करने में सफल हुए। इसके पश्चात् सूत्रान्ताक्षरी प्रतियोगिता डॉ. मुरार जी त्रिपाठी, डॉ.शालीग्राम त्रिपाठी डॉ.रमेशकुमार तिवारी के निर्णायकत्व में शशांक प्रथम, शिवाकान्त द्वितीय प्रहलाद मिश्र तृतीय एवं कीर्तिका तिवारी सान्त्वना पुरस्कार प्राप्त कर अपने विद्यालय का मान संवर्धन किया।अंत में श्लोका अंताक्षरी प्रतियोगिता का समारंभ हुआ जिसमें डॉक्टर मुरार जी त्रिपाठी, डॉ मूलचंद शुक्ला एवं डॉक्टर शेषनारायण शुक्ला के निर्णायकतत्व में संपन्न हुई जिसमे प्रथम -प्रहलाद मिश्र तथा द्वितीय स्थान आशुतोष तिवारी, तृतीय सुरेश चन्द्र एवं सांत्वना पुरस्कार राममाधव पाल को मिला।. समस्त प्रतियोगिताओं का संचालन डॉक्टर शंभू नाथ त्रिपाठी अंशुल एवं आभार प्रदर्शन प्राचार्य डॉक्टर मन मुदित नारायण शुक्ला जी ने किया।






