शिविर के तृतीय दिवस पर नशा उन्मूलन एवं अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस विषयक संगोष्ठी आयोजित

दनकौर:आज श्री द्रोणाचार्य पी.जी. कॉलेज, दनकौर की राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई द्वारा आयोजित सात दिवसीय विशेष शिविर के तृतीय दिवस का कार्यक्रम प्राथमिक विद्यालय, ग्राम सालारपुर, विकासखंड दनकौर में उत्साह एवं जागरूकता के साथ संपन्न हुआ। यह शिविर महाविद्यालय के सचिव रजनीकांत अग्रवाल, प्राचार्य डॉ. गिरीश कुमार वत्स, कार्यक्रम अधिकारी डॉ. प्रशांत कनौजिया तथा सहायक कार्यक्रम अधिकारी श्री अमित नागर के मार्गदर्शन एवं देखरेख में संचालित हो रहा है।
दिन की शुरुआत स्वयंसेवकों एवं स्वयंसेविकाओं द्वारा श्रमदान से की गई। स्वयंसेवकों ने प्राथमिक विद्यालय परिसर में उगी अनावश्यक घास-फूस एवं फैली गंदगी को हटाकर स्वच्छता का संदेश दिया। श्रमदान के माध्यम से विद्यार्थियों ने समाज सेवा और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को व्यवहारिक रूप में प्रदर्शित किया। इसके पश्चात स्वयंसेवकों के लिए दोपहर के भोजन की व्यवस्था की गई।
दोपहर के सत्र में “नशा उन्मूलन” तथा “अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस” विषय पर एक संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता श्रीमती संगीता दुष्यंत सिंह गौड़, वरिष्ठ हेल्थ एंड वेलनेस कंसल्टेंट रहीं। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ हुआ। इसके उपरांत स्वयंसेविकाओं ने सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत प्रस्तुत कर अतिथियों का अभिनंदन किया।
डॉ अज़मत आरा ने मुख्य वक्ता को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर डॉ. प्रशांत कनौजिया ने अपने संबोधन में कहा कि नशा केवल एक व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय प्रगति के मार्ग में बाधा बनने वाली गंभीर चुनौती है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि जागरूकता, आत्मानुशासन और सकारात्मक सोच के माध्यम से ही समाज को नशा-मुक्त बनाया जा सकता है।
डॉ. राजीव पांडे ने अपने व्याख्यान में कहा कि नशे की प्रवृत्ति युवाओं के बौद्धिक और नैतिक विकास को बाधित करती है तथा शिक्षा जगत पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि “नशा मनुष्य की चेतन अवस्था को सुप्त अवस्था में परिवर्तित कर देता है और यह सुप्त अवस्था व्यक्ति को अंधकार की दिशा में ले जाती है।” उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी ऊर्जा और प्रतिभा को सकारात्मक दिशा में लगाते हुए नशे जैसी प्रवृत्तियों से दूर रहें।
डॉ. अमित नागर ने नशे को “जहर का प्याला” बताते हुए कहा कि यह धीरे-धीरे व्यक्ति के शरीर, मन और सामाजिक जीवन को नष्ट कर देता है। उन्होंने युवाओं को लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा दी।
डॉ. सूर्य प्रताप राघव ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि युवा शक्ति यदि नशे से दूर रहकर अपने जीवन के उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित करे, तो वह समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि नारी शक्ति ही विकास और प्रगति की आधारशिला है, क्योंकि समाज की वास्तविक उन्नति तभी संभव है जब महिलाओं को सम्मान, अवसर और सुरक्षा प्राप्त हो।
कार्यक्रम में डॉ. अजमत आरा ने अत्यंत प्रेरणादायी ढंग से “संघर्ष से सफलता की यात्रा” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि जीवन में आने वाली कठिनाइयाँ ही मनुष्य को मजबूत बनाती हैं और वही व्यक्ति आगे बढ़ता है जो चुनौतियों का साहसपूर्वक सामना करता है। उन्होंने साहित्यिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि समाज में परिवर्तन सदैव संघर्ष, जागरूकता और सकारात्मक चिंतन से ही संभव हुआ है।
डॉ. अजमत आरा ने विशेष रूप से नारी की बदलती पहचान और नेतृत्व क्षमता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज की बेटी शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन, साहित्य और सामाजिक नेतृत्व के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रही है। उन्होंने कहा कि बेटियों का नेतृत्व और नारी की सशक्त भूमिका ही एक सशक्त और संवेदनशील राष्ट्र के निर्माण का आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि युवा पीढ़ी शिक्षा, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी को अपनाए, तो वह एक ऐसे समाज का निर्माण कर सकती है जहाँ समानता, सम्मान और सहयोग की भावना मजबूत हो।
सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत स्वयंसेवकों की टोलियों ने नशा उन्मूलन विषय पर आधारित कविताओं का पाठ, नारी सशक्तिकरण पर भाषण तथा संवाद प्रस्तुत किए, जिनसे उपस्थित विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों में जागरूकता का संदेश प्रसारित हुआ।
कार्यक्रम के अंत में सहायक कार्यक्रम अधिकारी अमित नागर ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया। अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का सौहार्दपूर्ण समापन हुआ।






