शिक्षण संस्थान

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में “वस्तु एवं सेवा कर तथा समावेशी विकास” पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल शुभारंभ

ग्रेटर नोएडा: गौतमबद्ध यूनिवर्सिटी के प्रबंधन अध्ययन संकाय द्वारा Indian Council of Social Science Research के सहयोग से “नेक्स्ट जेनरेशन वस्तु एवं सेवा कर तथा समावेशी विकास: उभरते सामाजिक-आर्थिक आयाम” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का प्रथम दिवस आज सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। संगोष्ठी में देश के विभिन्न भागों से शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, शोधार्थियों एवं उद्योग विशेषज्ञों की उल्लेखनीय सहभागिता रही।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने की। अपने उद्बोधन में उन्होंने Goods and Services Tax (वस्तु एवं सेवा कर) को भारत की आर्थिक संरचना को सुदृढ़ करने वाला एक महत्वपूर्ण सुधार बताते हुए समावेशी विकास की दिशा में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने समकालीन राजकोषीय चुनौतियों के समाधान हेतु सार्थक अकादमिक विमर्श की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्य अतिथि प्रो. शक्ति कुमार ने वस्तु एवं सेवा कर के बदलते आयामों एवं उसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर विचार व्यक्त करते हुए इसे अधिक प्रभावी एवं न्यायसंगत बनाने के लिए निरंतर नीतिगत सुधारों की आवश्यकता रेखांकित की। मुख्य वक्ता श्री उपेंद्र गुप्ता ने अपने प्रशासनिक अनुभव के आधार पर जीएसटी के क्रियान्वयन से संबंधित व्यावहारिक चुनौतियों तथा भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए अनुपालन तंत्र को सुदृढ़ करने के उपाय सुझाए।

इस अवसर पर प्रो. डी. के. मदान, प्रो. आज़ाद सिंह, डॉ. जगदीप, प्रो. हंसा जैन एवं प्रो. अर्नाचलम सहित अन्य विद्वानों ने कर सुधार, लोक नीति एवं समावेशी विकास के विभिन्न आयामों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

डॉ. इंदु उप्रेती ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए संगोष्ठी के उद्देश्यों एवं इसकी समकालीन प्रासंगिकता को रेखांकित किया। कार्यक्रम का संयोजन संयोजक डॉ. ओमबीर सिंह द्वारा किया गया, जिनके कुशल निर्देशन में आयोजन सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ। डॉ. सुभोजीत बनर्जी की उपस्थिति एवं सहयोग भी कार्यक्रम के सफल संचालन में सहायक रहा।

संगोष्ठी में श्री बृज गुहारे सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के अनेक शोधार्थियों की सक्रिय भागीदारी ने विचार-विमर्श को और अधिक समृद्ध बनाया। प्रथम दिवस का समापन सार्थक अकादमिक चर्चाओं के साथ हुआ, जिसने आगामी तकनीकी सत्रों के लिए एक सुदृढ़ आधार प्रदान किया।

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