राजा भैया के विरुद्ध षड्यंत्र का जाल तो कट रहा है पर भरपाई कौन करेगा – दिव्य अग्रवाल (लेखक व विचारक )

सोशल मीडिया,इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर ट्रायल करके टी आर पी बढ़ाने का व्यापार आज कल प्रचलन में है लेकिन जब न्यायपालिका का निर्णय इन सब ट्रायलो की धज्जिया उडाता है तो इन ट्रायल चलाने वालो का मुँह तो बंद हो जाता है पर जिस व्यक्ति के विरुद्ध इस प्रकार के षड्यंत्र भरे ट्रायल चलाये जाते हैं और उनसे जो सामाजिक ख्याति , मानसिक शान्ति का नुकसान होता है उसकी भरपाई कोई नहीं करता।
कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया जिनके विरुद्ध उनकी पत्नी ने घरेलू हिंसा के आरोप लगाए थे मीडिया ने उन आरोपों का आधार जाने बिना ही मीडिया ट्रायल करना शुरू कर दिया जबकि सत्यता यह थी की राजा भैया और भानवी सिंह जी का विवाह वर्ष 1995 में हुआ और वर्ष 2015 तक भानवी सिंह जी ने कोई भी घरेलू हिंसा का आरोप राजा भैया पर नहीं लगाया अर्थात विवाह के 20 वर्षो तक कोई भी आरोप भारत के किसी भी थाने या न्यायालय में भानवी जी द्वारा राजा भैया के विरुद्ध नहीं लगाया गया और वर्ष 2025 में हिंसा का आरोप लगाया गया और कहा गया कि 2015 में राजा भैया द्वारा घरेलू हिंसा की गई ।
अब सारांश समझिए एक विवाह 20 वर्षों तक सही चलता है फिर एक घटना होने का दावा किया जाता है जिसका मुकदमा तब दर्ज न कराके 10 वर्ष बाद कराया जाता है क्या यह बात विश्वास करने योग्य है, शायद नहीं। इसलिए दिल्ली की कोर्ट ने संविधान के अनुरूप भानवी जी के आरोपों का संज्ञान नहीं लिया । क्या मीडिया को ट्रायल चलाने से पूर्व सत्यता का पता नहीं करना चाहिए था, ये कितना भयावह हो चूका है की यदि कोई विषय सार्वजनिक हो जाय तो समाज भी बिना कुछ सोचे समझे अपनी प्रतिक्रिया देने लगता है । क्या सही है क्या गलत , न्यायपालिका से सब स्पष्ट हो जाता है इसलिए सस्ती लोकप्रियता बटोरने से पूर्व समाज को भी सोचना चाहिए और धैर्य धारण करना चाहिए ।
रही बात राजा भैया की तो जितना देखा गया राजा भैया ने भानवी जी के किसी भी आरोप का न तो कोई अमर्यादित जवाब दिया और न ही मीडिया को कोई जानकारी सार्वजनिक की, धीरे धीरे सब कुछ सामने आ रहा है EOW वाले मुकदमे में भी राजा भैया के पारिवारिक व्यक्ति अक्षय प्रताप सिंह को दोषी न पाते हुए शिकायत को निरस्त कर दिया गया,
राजा भैया के बारे में सुना है की वो प्रतिवर्ष सैकड़ो कन्याओ का विवाह करवाते हैं ,लोगो का उपचार करवाते हैं आवश्यकतानुसार हर सम्भव मदद अपने लोगो की करते हैं ऐसे व्यक्ति पर कुछ भी कहने से पहले मंथन करना चाहिए क्यूंकि कोई व्यक्ति संघर्ष और सेवा से अपनी ख्याति को समाज में स्थापित करता है उसको धूमिल करने का अधिकार किसी को नहीं होना चाहिए।







