विचार

PDA फार्मूला दलित और कमजोर हिन्दुओ की दुर्गति का सर्टिफिकेट – दिव्य अग्रवाल (लेखक व विचारक)

विचार:इसमें कोई संदेह नहीं की लोकतंत्र की आत्मा उस राष्ट्र का संविधान होता है लेकिन जब आत्मा को ही मार दिया जाए तो लोकतंत्र रुपी मृत देह को ढोने से कोई लाभ नहीं होता । संविधान निर्माताओं ने भारतीय संविधान में धर्मनिरपेक्ष और समाजवाद जैसे शब्द कभी उपयोग नहीं किए लेकिन तत्कालीन सरकारों ने समाज को भ्रमित कर एक वोट बैक निर्मित करने के प्रयास में इन शब्दों को संविधान में जोड़कर मूल प्रस्तावना ही बदल दी ,बाबा साहेब जैसे अन्य बुद्धिजीवियों की बुद्धिमता को अपमानित करते हुए जिन लोगो ने तब से लेकर आज तक बाबा साहेब के नाम पर राजनीति की क्या वो लोग संविधान से धर्मनिरपेक्ष और समाजवाद जैसे शब्द हटवाने की मांग रख सकते हैं । कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह ने संविधान की मूल प्रस्तावना को वापस लाने हेतु उत्तर प्रदेश की विधानसभा में व्याख्यान दिया जो समूचे भारत के लिए बड़ा प्रश्न है आम जनमानस को तो ज्ञात ही नहीं था की यह दोनों शब्द संविधान निर्माताओं ने नहीं अपितु सत्ता भोगने वाले नेताओ ने संविधान में डलवाकर संविधान की मूल आत्मा को ही खंडित किया है। संविधान निर्माता बाबा साहेब ने विभाजन के समय स्पष्ट कहा था की जब धर्म के नाम पर भारत भूमि का विशाल भू भाग और संसाधन पाकिस्तान को दिया जा रहा है तो भारत में एक भी मुस्लिम को रोकना भारत और भारत के लोगों के साथ धोखा होगा, क्या बाबा साहेब के विचारों का सम्मान करते हुए PDA फॉर्मूले में इस बात का समर्थन या मांग की जा सकती है शायद नहीं, क्योंकि देश में पिछड़े और दलित समाज को PDA फॉर्मूले से भ्रमित करने वाला इंडि गठबंधन तब निश्चित ही मौन धारण कर लेता है जब दलित हिन्दू बच्चियों के साथ मजहबी अपराधियों द्वारा किए गए बलात्कार की घटना सामने आती है या जब मजहबियों द्वारा दलित हिन्दू समाज के किसी व्यक्ति की मॉब लिंचिंग में हत्या कर दी जाती है ।

राजनीति करना एक लोकतान्त्रिक अधिकार है पर जातिगत विष घोलकर मजहबी अपराध,हत्या,बलात्कार जैसी विभत्ष घटनाओं पर PDA का मौन धारण करना यह दर्शाता है की पिछड़ा और दलित समाज की चिंता नहीं बल्कि उनकी कुर्बानी पर सत्ता की चाबी प्राप्त करनी है । योगी सरकार और उनकी पुलिस साधुवाद की पात्र है जो ऐसे अपराधियों पर कठोर कार्यवाही कर रही है जो मजहब के नाम पर दलित हिन्दुओ के बच्चो को प्रताड़ित कर रहे हैं ।

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