ग्रेटर नोएडा

जीबीयू में ‘आईसीटी एंड इमर्जिंग टेक्नॉलजीज’ विषय पर तीन दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का शुभारंभ

शिक्षकों के लिए आईसीटी एवं उभरती तकनीकों की समझ और उनका व्यावहारिक उपयोग आवश्यक -प्रो. राजीव

ग्रेटर नोएडा:गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशनल टेक्नोलॉजी , राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद के सहयोग से “ आईसीटी एंड इमर्जिंग टेक्नॉलजीज” विषय पर तीन दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी तथा उभरती हुई तकनीकों से परिचित कराना और शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में इनके प्रभावी एवं नवाचारपूर्ण उपयोग के लिए सक्षम बनाना है।

कार्यक्रम के प्रथम दिवस का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना, अतिथियों का स्वागत तथा वंदे मातरम् की प्रस्तुति साथ हुआ । उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षाविदों एवं सी आई ई टी -एनसीईआरटी के विशेषज्ञों ने तकनीकी शिक्षा के बदलते स्वरूप और उच्च शिक्षा में ICT की बढ़ती भूमिका पर विचार व्यक्त किए।

इस अवसर पर गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के डीन एकेडमिक्स प्रो. राजीव वार्ष्णेय ने अपने संबोधन में तकनीकी दक्षता को वर्तमान उच्च शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग बताया। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते तकनीकी परिदृश्य में शिक्षकों के लिए आईसीटी एवं उभरती तकनीकों की समझ और उनका व्यावहारिक उपयोग आवश्यक है। उन्होंने शिक्षकों के व्यावसायिक विकास तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षण में तकनीकी संसाधनों की उपयोगिता पर विशेष रूप से प्रकाश डाला।

इसके पश्चात शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. श्रुति कंवर ने स्वागत संबोधन प्रस्तुत किया। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजन के उद्देश्यों एवं इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में तकनीकी नवाचार शिक्षा व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। उन्होंने शिक्षकों से नवीन तकनीकों को अपनाने तथा उन्हें शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का प्रभावी हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में सी आई ई टी -एनसीईआरटी के प्रो. शिरीष पाल सिंह ने आईसीटी एवं उभरती हुई तकनीकों के तेजी से बदलते परिदृश्य पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में इन तकनीकों की संभावनाओं, उपयोगिता और भविष्य की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने तीन दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए प्रतिभागियों को आगामी तीनों दिनों में आयोजित होने वाले विभिन्न तकनीकी सत्रों एवं विषय-वस्तु से अवगत कराया।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित विशेषज्ञों ने आईसीटी तथा उभरती तकनीकों के माध्यम से शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार, डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग तथा विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया को अधिक सहभागितापूर्ण बनाने की संभावनाओं पर विचार साझा किए।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित विशेषज्ञों ने तीन दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम की सफलता के लिए शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग, सी आई ई टी -एनसीईआरटी तथा सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएँ प्रेषित कीं। यह कार्यक्रम शिक्षकों को नवीनतम तकनीकी उपकरणों एवं शैक्षिक तकनीकों से परिचित कराने के साथ-साथ उच्च शिक्षा में डिजिटल एवं तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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