शारदा विश्वविद्यालय में फ़ूड, फ़ार्मा और क्लिनिकल सुरक्षा के क्षेत्र में असल दुनिया के कौशल से छात्रों को सशक्त बनाने हेतु किया गया कार्यक्रम आयोजित

ग्रेटर नोएडा :शारदा विश्वविद्यालय की सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेशन फैसिलिटी (CIF) द्वारा परमाणु अवशोषण स्पेक्ट्रोस्कोपी: खाद्य, फार्मा एवं क्लिनिकल विश्लेषण पर केंद्रित प्रशिक्षण विषय पर एक दिवसीय गहन व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। 
इस गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और परमाणु अवशोषण स्पेक्ट्रोस्कोपी (AAS) के माध्यम से तत्वीय विश्लेषण के व्यावहारिक अनुप्रयोगों की जानकारी प्राप्त की। प्रशिक्षण का मुख्य फोकस विभिन्न वास्तविक नमूनों में भारी धातुओं तथा आवश्यक खनिज तत्वों के निर्धारण पर रहा। प्रशिक्षण के दौरान रक्त, खाद्य पदार्थ, कच्चे जल तथा पेयजल जैसे विभिन्न नमूनों का विश्लेषण किया गया। इंटरैक्टिव सेशन के ज़रिए, प्रतिभागियों ने सीखा कि बायोलॉजिकल, फ़ूड और एनवायरनमेंटल मैट्रिक्स में भारी धातुओं (heavy metals) और ज़रूरी खनिजों (minerals) का पता लगाने के लिए एडवांस्ड एनालिटिकल तकनीकों का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है। यह जानकारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ी है—यह भविष्य के प्रोफ़ेशनल्स को पीने के पानी की सुरक्षा सुनिश्चित करने, खाने की चीज़ों में न्यूट्रिशनल क्वालिटी की निगरानी करने और क्लिनिकल डायग्नोस्टिक्स में मदद करने में सक्षम बनाती है। छात्रों को ये स्किल्स सिखाकर, यह प्रोग्राम पब्लिक हेल्थ की सुरक्षा और सस्टेनेबल तौर-तरीकों को बढ़ावा देने के समाज के बड़े लक्ष्य में योगदान देता है।

डीन (रिसर्च) प्रो. (डॉ.) भुवनेश कुमार ने बताया कि प्रतिभागियों को बायोलॉजिकल, खाद्य और पर्यावरणीय नमूनों में भारी धातुओं और खनिज तत्वों के विश्लेषण की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई। इसमें नमूना तैयार करने, इंस्ट्रूमेंटल एनालिसिस और क्लिनिकल, खाद्य और पानी के नमूनों में तत्वों की मात्रा का पता लगाने के लिए AAS (एटॉमिक एब्जॉर्प्शन स्पेक्ट्रोस्कोपी) के इस्तेमाल पर खास ज़ोर दिया गया। इस प्रैक्टिकल अनुभव से छात्रों को यह समझने में मदद मिली कि अलग-अलग तरह के नमूनों की गुणवत्ता और सुरक्षा की निगरानी के लिए एडवांस्ड एनालिटिकल तकनीकों का इस्तेमाल कैसे किया जाता है।
कुलपति,प्रो. (डॉ.) सिबराम खारा ने बताया कि, इस प्रकार के व्यावहारिक प्रशिक्षण विद्यार्थियों को उन्नत विश्लेषणात्मक उपकरणों के संचालन और उनके वास्तविक जीवन में अनुप्रयोग को समझने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि परमाणु अवशोषण स्पेक्ट्रोस्कोपी जैसी आधुनिक तकनीकें खाद्य, फार्मास्यूटिकल, क्लिनिकल एवं पर्यावरणीय नमूनों के विश्लेषण में अत्यंत उपयोगी हैं। ऐसे प्रशिक्षण विद्यार्थियों के तकनीकी एवं अनुसंधान कौशल को विकसित करने के साथ-साथ उन्हें उद्योग एवं शोध के लिए बेहतर ढंग से तैयार करने में सहायक होते हैं।
यह सफल प्रशिक्षण कार्यक्रम सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेशन फैसिलिटी, शारदा विश्वविद्यालय की विद्यार्थियों को उन्नत विश्लेषणात्मक तकनीकों में व्यावहारिक एवं उद्योग-उन्मुख प्रशिक्षण प्रदान करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। साथ ही, यह कार्यक्रम क्लिनिकल, खाद्य, फार्मास्यूटिकल तथा पर्यावरणीय विश्लेषण के क्षेत्रों में विद्यार्थियों के अनुसंधान एवं तकनीकी कौशल को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा।
कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अतुल कुमार गुप्ता, प्रमुख, सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेशन फैसिलिटी (CIF), के मार्गदर्शन में किया गया, जबकि डॉ. अफसर अली ने कार्यक्रम के समन्वयक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर देश-विदेश के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और प्रशिक्षण के दौरान परमाणु अवशोषण स्पेक्ट्रोस्कोपी (AAS) की व्यावहारिक एवं तकनीकी जानकारी प्राप्त की।






