दनकौर

श्री द्रोणाचार्य पी जी कॉलेज में महिला उत्पीड़न विरोधी समिति द्वारा छात्राओं को सजक बनाने के लिए “Campus Care Crew का किया गठन

दनकौर: श्री द्रोणाचार्य पी जी कॉलेज दनकौर ग्रेटर नोएडा में महिला उत्पीड़न विरोधी समिति के द्वारा छात्राओ को सजक बनाने के लिए “Campus Care Crew का गठन किया गया। जिसके द्वारा महाविद्यालय की छात्राओं को अलग-अलग विभाग से चयनित करके इसका सदस्य बनाया गया ताकि महिला उत्पीड़न विरोधी समिति का कार्य सुचारू रूप से किया जा सके। महाविद्यालय की 20 छात्राओं को इसमें शामिल कर उनके उत्तरदायित्व सौंपे गए। कार्यक्रम के आयोजन का मुख्य उद्देश्य महिला उत्पीड़न विरोधी समिति द्वारा नारी सुरक्षा, सावधानी एवं जागरूकता विषयक पर एक सूक्ष्म संगोष्ठी का आयोजन कराना था। जिसकी अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य डॉ० गिरीश कुमार वत्स जी ने की।

कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए नहिला उत्पीड़न विरोधी समिति संयोजिका, डॉ० अजमत आरा ने अपने उद्बोधन में अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लेख करते हुए बताया कि भारतीय संविधान महिलाओं को सम्मान, समानता और संरक्षण प्रदान करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अनुच्छेद महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान उपलब्ध कराते हैं। इसके पश्चात उप-प्राचार्या डॉ० रश्मि गुप्ता ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि अपनी सुरक्षा के प्रति सजग रहना प्रत्येक छात्रा की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कॉलेज में मौजूद कमेटी, हेल्प डेस्क और शिकायत प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की। साथ ही, कॉलेज परिसर में शिकायत पेटिका (Complaint Box) की व्यवस्था के बारे में बताते हुए समझाया कि यदि किसी छात्रा को कोई भी समस्या हो तो वह अपने नाम, पत्ते एवं प्रमाण सहित पत्र उसमें डाल सकती है। ऐसी शिकायतों का निस्तारण शीघ्र ही किया जाएगा। डॉ० रश्मि जहाँ ने छात्राओं को संबोधित करते हुए आश्वासन दिया कि किसी भी प्रकार की शिकायत पर तत्काल (On the Spot) कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने कहा कि आजकल अधिकांश समस्याओं का कारण पीढीगत अंतर (Generation Gap) है, इसलिए संवाद ही समाधान का माध्यन बन सकता है। डॉ० रेशा ने महिलाओं की छठी इंद्री पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमें इनका उपयोग सुरक्षा के लिए करना चाहिए, न कि किसी की छवि धूमिल करने के लिए। डॉ० नाज परवीन ने कहा कि महिला अधिकारों से संबंधित बहुत सारे कानून बनाए गए हैं लेकिन जब तक हम उन कानूनों के प्रति सजक नहीं होंगे तो सार्थकता सिद्ध नहीं होगी। हर बालिका आगे चलकर एक सशक्त महिला बने इसलिए “न जुल्म सहना है और न ही जुल्म करना है” कि पॉलिसी अपनाना होगा। डॉ० संगीता रावल ने उद्देश्यपूर्ण (इरादतन) तथा गैर इरादतन अपराधों से संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी देकर छात्राओं को जागरूक किया। अंत में डॉ० प्रीति रानी सैन ने अपने संबोधन में छात्राओं को उन दैनिक स्थितियों एवं व्यवहारों के प्रति सचेत किया, जिनमें कानूनी रूप से महिलाओं को संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा की समझ और उचित व्यवहार मिलकर एक सशक्त एवं संवेदनशील व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। संगोष्ठी का समापन सभी वक्ताओं के आभार के साथ किया गया, जिसमें उपस्थित छात्राओं को स्वरक्षा, संवेदनशीलता और सजगता के साथ समाज में सकारात्मक भूमिका निभाने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय की छात्राओं एवं अधिकांश महिला प्राध्यापिकाओं ने अपना सहयोग एवं समर्थन दिया।

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