कुरान की चर्चा अब भारतीय संसद में भी – दिव्य अग्रवाल (लेखक व विचारक)

शिक्षा से उत्तम, जीवन में कुछ भी नहीं लेकिन यही शिक्षा जब वैमन्सयता का रूप ले ले तो उससे ज्यादा घातक और भयावह भी कुछ नहीं। कुरान जो इस्लामिक शिक्षा का मुख्य स्तोत्र है उसकी कुछ आयतो को लेकर यदा कदा प्रश्न उठते आएं हैं जिसको लेकर विश्व की अनेको संसदो में चर्चा भी हुई है और कहा गया है की कुछ आयते ऐसी हैं जिनका अनुवाद यदि किया जाए तो उनसे दूसरे धर्मो के प्रति वैमन्सयता जन्म लेगी । इसको लेकर कईं वर्ष पूर्व दिल्ली मेट्रोपोलियन कोर्ट ने भी आदेश दिए थे की ऐसी कोई भी मजहबी शिक्षा जिनसे हीनियस क्राइम करने की प्रेरणा पोषित हों उस शिक्षा पर सार्वजनिक चर्चा हो,सुधार हो और आवश्यक हो तो उन पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए परन्तु वह बात आगे बढ़ नहीं पायी। अब इसी सापेक्ष में भारत की संसद से एक माननीय सांसद ने प्रश्न उठाया है और कहा की यदि कुरान की उन बातो को हिन्दू पढ़ ले तो क्या होगा यह तो हिन्दुओ की भलमनसाई है की अपने प्रति ऐसी विचारधारा को पोषित होता हुआ देखकर भी मौन है। इसी प्रश्न को लेकर वसीम रिजवी जिन्होंने इस्लाम मजहब का त्याग कर दिया है उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी की कानूनी रूप से उन आयतों पर चर्चा हो लेकिन वह याचिका कोर्ट ने सुनवाई हेतु स्वीकार नहीं की। अब प्रश्न यह उठत्ता है की यदि वास्तव में इसमें सत्यता है जैसा की इंटरनेट से भी पढ़ने को आसानी से मिलता है तो भारत का भविष्य क्या होगा क्यूंकि उन आयतो का प्रभाव वहां पर ही क्रियान्वित होगा जहाँ गैर इस्लामिक समाज है।