ग्रेटर नोएडा

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में “स्पेशियल माइंड्स, स्मार्ट सॉल्यूशन्स” हैकाथॉन: वनाग्नि जागरूकता और स्मार्ट समाधान की ओर युवा कदम

ग्रेटर नोएडा:फॉरेस्टसैट और गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग द्वारा सेंट्रल कंप्यूटर सेंटर में संयुक्त रूप से हैकाथॉन “स्पेशियल माइंड्स, स्मार्ट सॉल्यूशन्स” का आयोजन 29 नवंबर 2025 को किया गया। इस हैकाथॉन का उद्देश्य छात्रों में नवाचार, कोडिंग और तकनीक-आधारित समस्या समाधान को बढ़ावा देना था, ताकि वे पर्यावरण और वन संबंधी चुनौतियों, विशेष रूप से वनाग्नि, के लिए स्मार्ट समाधान विकसित कर सकें। कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं में वनाग्नि के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सैटेलाइट डेटा एवं एआई के उपयोग से मेगाफायर की रोकथाम के लिए नवोन्मेषी उपाय खोजने पर जोर दिया गया।

इस प्रतियोगिता में कुल 62 प्रतिभागियों ने 20 टीमों के रूप में भाग लिया, जो दो श्रेणियों—स्नातक और स्नातकोत्तर में विभाजित थीं। समापन समारोह में माननीय कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह, श्री अजय गोयल (सीईओ, फारेस्ट एस ए टी ), श्री संजय कुंडू (आईपीएस, सेवानिवृत्त; पूर्व डीजीपी, हिमाचल प्रदेश), श्री व्लादिस्लाव (अध्यक्ष, स्पेक फाइनेंस), श्री करण दिनेश सिंह रावत (चीफ लीगल ऑफिसर, स्पेक फाइनेंस ), प्रो. सी.के. सिंह (डीन), डॉ. भास्वती बनर्जी (विभागाध्यक्ष, पर्यावरण विज्ञान) सहित फॉरेस्टसैट की आयोजन टीम, विश्वविद्यालय के फैकल्टी सदस्य एवं छात्र उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान प्रो. सी.के. सिंह ने स्वागत भाषण देते हुए विश्वविद्यालय में जी आई एस शिक्षा को सुदृढ़ करने की पहल, विशेषकर आगामी मास्टर प्रोग्राम इन जियो-इंफॉर्मेटिक्स और ड्रोन टेक्नोलॉजी के उत्कृष्टता केंद्र तथा प्रस्तावित रोबोटिक्स और एआई केंद्र की योजनाओं पर प्रकाश डाला। श्री अजय गोयल ने वन निगरानी में जियोस्पैशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते महत्व पर बल देते हुए कहा कि भारतीय छात्र अपनी क्षमताओं में यूरोपीय समकक्षों के बराबर या बेहतर हैं, तथा उन्हें विभिन्न पारिस्थितिक तंत्रों के डिजिटल ट्विन्स विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

श्री संजय कुंडू ने हैकाथॉन जैसे आयोजनों को छात्रों में समस्या-समाधान क्षमता और नवाचारी सोच विकसित करने में अत्यंत उपयोगी बताया। माननीय कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय तकनीकी पहलों के अनुभव साझा करते हुए अनुसंधान के नए क्षेत्रों—जैसे मानव स्वास्थ्य पर विकिरण तनाव के उपग्रह-आधारित अध्ययन और माइक्रोग्रेविटी के शारीरिक प्रभाव—की ओर छात्रों का ध्यान आकृष्ट किया। श्री व्लादिस्लाव ने ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड के संतुलन को मानव जीवन और वन स्वास्थ्य के लिए मूलभूत बताते हुए छात्रों को भविष्य की नई संभावनाओं की कल्पना करने के लिए प्रेरित किया।

हैकाथॉन के अंत में दोनों श्रेणियों के विजेताओं की घोषणा की गई। पीजी श्रेणी में प्रथम पुरस्कार टीम अर्थ (₹25,000), द्वितीय पुरस्कार टीम टेरा टाइटंस (₹15,000) तथा तृतीय पुरस्कार टीम नार्थ (₹10,000) को मिला। यूजी श्रेणी में टीम कैनोपी (₹15,000), टीम लोन वुल्फ (₹10,000) और टीम जी आई एस आर ओ (₹5,000) विजेता रहीं। कार्यक्रम का सफल समापन डॉ. भास्वती बनर्जी द्वारा औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

इस हैकाथॉन ने पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान में स्थानिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग में युवा नवप्रवर्तकों की क्षमता को उजागर किया और इस क्षेत्र में शैक्षणिक–उद्योग सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में अपनी पहचान दर्ज कराई।

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