भदरी परिवार के समर्पण को विस्मृत करना असम्भव – दिव्य अग्रवाल (विचारक व लेखक)

विचार:हिंदुत्व की प्रखर आवाज प्रवीण भाई तोगड़िया जी जब भदरी नरेश, महाराज उदय प्रताप सिंह जी से भेंट करते हैं तो पुराने दिनों को स्मरण करते हुए अपने मनोभाव की बात कहते हैं की भदरी वह स्थान है जहां से सनातन धर्म प्रहरियों को निरंतर शक्ति प्राप्त होती रही है यह वह स्थान है जहां से हिंदुत्व की लड़ाई लड़ने के लिए सदैव बल मिला। निसंदेह जब हिंदुत्व की लड़ाई लड़ना अपने आप में एक विकट युद्ध हुआ करता था उस समय भदरी से अनेक हिंदूवादीयो और हिंदूवादी संगठनों को हर सम्भव सहायता भदरी से प्राप्त होती थी । इतने वयोवृद्ध होने के पश्चात भी महाराज जी अपनी चिंता व्यक्त करते हुए प्रवीण भाई से कहते हैं की हनुमान चालीसा का सामूहिक और संगठित पाठ सभी हिन्दुओ को करना चाहिए विडंबना है की हिन्दू इस हेतु एकत्र ही नहीं होते।
कल्पना कीजिए की महाराज जी इस अवस्था में भी चिंतित है और सनातनी युवा सिर्फ रील बनाने और अपने नाम को वायरल होने तक को धर्म युद्ध समझता है जबकि वास्तविकता है की जिस प्रकार जुमे की नमाज में इस्लामिक समाज संगठित होता है यदि उसी प्रकार हनुमान चालीसा में हिन्दुओ का संगठनात्मक समर्पण हो तो सनातन समाज की एकता को बल मिलेगा ।
भदरी नरेश शास्त्र और शस्त्र शक्ति के संगम का प्रत्यक्ष प्रमाण है जिसका अनुसरण सभी हिन्दुओ को करना चाहिए , राजा भैया भी अनेको मंच से इस बात को कहते हैं की शस्त्र शक्ति के बिना शास्त्र और संस्कृति सुरक्षित नहीं रह सकती यह महाराज उदय प्रताप सिंह जी के ही संस्कार हैं जिसको उनके पुत्र कुंडा विधायक राजा भैया प्रसारित कर रहे हैं । प्रवीण भाई का सम्मान भी अतुलनीय है जब भदरी नरेश ने प्रवीण भाई और उनके सभी साथियों को प्रसाद वितरण करवाया और कहा की राजा भैया ने भिजवाया है तो प्रवीण भाई ने राजा भैया को नमन करते हुए प्रसादी ग्रहण किया ।
अंततः भदरी परिवार का सनातन धर्म और सनातन समाज के प्रति समर्पण अभिनन्दनीय है , स्मरणीय है , वंदनीय है ।







