गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में अनुभवात्मक एवं समग्र शिक्षा पर साप्ताहिक फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का शुभारंभ

ग्रेटर नोएडा:गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा में विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद एवं आई.यू.सी.टी.ई., वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में साप्ताहिक अनुभवात्मक फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का शुभारंभ एक दिवसीय कार्यशाला के साथ किया गया। यह एफडीपी 6 से 10 सितंबर, 2026 तक आयोजित किया जा रही है, जिसमें देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से आए शिक्षाविदों, शिक्षा विशेषज्ञों एवं शिक्षकों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में श्री रविन्द्र कान्हेरे, राष्ट्रीय अध्यक्ष, विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान; पद्मश्री प्रो. जे. एस. राजपूत, अध्यक्ष, शासी मंडल, आई.यू.सी.टी.ई., वाराणसी; प्रो. कैलाश चंद्र शर्मा, राष्ट्रीय अध्यक्ष, विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान; प्रो. पंकज अरोड़ा, अध्यक्ष, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद तथा प्रो. राणा प्रताप सिंह, कुलपति, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय सहित अनेक शिक्षा विशेषज्ञों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने स्वागत उद्बोधन में सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने शिक्षा में अनुभवात्मकता, समग्रता तथा विद्यार्थी-केंद्रित दृष्टिकोण के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में शिक्षण को केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित न रखकर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास से जोड़ना आवश्यक है। साथ ही उन्होंने शिक्षण को अधिक प्रभावी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने पर जोर दिया |
कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों ने अनुभवात्मक एवं समग्र शिक्षा के माध्यम से शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, व्यावहारिक एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाने पर विस्तार से चर्चा की।
इस अवसर पर विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान से उपस्थित श्री गोविंद महंत ने पंचकोश आधारित समग्र विकास की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका उद्देश्य केवल शारीरिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक, बौद्धिक एवं आत्मिक विकास को भी शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाना है। यह दृष्टिकोण संतुलित एवं पूर्ण व्यक्तित्व के निर्माण की दिशा प्रदान करता है।
वहीं श्री अवनीश भटनागर ने पंचपदी शिक्षण-पद्धति पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि यह पद्धति सीखने की प्रक्रिया को क्रमबद्ध एवं प्रभावी बनाने पर बल देती है। इसके विभिन्न चरणों के माध्यम से विद्यार्थी को विषय से परिचित कराया जाता है, उसके अनुभव एवं समझ का विकास किया जाता है तथा अर्जित ज्ञान को व्यवहार में लागू करने का अवसर प्रदान किया जाता है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल जानकारी प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें सक्रिय रूप से सीखने के लिए प्रेरित करना है, जिससे शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया अधिक अनुभवात्मक एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनती है।
कार्यक्रम के समापन सत्र में प्रो. नरेन्द्र कुमार तनेजा, राष्ट्रीय महामंत्री, विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान सहित अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रही। इस अवसर पर डॉ. डी. के. चतुर्वेदी, एकेडमिक कंसल्टेंट, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद द्वारा आईटीईपी , पुष्टि (एनपीएसटी) एवं मित्र (एनएमएम ) से संबंधित अभिविन्यास सत्र का संचालन किया गया। उन्होंने डिजिटल पोर्टल पर मेंटर्स (मार्गदर्शकों) के पंजीकरण, विद्यालय-दर्शन कार्यक्रम, समूह चर्चा तथा आगामी गतिविधियों के संबंध में प्रतिभागियों को जानकारी प्रदान की।
प्रो. सुभाष मिश्र, बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ एवं संयोजक, उत्तर क्षेत्र (गाजियाबाद केंद्र) ने चार दिवसीय विद्यालय-दर्शन कार्यक्रम की संरचना, यात्रा व्यवस्था एवं कार्यक्रम योजना के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।
संपूर्ण एकदिवसीय कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों के सफल आयोजन में प्रो. शिवराज सिंह, क्षेत्र संयोजक, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के कुशल मार्गदर्शन का विशेष योगदान रहा। साथ ही, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के गणित विभाग के आचार्य प्रो. सुशील कुमार एवं शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. श्रुति कंवर के प्रभावी समन्वय ने कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम से संबंधित अन्य आवश्यक निर्देशों एवं समूह बैठक का संयोजन प्रो. मधुसूदन जे. वी., हैदराबाद विश्वविद्यालय एवं प्रो. विमल किशोर, झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में प्रो. सुशील कुमार, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।






