द्रोण मेले में उमड़े स्कूली बच्चे, गुरु-शिष्य परंपरा से हुए रूबरू
स्थानीय अवकाश के चलते विभिन्न स्कूल-कॉलेजों के छात्र-छात्राओं ने शिक्षकों संग किया मेला परिसर का भ्रमण

दनकौर :दनकौर स्थित ऐतिहासिक श्री द्रोणाचार्य मंदिर परिसर में चल रहे 103वें श्रीकृष्ण जन्मोत्सव द्रोण मेले में बुधवार को स्थानीय अवकाश होने के कारण क्षेत्र के विभिन्न स्कूल-कॉलेजों के छात्र-छात्राओं की भारी भीड़ उमड़ी। जिला प्रशासन द्वारा प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी बुधवार को स्थानीय अवकाश घोषित किया गया था। अवकाश के चलते सरकारी, अर्धसरकारी एवं निजी शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थी अपने शिक्षकों के साथ मेला देखने पहुंचे। इस दौरान विद्यार्थियों ने मेले का आनंद लेने के साथ-साथ ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों के बारे में भी जानकारी प्राप्त की।
स्कूल-कॉलेजों से पहुंचे छात्र-छात्राओं ने श्री द्रोणाचार्य मंदिर परिसर, गुरु शिष्य एकलव्य उद्यान, श्री द्रोण स्टेडियम सहित मेला परिसर के विभिन्न स्थलों का भ्रमण किया। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को द्रोणाचार्य एवं एकलव्य के संबंध में जानकारी देते हुए गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व से अवगत कराया।
गुरु शिष्य एकलव्य उद्यान परिसर में स्थापित गुरु द्रोणाचार्य एवं एकलव्य की प्रतिमाओं को देखकर विद्यार्थियों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। शिक्षकों ने बताया कि महाभारत काल में गुरु द्रोणाचार्य और उनके शिष्य एकलव्य की कथा गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और अनुशासन का महत्वपूर्ण उदाहरण है। एक ही स्थान पर गुरु द्रोणाचार्य और एकलव्य की प्रतिमाओं को देखकर विद्यार्थियों को प्राचीन गुरु-शिष्य परंपरा की याद ताजा हो गई।
बताया जाता है कि गुरु द्रोणाचार्य की प्रतिमा एकलव्य द्वारा अपने हाथों से स्थापित की गई थी। विद्यार्थियों और शिक्षकों ने प्रतिमाओं के समीप पहुंचकर उनके इतिहास एवं महत्व के बारे में जानकारी ली। इस दौरान शिक्षकों ने बच्चों को बताया कि दनकौर का श्री द्रोणाचार्य मंदिर क्षेत्र की ऐतिहासिक एवं धार्मिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है।

श्रीकृष्ण छठी पूजन में शामिल हुए विद्यार्थी
मेला परिसर में श्री द्रोणाचार्य मंदिर के पुजारी पंडित पंकज पांडेय द्वारा श्रीकृष्ण छठी पूजन कार्यक्रम भी कराया गया। इसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। पंडित पंकज पांडेय ने विद्यार्थियों को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव एवं छठी पूजन की धार्मिक मान्यताओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म एवं बाल लीलाओं का उल्लेख करते हुए पर्व के धार्मिक महत्व से विद्यार्थियों को परिचित कराया।
पूजन के दौरान छात्र-छात्राओं के तिलक लगाया गया और उन्हें प्रसाद वितरित किया गया। प्रसाद पाकर बच्चों में खासा उत्साह दिखाई दिया। विद्यार्थियों ने मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना कर भगवान श्री द्रोणाचार्य एवं श्रीकृष्ण के दर्शन किए।
कई स्कूल-कॉलेजों के विद्यार्थी पहुंचे
स्थानीय अवकाश के चलते क्षेत्र के नेहा पब्लिक स्कूल, बाल विकास शिक्षा संस्थान, शारदा बाल विद्या मंदिर, सरस्वती विद्यालय, शिवराज शर्मा इंटर कॉलेज, राजेंद्र प्रसाद इंटर कॉलेज, एसडी कन्या इंटर कॉलेज समेत कई शिक्षण संस्थानों के छात्र-छात्राएं एवं शिक्षक मेला परिसर पहुंचे।
स्कूलों से आए विद्यार्थियों ने मेले में लगी विभिन्न दुकानों, झूलों एवं अन्य आकर्षणों का आनंद लिया। इसके साथ ही शिक्षकों ने उन्हें श्री द्रोणाचार्य मंदिर, एकलव्य उद्यान और श्रीद्रोण स्टेडियम सहित ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण स्थानों की जानकारी दी। बच्चों ने भी शिक्षकों से विभिन्न स्थानों और उनके इतिहास से संबंधित सवाल पूछकर अपनी जिज्ञासा शांत की।
शिक्षकों का कहना था कि इस प्रकार के आयोजनों से विद्यार्थियों को मनोरंजन के साथ-साथ क्षेत्र के इतिहास, धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने का अवसर मिलता है। विद्यार्थियों ने भी द्रोण मेले को यादगार बताते हुए कहा कि यहां उन्हें धार्मिक एवं ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त करने के साथ मेले का आनंद लेने का अवसर मिला।
इस दौरान मेला परिसर में बच्चों और शिक्षकों की मौजूदगी से पूरे क्षेत्र में रौनक बनी रही। स्थानीय लोगों का कहना था कि गुरु द्रोणाचार्य और एकलव्य की प्रतिमाओं को एक साथ देखकर गुरु-शिष्य परंपरा की याद ताजा हो जाती है और नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से जुड़ने का अवसर मिलता है।
रिपोर्टर घनश्याम पाल






