19 वर्षीय छात्रा ने संदिग्ध परिस्थिति में फांसी लगाकर की आत्महत्या
खौफ: पीजी में रह रहे छात्र-छात्राओं द्वारा की जा रहीं आत्महत्याओं से क्षेत्र में बना भय का माहौल

जनता क्या कहती है: स्थानीय लोगों का आरोप है कि दनकौर कस्बा व क्षेत्र में लगभग पीजी की बाढ़ सी आई हुई है कुकुरमुत्ता की तरह मोहल्लों में रोज नए नए पीजी खुल रहे हैं, जिनके कोई मानक नहीं है पीजी में रह रहे छात्र-छात्राओं का भी कोई पूर्ण सत्यापन नहीं होता है जिस कारण कभी भी कोई बड़ी घटना कस्बे के अंदर घट सकती है, लोगों का आरोप है कि छात्र-छात्राओं को देर रात तक सड़कों पर आपत्तिजनक स्थिति में घूमते हुए देखा जा सकता है यदि समय रहते पुलिस प्रशासन जागरूक नहीं हुआ तो वह समय दूर नहीं जब ये पीजी नासूर बन जाएंगे
दनकौर: थाना क्षेत्र में पीजी में रहकर नर्सिंग की पढ़ाई करने वाली बिहार की एक 19 वर्षीय छात्रा ने मंगलवार देर रात संदिग्ध परिस्थिति में फांसी लगा ली। छात्रा के आत्महत्या की जानकारी मिलने पर दनकौर पुलिस मौके पर पहुंची।
कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था, जिसके बाद दरवाजा तोड़कर शव को बाहर निकाला गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और परिजनों को सूचना दी।
बिहार के दरभंगा जिला निवासी साक्षी गलगोटियाज यूनिवर्सिटी से बीएससी की छात्रा थी और थर्ड ईयर में पढ़ाई कर रही थी। वह कस्बे में एक निजी पीजी में रहती थी। मंगलवार देर रात वह अपने कमरे में अकेली थी। जब उसकी साथी छात्राएं कमरे पर पहुंची तो दरवाजा अंदर से बंद था। काफी आवाज देने पर भी जब दरवाजा नहीं खुला तो छात्राओं ने खिड़की से झांककर देखा, जिसके बाद उनकी चीख निकल गई। छात्रा का शव कमरे में पंखे से लटका हुआ था जिसकी सूचना छात्राओं ने तुरंत पीजी संचालक और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने दरवाजा तोड़कर छात्रा के शव को उतारा और मोर्चरी में रखवाया। वहीं बुधवार को छात्रा के परिजन भी बिहार से दनकौर पहुंच गए।
पुलिस को छात्रा के कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। पुलिस अब उसकी कॉल डिटेल खंगाल रही है. जिससे उन्हें जांच के लिए सुराग मिल सकें। छात्रा के साथ रहने वाली छात्राओं से भी पुलिस पूछताछ कर रही है। कोतवाली प्रभारी मनोज कुमार ने बताया कि घटना स्थल से किसी तरह का सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। मामले की जांच की जा रही है। परिजनों ने अभी तक लिखित शिकायत नहीं दी है।






