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व्यावसायिक विवादों के समाधान में ‘मिडिएशन’ (मध्यस्थता) अनिवार्य और एक प्रभावी विज्ञान- जस्टिस जे.के. माहेश्वरी

नई दिल्ली:उच्चतम न्यायालय के माननीय न्यायाधीश जस्टिस जे.के. माहेश्वरी ने आज कमर्शियल विवादों के निपटारे में मध्यस्थता (Mediation) की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। जस्टिस महेश्वरी महेश्वरी दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में ग्लोबल मेडिएशन कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे. कॉन्फ्रेंस का आयोजन इंग्लैंड की रिजॉल्वीफाई फर्म ने किया था. सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए उन्होंने कहा कि मिडिएशन केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक विज्ञान है. जिसे अब व्यावसायिक मामलों में भी अनिवार्य (Mandatory) कर दिया गया है।

पौराणिक उदाहरणों से समझाया महत्व…. 

जस्टिस माहेश्वरी ने मध्यस्थता की जड़ों को भारतीय संस्कृति और इतिहास से जोड़ते हुए त्रेता युग का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि जामवंत पहले व्यक्ति थे जिन्होंने भगवान रामचंद्र को शांति के लिए मिडिएशन का सुझाव दिया था, जिसके बाद अंगद को रावण के दरबार में दूत बनाकर भेजा गया। इसी प्रकार, द्वापर युग में श्री कृष्ण ने कौरवों और पांडवों के बीच युद्ध टालने के लिए एक कुशल ‘मिडिएटर’ की भूमिका निभाई थी। लेकिन दोनों मामलों में मेडिएटर का संबंध दूसरे पक्ष के साथ होने के कारण विश्वसनीयता की कमी दिखाई दी और मध्यस्थता सिरे नहीं चढ़ पाई.

इस ग्लोबल कॉन्फ्रेंस में कानूनी और सामाजिक क्षेत्र की कई दिग्गज हस्तियों ने शिरकत की. जिनमें स्टुअर्ट हैनसन, प्रदीप राय, तरुण राणा, मनीष गुप्ता,अतुल सिंघल इत्यादि शामिल रहे.

जस्टिस (रिटायर्ड) विनीत शरण: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश ने आधुनिक कानूनी ढांचे में मध्यस्थता की बढ़ती प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

जबकि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष आदिश अग्रवाल ने कानूनी पेशेवरों के बीच मिडिएशन के कौशल को विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

सम्मेलन के आयोजक और इंग्लैंड मे पेशेवर मध्यस्थ के रूप मे कार्यरत चिराग मित्तल ने बताया कि उनकी संस्था risolvify का मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर विवादों के त्वरित और सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए एक मंच प्रदान करना है। वक्ताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि कोर्ट के बाहर विवादों को सुलझाने से न केवल न्यायपालिका का बोझ कम होगा, बल्कि व्यापारिक संबंधों में भी कड़वाहट कम होगी।

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