सुंदरकांड का पाठ और पुरुषार्थ की तैयारी आवश्यक – दिव्य अग्रवाल (लेखक व विचारक)

विचार:इस्लामिक समाज से आने वाले सांसद बर्क जैसे लोग अभी भी बाबर की मानसिकता से ग्रसित हैं एक तरफ भारत की आत्मा, सनातन का गौरव जो पुरे विश्व में मानवता का संदेश देता है ऐसा पराक्रमी सनातनी ध्वज जिसमें इश्वाकु वंश रघुकुल का ध्वज चिन्ह कोविदार अंकित हो, श्री अयोध्यापुरी के रामलला सरकार के मंदिर के शिखर पर लहरा रहा है । तो इस्लामिक समाज से संबंध रखने वाले सांसद महोदय, बंगाल में न सिर्फ बाबरी मस्जिद बनाने की इच्छा प्रकट कर रहे हैं बल्कि प्रधानमंत्री द्वारा ध्वजारोहण के कार्यक्रम से परेशान भी हैं। सत्य कहें तो सैकड़ो वर्षो से जिन हुतात्माओं ने अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया की श्री राम का मंदिर एक न एक दिन अयोध्या में पुन् अपनी भव्यता और दिव्यता को प्राप्त करेगा आज उन्ही का विश्वास सार्थक हुआ है । जिस प्रकार विधर्मी भारत में राम लला सरकार के मंदिर के विरुद्ध बयानबाजी कर रहे हैं तो यह भी स्पष्ट है की मजहबी कटटरवाद बाबर की मानसिकता को पुनः क्रियान्वित करने हेतु प्रयासरत है । इसलिए आवश्यक है की धर्म रक्षा और मंदिर की शक्ति में वृद्धि हेतु हिन्दुओ के घर घर में सुन्दर काण्ड का पाठ हो और सनातनी समाज अपनी प्रतिकार वाली क्षमता में वृद्धि कर पुरुषार्थ करने हेतु तत्पर हो क्यूंकि मजहबी समाज किसी राजनेता के नहीं बल्कि अपनी भीड़तंत्र के भरोसे हैं । जबकि सनातनी समाज अपनी शक्ति को भूलकर सिर्फ देश के प्रधानमंत्री मोदी जी और सूबे के मुख्या पूज्य नाथ योगी जी महाराज पर पूर्णतः निर्भर हैं । कुछ दायित्व सनातनी समाज का भी है यदि सनातनी समाज ने अपनी वंश और शास्त्र द्वारा वर्णित शस्त्र शक्ति में वृद्धि नहीं की तो उन दानवो पर विजय प्राप्त करना मुश्किल होगा जो बाबर की अमानवीय सोच की पुर्नावृति करना चाहते हैं।







