राजनीति

आराधना मिश्रा क्या राजा भैया की पार्टी को साधने का प्रयास करेंगी – दिव्य अग्रवाल ( लेखक व विचारक)

विशेष :जनसत्ता दल लोकतान्त्रिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ राजा भैया की पार्टी से दो सदस्य उत्तर प्रदेश की विधानसभा और एक सदस्य विधान परिषद् में हैं परन्तु इसके अतिरिक्त अनेक सदस्य ऐसे भी हैं जो अन्य राजनीति संगठनों में होते भी पूर्वांचल की राजनीति साझा रूप से एक समूह के रूप में रणनीति बनाकर करते हैं। उस समूह में राजा भैया भी एक महत्वपूर्ण रणनीतिकार हैं लेकिन अब लगता है कांग्रेस ने प्रतापगढ़ की राजनीति में सक्रीय भूमिका निभाने वाली आराधना मिश्रा उर्फ़ मोना जी को उत्तर प्रदेश की राजनीतिक रणनीति में सेंध लगाने का कार्य उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाकर करने का प्रयास किया है।

जिन राजनीतिक रणनीतिकारों या प्रभुत्वशाली लोगो की विचारधारा कांग्रेस से कभी मेल नहीं खायी, आराधना मिश्रा अपने व्यक्तिगत और पारिवारिक संबंधों के आधार पर उनको साधने का प्रयास कर सकती हैं। अब यदि राजा भैया की पार्टी की बात की जाए तो अभी हाल ही हुए लोकसभा चुनाव में राजा भैया और उनकी पार्टी के समर्थक भाजपा के एक प्रत्याशी से लम्बे समय से नाराज थे जिसके चलते गृह मंत्री अमित शाह जी ने भी राजा भैया से चर्चा की और राजा भैया ने अपनी पार्टी का प्रत्याशी तक नहीं उतारा था लेकिन उस प्रत्याशी से नाराजगी के चलते समर्थको द्वारा इस प्रकार मतदान किया गया जिससे लगभग 10 से ज्यादा सीटों पर भाजपा को नुकसान हुआ। अब इस प्रकरण से ही कल्पना की जा सकती है की जनसत्ता दल लोकतांत्रिक का वोट बैंक वहां की राजनीतिक स्थिति पर कितना प्रभाव डाल सकता है अब यदि आराधना मिश्रा जी किसी प्रकार जनसत्ता दल लोकतांत्रिक को अपने साथ मिलाने या INDI गठबंधन में शामिल करने की योजना प्रस्तावित कर दें तो स्थिति क्या होगी ।

हमने देखा है पिछले कई दशकों में राजा भैया की रणनीति से उत्तर प्रदेश में कईं सरकार बनी और बिगड़ी हैं राज्य सभा के चुनावों में भी जनसत्ता दल लो. निशर्त भाजपा का समर्थन करती आ रही है पर कांग्रेस द्वारा आराधना मिश्रा पर खेला गया दांव कहीं जनसत्ता दल लो. के राजनीतिक निर्णयों को परिवर्तित न कर दे इस पर राजा भैया से निशर्त रूप से समर्थन पाने वाली भाजपा सरकार को भी मंथन करना चाहिए ।

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