ग्रेटर नोएडा

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में ‘बौद्ध धर्म और समकालीन विश्व में वैज्ञानिक दृष्टिकोण’ विषयक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ

ग्रेटर नोएडा:गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा में मंगलवार को “बौद्ध धर्म और समकालीन विश्व में वैज्ञानिक दृष्टिकोण: प्रासंगिकता, नैतिकता एवं मानव कल्याण” विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। सम्मेलन का आयोजन गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज एंड सिविलाइजेशन द्वारा भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद (ICPR), भारत सरकार, नई दिल्ली के सहयोग से किया जा रहा है। यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 29 सितंबर से 1 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है।

सम्मेलन में भारत एवं विदेशों से लगभग 50 विद्वान एवं शोधकर्ता भाग ले रहे हैं। तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान बौद्ध दर्शन की समकालीन प्रासंगिकता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तर्कशीलता, नैतिकता, चेतना, कारण-कार्य संबंध तथा मानव कल्याण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विभिन्न शैक्षणिक सत्रों में विचार-विमर्श किया जा रहा है। सम्मेलन विभिन्न विषयों के विद्वानों को एक साझा मंच प्रदान कर रहा है, जहां बौद्ध चिंतन और समकालीन वैज्ञानिक एवं दार्शनिक विमर्श के बीच संबंधों पर चर्चा की जा रही है।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तर्कशील चिंतन को विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण ने बौद्ध चिंतन के भीतर भी महत्वपूर्ण दार्शनिक प्रश्नों को जन्म दिया है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तेजी से बढ़ते प्रभाव और उससे उत्पन्न चुनौतियों का उल्लेख करते हुए इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए उचित नियामक व्यवस्था, सुरक्षा उपायों और नैतिक दिशानिर्देशों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति का उद्देश्य अंततः मानव कल्याण की दिशा में होना चाहिए।

कार्यक्रम में भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद , भारत सरकार के सदस्य सचिव प्रो. सच्चिदानंद मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने बौद्ध दर्शन में तर्कशीलता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर विचार व्यक्त करते हुए कर्म सिद्धांत तथा बौद्ध दर्शन में वर्णित प्रतीत्यसमुत्पाद की चर्चा की। उन्होंने इन अवधारणाओं को कारण-कार्य संबंध, तार्किक चिंतन और नैतिक आचरण से जोड़ते हुए इनके दार्शनिक महत्व पर प्रकाश डाला।

जर्मनी के हीडलबर्ग विश्वविद्यालय से जुड़े डॉ. रॉल्फ ने विशेष अतिथि के रूप में तिब्बती चिकित्सा और उसकी समकालीन प्रासंगिकता पर व्याख्यान दिया। उन्होंने पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के महत्व तथा स्वास्थ्य और मानव कल्याण से जुड़े समकालीन विमर्श में उनकी संभावित प्रासंगिकता पर चर्चा की।

सम्मेलन में प्रो. आर. सी. प्रधान ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण के भारतीय चिंतन में आयाम विषय पर मुख्य व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि समकालीन समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए आधुनिक विद्वानों को बहुविषयक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपराओं को वर्तमान सामाजिक एवं बौद्धिक चुनौतियों के संदर्भ में देखने और उनके समकालीन महत्व को सामने लाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विभिन्न विषयों के बीच अकादमिक संवाद पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर प्रदान कर सकता है।

सम्मेलन के अवसर पर तीन महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। इनमें:

“बुद्धिस्ट नॉलेज सिस्टम एंड आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस : एथिक्स , कॉन्ससियसनेस्स एंड फ्यूचर टेक्नोलॉजीज

“सम फेसेट्स ऑफ़ भुद्धिज्म इन थे मॉर्डन वर्ल्स”

“बौद्धधर्म : ए प्रैक्टिकल साइकोलॉजी “

शामिल हैं। इन पुस्तकों में बौद्ध दर्शन, ज्ञान प्रणालियों, मनोविज्ञान, नैतिकता, चेतना तथा उभरती प्रौद्योगिकियों से संबंधित समकालीन अकादमिक विमर्श को प्रस्तुत किया गया है।

सम्मेलन का केंद्रीय उद्देश्य समकालीन विश्व में बौद्ध चिंतन और वैज्ञानिक अनुसंधान के अंतर्संबंध का अध्ययन करना है। सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में करुणा, माइंडफुलनेस, नैतिकता, चेतना, कारण-कार्य संबंध, मानवीय आचरण और परस्पर निर्भरता जैसे बौद्ध अवधारणाओं की समकालीन प्रासंगिकता पर चर्चा की जा रही है। इन अवधारणाओं के माध्यम से नैतिक जीवन, सामाजिक समरसता और मानव कल्याण से जुड़े वर्तमान विमर्श को समझने का प्रयास किया जा रहा है।

तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बौद्ध अध्ययन, दर्शन, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और अन्य संबंधित विषयों के विद्वानों द्वारा शोध-पत्र प्रस्तुत किए जा रहे हैं। भारत एवं विदेशों से आए विद्वानों की सहभागिता से बौद्ध दर्शन और उसके समकालीन बौद्धिक एवं सामाजिक सरोकारों पर व्यापक अकादमिक संवाद का अवसर मिल रहा है।

सम्मेलन के विमर्श में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नैतिक जिम्मेदारी और मानव कल्याण के संबंध को भी प्रमुखता दी जा रही है। इसके माध्यम से तर्कशीलता, चेतना, नैतिकता और मानव कल्याण के संदर्भ में बौद्ध दृष्टिकोण पर आगे शोध को प्रोत्साहित करने तथा समकालीन तकनीकी एवं सामाजिक परिवर्तनों के संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता पर विचार किया जा रहा है।

कार्यक्रम के अंत में सम्मेलन के निदेशक डॉ. चिंतला वेंकट सिवासाई ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने मुख्य अतिथि, विशेष अतिथि, विशिष्ट वक्ताओं, देश-विदेश से आए विद्वानों, सहभागी संस्थानों तथा सम्मेलन के आयोजन से जुड़े सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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