दिल्ली एनसीआर

चौथा दिन :क्रेताओं ने मेले की अद्भुत विविधता और आपूर्तिकर्ताओं के साथ बने स्थायी संबंधों की सराहना की, बताया – एक अद्भुत अनुभव

भारत के एफटीए मोमेंट - वैल्यू चेन, मार्केट एक्सेस और सोर्सिंग फैसलों के लिए नए गेटवे और एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन - हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स के लिए फाइनेंशियल और मार्केट-सपोर्ट सेमिनार में पार्टिसिपेंट्स शामिल

दिल्ली/एनसीआर :13 से 17 अक्टूबर 2026 तक ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित हो रहे आईएचजीएफ दिल्ली मेला–ऑटम 2026 के 62वें संस्करण में लंबे समय से जुड़े स्थायी और परंपरागत प्रतिभागी के साथ ही पहली बार आने वाले व्यापारिक आगंतुकों की भारी संख्या देखी जा रही है। इस मेले में समृद्ध कारीगरी की परंपरा और प्रचुर कच्चे माल पर आधारित उत्पाद प्रस्तुत किए जा रहे हैं जो भारत की विविध भौगोलिक और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं। आयोजन हॉलों में 3,000 से अधिक प्रदर्शक, 900 स्थायी शोरूम, थीम-आधारित प्रस्तुतियाँ, लाइव प्रदर्शन तथा अनेक सहायक कार्यक्रम इसे एक व्यापक मेले का स्वरूप दे रहे हैं।

मेले में प्रदर्शित उत्पादों के प्रति खरीदारों के रुझान देखते हुए, हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) के अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने कहा, “व्यापारिक गतिविधियों के चार दिन बाद, मेला ऐसे समय पर पहुँचा है जहाँ प्रदर्शकों और खरीदारों के बीच बहुत बड़ी संख्या में संवाद हुआ और मेले में प्रदर्शित अधिकांश श्रेणियों के प्रति खरीदारों की मजबूत रुचि देखी गई। होम, गिफ्टिंग, लाइफस्टाइल, फैशन, फर्निशिंग, फर्नीचर और इंटीरियर्स वर्ग में काफी रुचि देखी गयी। फर्नीचर सेक्टर में ऐसे उत्पादों पर ज़ोर दिया जा रहा है जो उपलब्ध स्पेस के हिसाब से हों और आराम, उपयोगिता और आधुनिक आकर्षण प्रदान करते हों

इस सीज़न में डिज़ाइन रुझानों में ऐसे सौंदर्यबोध पर अधिक ध्यान दिया गया जो अर्थपूर्ण हो जिसमें सस्टेनेबिलिटी को कारीगरी के साथ, महसूस किए जा सकने वाली बनावट को प्रभावशाली प्रिंट्स के साथ, तथा पारंपरिक सामग्री की कहानियों को आधुनिक डिज़ाइन संवेदनशीलता के साथ जोड़ा गया। स्टेटमेंट पीस के तौर पर आधुनिक जीवनशैली के अनुरूप संग्रहों पर क्रेताओं का ज्यादा ध्यान देखा गया, जबकि विभिन्न श्रेणियों और कीमतों में गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला ने अलग अलग तरह की सोर्सिंग जरूरतों और बजट वाले खरीदारों के लिए आईएचजीएफ दिल्ली मेले की अपील को रेखांकित किया।”

आज मेले में खरीदारों की भावना को समझाते हुए, ईपीसीएच के महानिदेशक की भूमिका में मुख्य संरक्षक और आईईएमएल के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार ने कहा, “उपभोक्ताओं की प्राथमिकताएँ अब ऐसे उत्पादों की ओर बढ़ रही हैं जो संतुलन, आराम और भावनात्मक स्वास्थ्य और सोच प्रदान करते हैं। प्राकृति आधारित सामग्री, महसूस की जा सकने वाली बनावट, असली कारीगरी और प्रकृति से प्रेरित डिज़ाइन—जिन क्षेत्रों में हमारे निर्माताओं ने अपनी विशेष पहचान बनाई है—अधिक महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। यह लंबे समय तक बने रहने वाले आकर्षण और पूरी जानकारी के साथ की जाने वाली क्रेता सोच के बदलाव दर्शाता है। होम डेकोर में हस्तनिर्मित वस्तुएँ, वॉल आर्ट, भित्ति चित्र और मूर्तिकला-आधारित सजावटी तत्व घर की जगहों को अधिक व्यक्तिगत, शांत और भावपूर्ण स्थानों में बदल रहे हैं। इस बार ध्यान ऐसे उत्पादों पर है जो केवल उपयोगिता से आगे बढ़कर रोजमर्रा के जीवन में गर्मजोशी, विशेष पहचान और प्रकृति तथा कारीगरी से गहरा जुड़ाव लाते हैं।”

ईपीसीएच के उपाध्यक्ष श्री सागर मेहता ने कहा, “आगंतुकों ने मेले में कई प्रदर्शकों द्वारा आयोजित लाइव क्राफ्ट प्रदर्शनों की सराहना की है, जिनसे उन्हें पारंपरिक तकनीकों और कारीगरों के कौशल को करीब से देखने का अवसर मिला। भाग ले रहे कारीगर भी अपने स्टॉल पर अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। कुछ आगंतुकों ने उत्साह से इन तकनीकों को आजमाया और उत्पाद बनाने की इस प्रक्रिया और सृजनात्मकता का अनुभव स्वयं किया।”

अमेरिका से आईं खरीदार डीन ऐशले यहाँ अमेरिकी बाजार के लिए भारतीय वस्त्र, हस्तनिर्मित उत्पाद और पारंपरिक कारीगरी देखने आईं हैं, साथ ही फर्नीचर और अन्य उत्पादों में भी रुचि रखती हैं। ऑस्ट्रेलिया से आए जेक व्हीलर ने इस आयोजन को एक बेहतरीन अनुभव बताया। वो फेस्टिवल उत्पादों में विशेषज्ञ हैं और पहली बार मेले में आए हैं। फ्रांस से आईं एमिली ने टेबलवेयर, फर्नीचर तथा लकड़ी और लोहे के उत्पाद देखे। उन्होंने उत्पादों की विस्तृत विविधता और नए आपूर्तिकर्ताओं से मिलने उन्हें जानने के अवसरों की सराहना की। जापान से आईं तोमोको इदा ने मेले के रचनात्मक और सुंदर कारीगरी वाले संग्रहों के प्रति उत्साह जताया। उन्हें होम डेकोर के लिए कपास, जूट और लिनेन जैसे प्राकृतिक रेशों से बने उत्पादों में विशेष रुचि है।

नीदरलैंड से आए अरेंड मोस्टर्ड, जो कुछ संस्करणों के बाद फिर से मेले में आए हैं, ने नए हॉल, विविध प्रदर्शकों और उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला की सराहना की। गार्डन उत्पादों में विशेषज्ञता रखने वाले अरेंड ने विभिन्न सामग्रियों से बने व्यावहारिक, अच्छी गुणवत्ता और बाजार में बिकने योग्य उत्पादों को देखा। वे चीन के मेलों में भी जाते हैं, लेकिन उनके अनुसार भारत की विशिष्ट सामग्री और कारीगरी—विशेष रूप से धातु कार्य की बराबरी करने वाले शिल्प को कहीं और खोजना बहुत मुश्किल है। उन्होंने यह भी बताया कि नीदरलैंड में ग्राहकों को भारतीय रग और वस्त्र बहुत पसंद हैं।

आईएचजीएफ दिल्ली मेला–ऑटम 2026 स्वागत कमेटी के अध्यक्ष श्री अवधेश अग्रवाल ने मेले के ज्ञान सत्रों के बारे में बताया, “आज ‘इंडियाज़ एफटीए मोमेंट’ विषय पर आयोजित सेमिनार में भारत के हस्तशिल्प निर्यातकों के लिए मूल्य श्रृंखलाओं के नए मार्ग, बाजार पहुँच और सोर्सिंग निर्णयों पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञ ने बताया कि भारत के मौजूदा और उभरते मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) से बाजार पहुँच, मूल्य श्रृंखला के एकीकरण तथा प्रतिस्पर्धी सोर्सिंग के नए अवसर कैसे बन सकते हैं। साथ ही, निर्यातकों को टैरिफ, मूल के नियम और बाजार चयन की रणनीतियों के बारे में मार्गदर्शन दिया गया।

‘एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन’ विषय पर आयोजित दूसरे सत्र में हस्तशिल्प निर्यातकों के लिए वित्तीय और बाजार-सहायता के अवसरों से अवगत कराया गया। इस सत्र ने निर्यातकों को एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के अंतर्गत उपलब्ध वित्तीय सहायता, बाजार विकास सहायता और निर्यात संवर्धन के अवसरों के बारे में जानकारी दी तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार के लिए इन लाभों का लाभ उठाने का मार्गदर्शन किया।”

हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद के कारीगर-केंद्रित दृष्टिकोण और क्षेत्र के समग्र विकास पर प्रकाश डालते हुए, ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक श्री राजेश रावत ने कहा, “ईपीसीएच कारीगर समुदाय का साथ देना जारी रखे हुए है और उन्हें प्रशिक्षित करने, कौशल विकास, उत्पाद इनोवेशन, बाजार के लिए तैयारी, मार्केटिंग तथा ऑर्डर पूरा करने की पूरी यात्रा में सहायता प्रदान कर रहा है। इन्हीं प्रयासों के तहत मेले के स्थल पर कारीगरों और बुनकरों के लिए एक विशेष मार्गदर्शन सत्र आयोजित किया गया, जिसका ध्यान उत्पाद विकास, ब्रांडिंग और विज़ुअल मर्चेंडाइज़िंग पर था, ताकि उत्पादों की अपील बढ़े और वे वैश्विक समेत हर बाजार के लिए बेहतर तरीके से तैयार रहें।”

ईपीसीएच देश से विश्व के विभिन्न गंतव्यों तक हस्तशिल्प के निर्यात को बढ़ावा देने और विदेश में भारत की छवि को उच्च गुणवत्ता वाले हस्तशिल्प के विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में प्रस्तुत करने के लिए एक नोडल संस्थान है। इस अवसर पर ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक श्री राजेश रावत ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान हस्तशिल्प का कुल निर्यात 33,168 करोड़ रुपये (3,754 मिलियन डॉलर) रहा।

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