नगर पंचायत में विकास कार्यों की खुली पोल, तीन दिन भी नहीं चल सकी नवनिर्मित पुलिया
पंद्रह फुट रेत में लगाया गया था एक फुट सीमेंट ,ई ओ बोले पता नहीं किस ठेकेदार ने बनाई थी पुलिया

औरंगाबाद (बुलंदशहर )औरंगाबाद में विकास कार्यों में भृष्टाचार की पोल उस समय खुल कर सामने आ गई जब सिर्फ तीन दिन पहले नाले पर बनाई गई पुलिया भरभरा कर ढह गई। गनीमत यह रही कि कोई गंभीर हादसा पेश नहीं आया।
नगर पंचायत औरंगाबाद में चल रहे विकास कार्यों में भृष्टाचार कमीशनखोरी और रिश्वतखोरी चरम पर है। आलम यह है कि यहां एक पुलिया के लैंटर निर्माण में पंद्रह फुट रेत में एक फुट सीमेंट लगाकर निर्माण कार्य की लीपापोती कर दी गई। वो पुलिया बहात्तर घंटे भी नहीं चल सकी। पुलिया ढह गई। खास बात यह रही कि नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी को यही नहीं पता कि पुलिया किस ठेकेदार ने बनाई और इस निर्माण कार्य पर सरकारी धन कितना व्यय किया गया।
कस्बे के जहांगीराबाद रोड से हिन्दुओं की अटूट आस्था के केंद्र प्रसिद्ध चामुंडा मंदिर व जहारवीर बाबा मंदिर जाने वाले रास्ते पर एक पुलिया नगर पंचायत ने तीन दिन पहले बनवाई थी। आसपास रहने वालों ने बताया कि ठेकेदार ने पंद्रह फुट रेत में सिर्फ एक फुट सीमेंट लगाकर निर्माण कार्य पूरा कर दिया जबकि निर्धारित मानक सात फुट रेत में एक फुट सीमेंट लगाये जाने का है।
नतीजा यह हुआ कि पुलिया भरभरा कर गिर गई।
अधिशासी अधिकारी रोहित कुमार से पूछा गया तो उन्होने कहा कि पता नहीं किस ठेकेदार ने पुलिया निर्माण कार्य किया। जब निर्माण कार्य की लागत पूछी गई तो उन्होने कहा कि जानकारी में नहीं है। मालूम करना पड़ेगा। यह हाल तो तब है जब प्रदेश में भाजपा की सरकार है कड़क तेवरों वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने प्रदेश की कमान संभाल रखी है। क्षेत्रीय विधायक सांसद भाजपा के हैं । यही नहीं जिलाधिकारी कुमार हर्ष हैं जिन्हें भृष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस के लिए खास माना जाता है। गुलावठी नगर पालिका में हुई कार्रवाई उनकी कार्यशैली का जीता-जागता उदाहरण है। काश जिलाधिकारी एक नजर औरंगाबाद नगर पंचायत के विकास कार्यों पर भी डालें तो भृष्टाचारियों पर कार्रवाई होते देर नहीं लगेगी।
रिपोर्टर राजेंद्र अग्रवाल






