ग्रेटर नोएडा

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में पवित्र बोधि वृक्ष का रोपण, शांति, प्रज्ञा और करुणा का दिया संदेश

ग्रेटर नोएडा:गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा में बुधवार को ध्यान केंद्र के समीप पवित्र बोधि वृक्ष रोपण समारोह का गरिमापूर्ण एवं आध्यात्मिक आयोजन किया गया। समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह, विश्वविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षकगण, बौद्ध भिक्षु संघ के वंदनीय सदस्य, दानदाता संस्था के प्रतिनिधि, विद्यार्थी तथा विश्वविद्यालय समुदाय के सदस्य उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन वेनरेबल ज्ञानसिंघी (Ven. Nyanasinghi) ने बौद्ध परंपराओं एवं विधि-विधान के अनुरूप किया। समारोह का शुभारंभ “नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स” के तीन बार सामूहिक उच्चारण से हुआ। बुद्ध वंदना के साथ पूरे परिसर में आध्यात्मिक एवं शांतिपूर्ण वातावरण निर्मित हुआ।

स्वागत संबोधन में डॉ. चिंतला वेंकट शिवसाई, निदेशक, इंटरनेशनल अफेयर्स एवं प्रमुख, स्कूल ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज एंड सिविलाइजेशन (SoBSC), गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ने बोधि वृक्ष के आध्यात्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि बोधि वृक्ष बौद्ध परंपरा में भगवान बुद्ध द्वारा बोधगया में प्राप्त ज्ञान एवं प्रबोधन से जुड़ा पवित्र प्रतीक है। यह वृक्ष प्रज्ञा, करुणा, शांति, सजगता (माइंडफुलनेस) और मुक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में बोधि वृक्ष का रोपण विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों, आगंतुकों और व्यापक समाज के लिए बौद्ध मूल्यों का एक जीवंत प्रतीक उपलब्ध कराएगा।

समारोह का मुख्य आकर्षण विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह द्वारा पवित्र बोधि वृक्ष का विधिवत रोपण किया । बोधि वृक्ष के रोपण के दौरान बौद्ध भिक्षु संघ के वंदनीय सदस्यों द्वारा पारंपरिक बौद्ध मंत्रों एवं गाथाओं का पाठ किया गया, जिससे समारोह का वातावरण आध्यात्मिक श्रद्धा एवं सद्भाव से भर गया।

रोपण के पश्चात विशिष्ट अतिथियों एवं विश्वविद्यालय समुदाय के सदस्यों ने नवरोपित बोधि वृक्ष पर सुगंधित जल अर्पित किया। बौद्ध परंपरा में यह श्रद्धा एवं सम्मान की अभिव्यक्ति मानी जाती है। इस अवसर ने केवल एक वृक्ष के संरक्षण का संकल्प नहीं, बल्कि उसके साथ जुड़े करुणा, शांति, प्रज्ञा और सद्भाव के मूल्यों को भी आत्मसात करने का संदेश दिया।

समारोह को संबोधित करते हुए प्रो. राजीव वर्ष्णेय, डीन एकेडमिक्स एवं डीन, स्कूल ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज एंड सिविलाइजेशन, ने कहा कि बौद्ध परंपरा में बोधि वृक्ष केवल एक वृक्ष नहीं, बल्कि भगवान बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति, प्रज्ञा, आंतरिक परिवर्तन, शांति और करुणा का गहन प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में रोपित यह बोधि वृक्ष आने वाले समय में गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय का एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक एवं शैक्षणिक स्थल बन सकता है। यह विद्यार्थियों एवं आगंतुकों को ध्यान, आत्मचिंतन और मनन के लिए शांत वातावरण प्रदान करेगा।

प्रो. वर्ष्णेय ने कहा कि शिक्षा को नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ना आज के समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। बोधि वृक्ष विद्यार्थियों को बौद्ध विरासत को केवल पुस्तकों और कक्षाओं के माध्यम से नहीं, बल्कि एक जीवंत सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक प्रतीक के रूप में समझने का अवसर प्रदान करेगा।

प्रो. एस. धनलक्ष्मी, डीन, प्लानिंग एंड रिसर्च, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ने बोधि वृक्ष के पर्यावरणीय महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बोधि वृक्ष मानव और प्रकृति के बीच गहरे संबंध का प्रतीक है तथा यह पर्यावरणीय जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण संदेश देता है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और जलवायु संबंधी चुनौतियों के बीच इस प्रकार की पहल विद्यार्थियों एवं विश्वविद्यालय समुदाय में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, जैव विविधता के संरक्षण और टिकाऊ जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

उन्होंने इस पहल को विश्वविद्यालय के वातावरण में पर्यावरण चेतना, सांस्कृतिक विरासत और बौद्ध पारिस्थितिक मूल्यों के समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में पवित्र बोधि वृक्ष का रोपण विशेष महत्व रखता है। विश्वविद्यालय का शैक्षणिक एवं शोध कार्य बौद्ध अध्ययन, बौद्ध दर्शन, संस्कृति, ध्यान एवं सभ्यतागत अध्ययन से गहराई से जुड़ा हुआ है। ऐसे में यह पहल विश्वविद्यालय की उस दृष्टि को और मजबूत करती है, जिसमें शिक्षा, शोध, ध्यान, सांस्कृतिक विरासत और नैतिक मूल्यों का समन्वय हो।

यह बोधि वृक्ष विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों और वैश्विक बौद्ध समुदाय के बीच एक प्रतीकात्मक सेतु के रूप में भी कार्य करेगा। साथ ही, यह शांति, अहिंसा, करुणा, सजगता और प्रकृति के साथ सामंजस्य जैसे सार्वभौमिक मूल्यों को बढ़ावा देने के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।

समारोह का समापन “बुद्धसासनं चिरं तिट्ठतु” के तीन बार सामूहिक उच्चारण के साथ हुआ, जिसके माध्यम से भगवान बुद्ध की शिक्षाओं के दीर्घकाल तक प्रसार एवं संरक्षण की मंगलकामना की गई। इसके पश्चात कुलपति, विशिष्ट अतिथियों, वंदनीय बौद्ध भिक्षु संघ के सदस्यों, शिक्षकों, दानदाताओं एवं प्रतिभागियों के साथ सामूहिक छायाचित्र लिया गया।

पवित्र बोधि वृक्ष रोपण समारोह गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक जीवन में एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में दर्ज हुआ। विश्वविद्यालय परिसर में रोपित यह बोधि वृक्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रबोधन, शांति, करुणा, प्रज्ञा और पर्यावरणीय सद्भाव का जीवंत प्रतीक बनकर प्रेरणा देता रहेगा।

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