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लाल बहादुर शास्त्री जी को पुष्प अर्पित कर उनके जीवन पर प्रो डॉ विनोद नागर ने डाला प्रकाश

ग्रेटर नोएडा:भारत राष्ट्रीय सेवक संघ के तत्वाधान में आयोजित पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की पुण्यतिथि पर प्रोफेसर डॉ विनोद नागर जी ने पुष्प अर्पित किए और सच्ची श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए स्वतंत्र भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत का निर्माण भारत राष्ट्रीय सेवक संघ के तत्वाधान में लाल बहादुर शास्त्री जी के अनुयाई बनाकर करना होगा उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए प्रोफेसर नगर ने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने 1964 से 1966 तक देश का नेतृत्व किया। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1904 को वाराणसी में हुआ था। उनकी सादगी, ईमानदारी और देशभक्ति के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाता है,

लाल बहादुर शास्त्री का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम शारदा प्रसाद श्रीवास्तव था, जो एक शिक्षक थे। उनकी माता का नाम रामदुलारी देवी था। लाल बहादुर शास्त्री ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा वाराणसी में प्राप्त की। उन्होंने काशी विद्यापीठ से स्नातक की उपाधि प्राप्त की भारत राष्ट्रीय सेवक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रोफेसर विनोद नागर जी ने उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लाल बहादुर शास्त्री ने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लिया। उन्होंने महात्मा गांधी के नेतृत्व में कई आंदोलनों में भाग लिया। उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा। उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया प्रोफेसर विनोद नागर जी ने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री जी समर्पण और ईमानदारी के रूप में भारतवर्ष सदैव उन्हें याद करता रहेगा स्वतंत्र भारत को लाल बहादुर शास्त्री जैसे प्रधानमंत्री का मिलन बड़े गौरव की बात है,

लाल बहादुर शास्त्री ने 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद राजनीति में प्रवेश किया। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। 1964 में नेहरू जी की मृत्यु के बाद, वे भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बने।

भारत राष्ट्रीय सेवक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ विनोद नागर जी ने कहा कि स्वतंत्रत भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री बनकर लाल बहादुर शास्त्री ने प्रधानमंत्री के रूप में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए। उन्होंने कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए हरित क्रांति की शुरुआत की। उन्होंने देश की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए। प्रोफेसर डॉ विनोद नागर जी ने अपने अंदाज में कहा कि 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ। लाल बहादुर शास्त्री ने देश की सुरक्षा के लिए दृढ़ता से नेतृत्व किया। उन्होंने सेना को हर मोर्चे पर जीत हासिल करने के लिए प्रेरित किया। उनकी नेतृत्व क्षमता और देशभक्ति ने देश को एकजुटता की माला में पिरोकर युवाओं में देश भक्ति की भावना भर दी भारत राष्ट्रीय सेवक संघ भी उन्हें सदैव समर्पित भाव से याद करता रहेगा

लाल बहादुर शास्त्री का 11 जनवरी 1966 को ताशकंद में निधन हो गया। उनकी मृत्यु के बाद, उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया भारत राष्ट्रीय सेवक संघ सदैव उनके पदचिन्हों पर चलकर राष्ट्रीय हित में कार्य करेगा

लाल बहादुर शास्त्री की स्मृति में कई संस्थान और योजनाएं स्थापित की गई हैं। उनकी जयंती 2 अक्टूबर को मनाई जाती है। उन्हें भारत के महान नेताओं में से एक माना जाता है प्रोफेसर डॉ विनोद नागर जी ने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री एक सादगी और ईमानदारी का प्रतीक थे। उन्होंने अपना जीवन देश की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उनकी नेतृत्व क्षमता, देशभक्ति और सादगी ने उन्हें भारत के महान नेताओं में से एक बना दिया।

भारत राष्ट्रीय सेवक संघ के तत्वाधान में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रोफेसर डॉ विनोद नागर जी ने लाल बहादुर शास्त्री जी की पुण्यतिथि पर पुष्प अर्पित किए और सच्ची श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस अवसर पर संगठन के पदाधिकारी और वरिष्ठ सदस्य उपस्थित थे।

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