आयुर्वेद के अनुसार हल्का, गर्म और सुपाच्य भोजन है लाभकारी – डॉ. शैलेश रौसा
वर्षा ऋतु में पाचन शक्ति का रखें विशेष ध्यान

बिलासपुर: वर्षा ऋतु में वातावरण में नमी बढ़ने और सूर्य की ऊष्मा कम होने का असर शरीर की पाचन शक्ति पर पड़ता है। आयुर्वेद के अनुसार इस मौसम में जठराग्नि मंद होने से भोजन आसानी से नहीं पचता। इसके चलते अपच, गैस, पेट फूलना, संक्रमण और त्वचा संबंधी समस्याओं की आशंका बढ़ सकती है। ऐसे में मौसम के अनुरूप आहार और दिनचर्या अपनाना बेहद जरूरी है।
शतायु हर्बल हॉस्पिटल, ग्राम सरकपुर के संस्थापक एवं पंचगव्य इलेक्ट्रो प्राकृतिक आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के विशेषज्ञ डॉ. शैलेश रौसा ने बताया कि वर्षा ऋतु में हल्का, गर्म, ताजा और सुपाच्य भोजन करना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना गया है। मूंग दाल, खिचड़ी, पुराना चावल, गेहूं, जौ, सूप और ताजी पकी सब्जियों को भोजन में शामिल किया जा सकता है। अदरक, जीरा, हींग, काली मिर्च, हल्दी और धनिया जैसे मसालों का संतुलित प्रयोग पाचन शक्ति को सहारा देता है।
बासी व खुले खाद्य पदार्थों से बचें
डॉ. रौसा ने बताया कि बारिश के मौसम में बासी भोजन, खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ, अत्यधिक तला-भुना एवं मसालेदार भोजन, जंक फूड, बहुत ठंडे पेय और आइसक्रीम से बचना चाहिए। दूषित पानी और अस्वच्छ भोजन संक्रमण का कारण बन सकते हैं। इसलिए स्वच्छ पानी का सेवन करने के साथ भोजन की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
भीगने के बाद तुरंत बदलें कपड़े
उन्होंने कहा कि बारिश में भीगने के बाद गीले कपड़ों में अधिक समय तक नहीं रहना चाहिए। पर्याप्त नींद लेने के साथ हल्का योग, प्राणायाम और नियमित व्यायाम दिनचर्या में शामिल करना उपयोगी है। देर रात तक जागने, दिन में अधिक सोने और शारीरिक निष्क्रियता से बचना चाहिए। घर और आसपास साफ-सफाई रखने के साथ उपयुक्त होने पर नियमित अभ्यंग (तेल मालिश) भी किया जा सकता है।
ऋतु के अनुसार आहार-विहार जरूरी
डॉ. रौसा के अनुसार आयुर्वेद का मूल सिद्धांत ‘ऋतु के अनुसार आहार और विहार’ है। वर्षा ऋतु में पाचन शक्ति का ध्यान रखते हुए संतुलित भोजन और उचित दिनचर्या अपनाने से अनेक स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव में मदद मिल सकती है। प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर रहना ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है।
रिपोर्टर घनश्याम पाल






