ग्रेटर नोएडा

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में ‘श्री अरबिंदो और भारतीय अंग्रेजी साहित्य’ विषय पर आमंत्रित व्याख्यान आयोजित

ग्रेटर नोएडा:गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू ) के स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज के अंग्रेजी एवं आधुनिक यूरोपीय भाषाओं विभाग द्वारा “श्री अरबिंदो और भारतीय अंग्रेजी साहित्य” विषय पर एक आमंत्रित व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को श्री अरविंद के साहित्यिक योगदान तथा भारतीय अंग्रेजी साहित्य के संदर्भ में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका से परिचित कराना और इस विषय पर अकादमिक विमर्श को प्रोत्साहित करना था।

कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के अंग्रेजी विभाग के प्रो. उज्ज्वल जना ने आमंत्रित वक्ता के रूप में व्याख्यान दिया। उन्होंने श्री अरविंद के साहित्यिक चिंतन, उनकी रचनात्मक दृष्टि तथा भारतीय अंग्रेजी साहित्य की परंपरा में उनके स्थान पर विस्तार से चर्चा की। उनके व्याख्यान ने विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों को भारतीय साहित्यिक अध्ययन के एक महत्त्वपूर्ण विषय पर एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद् के विचार सुनने तथा संवाद करने का अवसर प्रदान किया।

अपने व्याख्यान में प्रो. उज्ज्वल जना ने श्री अरविंद के बहुआयामी व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए उनके बौद्धिक विकास और भारतीय तथा पाश्चात्य चिंतन परंपराओं के साथ उनके गहरे जुड़ाव की चर्चा की। उन्होंने विशेष रूप से श्री अरविंद की प्रसिद्ध कृति ‘द फ्यूचर ऑफ़ पोएट्री ’ के संदर्भ में कविता, चेतना, अंतर्ज्ञान और आध्यात्मिकता संबंधी उनके विचारों को रेखांकित किया। उन्होंने श्री अरविंद की ‘कविता को मंत्र’ के रूप में देखने की अवधारणा को उच्चतर काव्यात्मक अभिव्यक्ति के एक विशिष्ट स्वरूप के रूप में समझाया।

व्याख्यान के दौरान श्री अरविंद के उस चिंतन पर भी चर्चा हुई, जिसके अनुसार मानव अस्तित्व का अंतिम लक्ष्य सत्य और उच्चतर चेतना की ओर अग्रसर होना है। यह दृष्टि उपनिषदों के ‘सत्, चित्, आनंद’ के सिद्धांत से जुड़ी हुई है। वक्ता ने बताया कि श्री अरविंद की साहित्यिक आलोचना में उनके विभिन्न रूप आलोचक, दार्शनिक, योगी और उपनिषदिक चिंतक—एक-दूसरे से जुड़े हुए दिखाई देते हैं।

प्रो. जना ने इंटीग्रल योग के संदर्भ में श्री अरविंद के मानव और आध्यात्मिक विकास संबंधी विचारों को भी स्पष्ट किया। उनके अनुसार श्री अरविंद मानवता को आध्यात्मिक विकास की प्रक्रिया में एक संक्रमणशील अवस्था के रूप में देखते हैं। इसी कारण उनकी साहित्यिक आलोचना में दर्शन, आध्यात्मिकता, रहस्यवाद, सौंदर्यशास्त्र और साहित्यिक चिंतन का विशिष्ट समन्वय दिखाई देता है। इस दृष्टि से श्री अरविंद एक ‘ क्रिटिक्स विथ ए डिफरेंस ’ के रूप में उभरते हैं, जिनकी साहित्यिक आलोचना की दृष्टि अपने आप में विशिष्ट एवं बहुआयामी है।

कार्यक्रम का आयोजन प्रो. माधव गोविंद, डीन, स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज, जीबीयू के संरक्षण में किया गया। डॉ. बिपाशा सोम गुने, विभागाध्यक्ष, अंग्रेजी एवं आधुनिक यूरोपीय भाषाओं विभाग, कार्यक्रम की संयोजक रहीं, जबकि डॉ. सुमित्रा हुइड्रोम ने कार्यक्रम का समन्वय किया।

कार्यक्रम के आयोजन में डॉ. रिया राज, डॉ. मंजिरी सुमन, डॉ. भावना शर्मा, सुश्री अक्षिता सिंह, सुश्री नमरा सुल्तान, सुश्री पारुल सिंह, सुश्री सृजना जायसवाल, सुश्री श्रुति सिंह तथा श्री आयुष सोनकर सहित आयोजन समिति के सदस्यों का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. सुमित्रा हुइड्रोम ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने आमंत्रित वक्ता प्रो. उज्ज्वल जना, डीन, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, विद्यार्थियों, शोधार्थियों, कार्यक्रम समन्वयक तथा आयोजन समिति के सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया और आमंत्रित व्याख्यान के सफल आयोजन में उनके योगदान की सराहना की।

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