श्री द्रोणाचार्य (पी.जी.) कॉलेज में अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस का गरिमामय आयोजन
ज्ञान, संस्कार और राष्ट्र निर्माण के सशक्त आधार हैं शिक्षक

दनकौर: श्री द्रोणाचार्य (पी.जी.) कॉलेज, दनकौर, गौतम बुद्ध नगर में 5 अक्टूबर 2026 को अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों के ज्ञान, समर्पण, मार्गदर्शन एवं राष्ट्र निर्माण में उनके महत्वपूर्ण योगदान के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करना रहा।
कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. गिरीश कुमार वत्स के मार्गदर्शन में माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया।
इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. गिरीश कुमार वत्स ने अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 5 अक्टूबर को विश्व शिक्षक दिवस शिक्षकों की भूमिका, उनके अधिकारों, दायित्वों तथा शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के प्रति वैश्विक सम्मान व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि इस दिवस का ऐतिहासिक आधार वर्ष 1966 में UNESCO और International Labour Organization (ILO) द्वारा शिक्षकों की स्थिति से संबंधित Recommendation को अपनाया जाना है। इसमें शिक्षकों के अधिकार एवं दायित्व, प्रशिक्षण, नियुक्ति, सेवा-शर्तों तथा शिक्षण-अधिगम की परिस्थितियों से संबंधित महत्वपूर्ण मानक निर्धारित किए गए थे। वर्ष 1994 से प्रत्येक वर्ष 5 अक्टूबर को विश्व शिक्षक दिवस मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल विषयगत ज्ञान प्रदान करने वाले नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, चरित्र, चिंतन और जीवन-दृष्टि को दिशा देने वाले राष्ट्र निर्माता हैं। वर्तमान समय में शिक्षकों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, संवेदनशीलता, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास भी आवश्यक है।
महाविद्यालय की उप-प्राचार्या एवं IQAC समन्वयक डॉ. रश्मि गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के ज्ञान के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व एवं चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एक शिक्षक अपने संस्कार, अनुभव और मार्गदर्शन के माध्यम से विद्यार्थियों को जीवन में सही दिशा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि शिक्षक का प्रभाव कक्षा की सीमाओं से आगे बढ़कर विद्यार्थियों के भविष्य और समाज की दिशा को प्रभावित करता है।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. रश्मि जहां एवं श्री इन्द्रजीत सिंह ने कहा कि शिक्षक दिवस शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त करने और उनके योगदान को स्मरण करने का विशेष अवसर है। शिक्षक अपने ज्ञान, संस्कार और सकारात्मक दृष्टिकोण के माध्यम से विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य तथा सशक्त राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
डॉ. राजीव पाण्डे ने कहा कि शिक्षक समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ नैतिक मूल्यों, जिम्मेदारी और सामाजिक चेतना विकसित करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में डॉ. प्रशांत कनौजिया ने शिक्षकों की भूमिका एवं उनके महत्व पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षक केवल विषय का ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे विद्यार्थियों के विचार, व्यक्तित्व, चरित्र और भविष्य को दिशा देने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से शिक्षक नई पीढ़ी को ज्ञान, संस्कार, नैतिक मूल्यों एवं सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में श्री अमित नगर, डॉ. रेशा, डॉ. कोकिल अग्रवाल, डॉ. सूर्य प्रताप, डॉ. अजमत आरा, डॉ. नाज परवीन, श्रीमती शशि दहेलिया, डॉ. प्रीति रानी सेन, डॉ. निशा शर्मा, श्रीमती प्रीति शर्मा एवं डॉ. संगीता रावल सहित अन्य प्राध्यापकगण एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
उपस्थित प्राध्यापकगण एवं विद्यार्थियों ने शिक्षकों के प्रति अपनी श्रद्धा, सम्मान एवं आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन शिक्षकों के निरंतर समर्पण, उत्कृष्ट योगदान एवं राष्ट्र निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए शुभकामनाओं के साथ हुआ।






