तीसरा दिन:आईएचजीएफ दिल्ली मेले में खरीदारों ने सस्टेनेबल इनोवेशन, नेचुरल मटीरियल, वर्सेटाइल ब्लेंड और हाथ से बनी कला की तारीफ़, जिससे सोर्सिंग में तेज़ी आई और पूछताछ और ऑर्डर बढ़े
प्रदर्शक-क्रेता बैठकें, निर्यातकों हेतु एआई, जीईओ और एईओ ईयूडीआर अनुपालन तथा सप्लाई चेन ट्रेसेबिलिटी विषयों पर सेमिनार और सत्र आयोजित; और यूरोपीय संघ के पैकेजिंग एंड पैकेजिंग वेस्ट रेग्युलेशन अनुपालन पर आयोजित कार्यक्रमों ने प्रतिभागियों को रखा व्यस्त

दिल्ली/एनसीआर : केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय में सचिव श्रीमती नीलम शामी राव और हस्तशिल्त विकास आयुक्त श्रीमती अमृत राज ने 62 वां आईएचजीएफ दिल्ली मेला- ऑटम 2026 का आज दौरा किया।
मेले के स्वरूप तथा विविध उत्पाद प्रदर्शनियों के माध्यम से दिए गए सामूहिक संदेश की सराहना करते हुए भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय में सचिव श्रीमती नीलम शामी राव ने कहा कि यह मेला एक समृद्ध वैश्विक सोर्सिंग मंच के रूप में विकसित हुआ है, जो भारतीय निर्माताओं, निर्यातकों, कारीगरों और बुनकरों को अंतरराष्ट्रीय क्रेताओं से जोड़ रहा है। उन्होंने कहा, “भारतीय हस्तशिल्प क्षेत्र देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखता है, साथ ही रोजगार सृजन करता है, ग्रामीण आजीविकाओं को सहारा देता है और कारीगरों, एमएसएमई तथा उद्यमियों को वैश्विक बाजारों तक पहुँच प्रदान करता है। उन्होंने इस सेक्टर को मजबूत बनाने, इसकी वैश्विक पहचान बढ़ाने तथा भारत को घरेलू उत्पादों, लाइफस्टाइल, फैशन, फर्नीचर, फर्निशिंग और इंटीरियर उत्पादों के लिए एक विश्वसनीय सोर्सिंग केंद्र के रूप में स्थापित करने में हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) की भूमिका की सराहना की। साथ ही आशा व्यक्त की कि इस संस्करण से इन श्रेणियों में बाजार संपर्क और अधिक मजबूत होंगे तथा निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
मेले में विविध प्रदर्शनियों और प्रदर्शकों के विविध समूहों को देखते हुए भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय में हस्तशिल्प विकास आयुक्त श्रीमती अमृत राज ने ईपीसीएच के निरंतर प्रयासों की सराहना की, जिनके माध्यम से हस्तशिल्प निर्यातकों, स्टार्टअप्स और शिल्प उद्यमियों को भारत की समृद्ध शिल्प विरासत तथा सृजनात्मक उत्कृष्टता को वैश्विक बाजारों के समक्ष प्रस्तुत करने हेतु ऐसे मंच प्रदान किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मेले में भाग ले रहे हमारे शिल्पकार थीम पवेलियन के माध्यम से बाजार का अनुभव प्राप्त कर रहे हैं और प्रेरणा ले रहे हैं। बदलती बाजार प्रवृत्तियों के अनुरूप ढलने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने प्रदर्शकों से आग्रह किया कि वे, “अपनी शिल्पकला की प्रामाणिकता और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखते हुए, इनोवेशन, गुणवत्ता और सस्टेनेबल प्रैक्टिस अपनाकर इस क्षेत्र की प्रगति में योगदान दें।”
ईपीसीएच के अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने बताया “मेले के पहले तीन दिनों में, हमने वापस आने वाले और पहली बार खरीदने वालों का अच्छा खासा स्वागत किया है, जिनमें से कई ने पुराने और नए सप्लायर्स, दोनों को ऑर्डर देने में गहरी दिलचस्पी दिखाई है। ऑर्गनाइज़र के तौर पर एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स और इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट अच्छे बिज़नेस कनेक्शन बनाने में मदद कर रहे हैं, जिससे अनुभवी खरीदार दूसरी और तीसरी पीढ़ी के भारतीय हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स के साथ आ रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “एग्जिबिटर्स कॉटन और जूट लाइफस्टाइल एक्सेसरीज़ और नेचुरली डाई किए हुए, हाथ से पेंट किए हुए कपड़ों से लेकर रीसायकल किए गए कपड़ों और कागज़ से बने डेकोर, और मौसम के हिसाब से काटे गए पौधों के रेशों से बनी फैशन एक्सेसरीज़ तक, सस्टेनेबल, इको-कॉन्शियस प्रोडक्ट्स की एक शानदार रेंज भी पेश कर रहे हैं। ये इनोवेटिव ऑफरिंग खरीदारों की काफी दिलचस्पी खींच रही हैं।”
आज मेले में क्रेताओं की मांग और रुचि को समझाते हुए ईपीसीएच के महानिदेशक की भूमिका में मुख्य संरक्षक और आईईएमएल के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार ने कहा, “62वें आईएचजीएफ दिल्ली मेले–ऑटम 2026 में आज प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों अमेरिका, रूसी संघ, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया तथा ताइवान, चीन और जापान जैसे एशियाई देशों से क्रेता आए। इसके साथ ही भारत से भी घरेलू क्रेताओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति रहे। इन क्रेताओं की घरेलू सजावट, फर्नीचर, कपड़े, फैशन एक्सेसरीज़ और लाइफस्टाइल उत्पादों में विविध सोर्सिंग रुचियाँ देखने को मिली।”
आज आईएचजीएफ दिल्ली फेयर–ऑटम 2026 का दौरा श्रीमती आरती कंवर, आईएएस, अतिरिक्त सचिव, वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार; श्रीमती सुनैना तोमर, आईएएस (सेवानिवृत्त), पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग (उच्च एवं तकनीकी शिक्षा), गुजरात सरकार; तथा श्री अजीत चव्हाण, अतिरिक्त सीईओ, गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) ने भी किया।
रूसी संघ से आई इरीना एलिसेवा घरेलू सजावट, लाइटिंग और धातु उत्पादों को सोर्स करने आईं हैं। वहीं नियमित रूप से इस मेले के ग्राहक यूनाइटेड किंगडम के इयान स्नो फर्नीचर और ब्लॉक-प्रिंटेड उत्पादों की को लगातार सोर्स कर रहे हैं; उनके आयात में भारत की हिस्सेदारी लगभग 85 प्रतिशत है। यूनाइटेड किंगडम के ही माइकल टेलर हस्तनिर्मित फर्नीचर की तलाश में आए हैं, जबकि जर्मनी से पीटर ज़ुर्न विशिष्ट इंटीरियर डेकोर संग्रह सोर्स कर रहे हैं। जर्मनी से ही आए जुर्गन राइटर फर्नीचर, लाइटिंग और एक्सेसरीज़ की खरीद कर रहे हैं तथा उन्होंने बताया कि मेले में भागीदारी से उनके व्यवसाय में 10–15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। फ्रांस से आईं सिल्वियान शैट्री फर्नीचर की खोज कर रही हैं; उनके आयात में भारत की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है। ताइवान से आईं ऐनी महिलाओं के वस्त्र और फर्निशिंग के लिए भारतीय वस्त्रों से प्रेरणा ले रही हैं, जबकि जापान के हिदेकी हयावाका टोट बैग और सिलाई से जुड़े उत्पादों की खोज कर रहे हैं तथा भारत से अपनी खरीद बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।
ईपीसीएच के उपाध्यक्ष श्री सागर मेहता ने कहा, “क्रेताओं के रुचि औऱ उत्पादों के प्रति उनके ये विचार शिल्पकला, उत्पादों की विविधता और डिज़ाइन-आधारित संग्रहों के लिए सोर्सिंग गंतव्य के रूप में भारत के महत्व को उजागर करते हैं, साथ ही अंतरराष्ट्रीय व्यापार का विस्तार करने और दीर्घकालिक व्यावसायिक संबंधों को मजबूत करने के अवसरों पर बल देते हैं।”
आईएचजीएफ दिल्ली मेला–ऑटम 2026 स्वागत समिति के अध्यक्ष श्री अवधेश अग्रवाल ने कहा,“आज की संगोष्ठियों से प्रतिभागों को बहुत ज्यादा मार्गदर्शन और सीखने को मिला।” उन्होंने अपनी बातों को विस्तार देते हुए कहा कि, “‘ऑनलाइन विजिबिलिटी टु वेरीफाइड आर्डर: एआई, जियो और एईओ फॉर एक्सपोर्ट्स ’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी का उद्देश्य निर्यातकों को उनकी डिजिटल उपस्थिति मजबूत करने तथा एआई-सक्षम उपकरणों, जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (जीईओ) और आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (एईओ) का उपयोग करके वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति और खोज बढ़ाने, क्रेताओं का विश्वास बनाने और ऑनलाइन पूछताछ को विश्वसनीय निर्यात ऑर्डर में बदलने में सहायता करना था। ‘यूरोपीय यूनियन डीफॉरेस्टेशन रेग्युलेश कंप्लायंस एंड सप्लाई चेन ट्रेसेबिलिटी’ विषय पर आयोजित सत्र ने ईयूडीआर की आवश्यकताओं के प्रति जागरूकता बढ़ाई तथा यूरोपीय बाजार तक पहुँच बनाए रखने के लिए निर्यातकों को उचित कानूनों का पालन करने, ट्रेसिबिलिटी बढ़ाने , जोखिम मूल्यांकन और दस्तावेज़ीकरण प्रणाली स्थापित करने में मार्गदर्शन दिया। सत्र में विशेषज्ञ के तौर पर आए पैकेजिंग विशेषज्ञ एवं रणनीतिकार ने निर्यातकों को यूरोपीय संघ की बदलती पैकेजिंग आवश्यकताओं से परिचित कराया, ताकि वे यूरोपीय बाजार के लिए टिकाऊ पैकेजिंग दृष्टिकोण तैयार कर सकें।”
इंडिया एक्सपो सेंटर में क्रेता-प्रदर्शक संवाद और यहां पर दिखाई जा रही भीड़ और चहल पहल पर टिप्पणी करते हुए ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक श्री राजेश रावत ने कहा, “आज के सुहावने मौसम ने मेले के उत्साहपूर्ण माहौल को और बढ़ा दिया है। क्रेता शानदार वातावरण में अपने नियमित आपूर्तिकर्ताओं से दोबारा जुड़ने के अवसर का आनंद ले रहे हैं। क्रेता और आगंतुकों ने आयोजन की सुविधाओं, प्रदर्शित उत्पादों की विस्तृत विविधता और व्यापार करने की सरलता पर भी सकारात्मक प्रतिक्रिया साझा की है।”
ईपीसीएच देश से विश्व के विभिन्न गंतव्यों तक हस्तशिल्प के निर्यात को बढ़ावा देने और विदेश में भारत की छवि को उच्च गुणवत्ता वाले हस्तशिल्प के विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में प्रस्तुत करने के लिए एक नोडल संस्थान है। इस अवसर पर ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक श्री राजेश रावत ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान हस्तशिल्प का कुल निर्यात 33,168 करोड़ रुपये (3,754 मिलियन डॉलर) रहा।






