देव स्वरुपों को नचाना परमेश्वर का घोर अपमान ,सनातनी करें ऐसे कार्यक्रमों का बहिष्कार

औरंगाबाद (बुलंदशहर )सामाजिक कार्यकर्ता संजय गोयल ने एक सामाजिक कुरीति को इंगित करते हुए कहा कि देवी देवताओं के वेश धारी स्वरुपों को सार्वजनिक मंच पर नचाना भगवान का घोर अपमान सरीखा है। प्रत्येक सनातनी व्यक्ति को ऐसे कार्यक्रमों का विरोध स्वरूप बहिष्कार करना चाहिए।
उन्होने प्रश्न किया कि हमारे देवी देवताओं का इस प्रकार का उपहास क्यों और कब तक होता रहेगा? उन्होने कहा कि हम भजन कीर्तन में अपने देव भगवान, देवी देवताओं के आगे स्वयं खूब नाचें गाएं मंगल आनंद मनायें लेकिन ये झांकी जागरण वाले जो हमारे देवी देवताओं का ही स्वरूप बनाकर कार्यक्रम के दौरान हमारे देव स्वरुपों को नचवाकर ठुमके लगवाते नजर आते हैं जो कि हमारे देवी देवताओं का अपमान और मजाक उड़ाया जाना जैसा दुष्कृत्य है। देव स्वरुपों को उपहास का पात्र बनवाने का खुलकर विरोध होना चाहिए क्योंकि हमारे धर्म और सनातन के लिए यह उचित नहीं है।
उन्होने अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि मैंने स्वयं देखा है कि संतों ने भी इस कृत्य का विरोध किया है। अनेक कार्यक्रमों में जब झांकी वाले भगवान स्वरुपों को नचाने के लिए मंच पर लाये तो संत जन विरोध स्वरूप कार्यक्रम बीच में ही छोड़ कर उठ कर चले गए। अतः हम सभी को मिलकर इस कृत्य का खुलकर विरोध करना चाहिए।
रिपोर्टर राजेंद्र अग्रवाल






