महंत सुरेश भगत जी की 41 दिवसीय खड़ी एवं मौन तपस्या हुई पूर्ण

बागपत(उत्तर प्रदेश) जनपद बागपत के सांकरौद गांव स्थित गुरु गोरखनाथ आश्रम में महंत सुरेश भगत जी की 41 दिवसीय खड़ी एवं मौन तपस्या विधिवत संपन्न हो गई। तपस्या के समापन अवसर पर आश्रम परिसर में हवन-यज्ञ एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं, संत-महात्माओं और गणमान्य लोगों ने भाग लिया। समापन समारोह में बागपत के विधायक योगेश धामा, संत भईया दास जी महाराज, महामहिम राष्ट्रपति जी व उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सम्मानित वरिष्ठ पत्रकार विपुल जैन, अरविन्द जैन उर्फ बंटी सहित दिल्ली-एनसीआर की अनेकों जानी-मानी हस्तियां, संत व महात्मा मौजूद रहें। उपस्थित श्रद्धालुओं ने महंत सुरेश भगत जी की जय-जयकार करते हुए उनकी तपस्या पूर्ण होने पर बधाई दी और उनके आध्यात्मिक संकल्प के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। महंत सुरेश भगत जी उत्तर भारत के सुप्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरुओं में शुमार हैं। उनकी यह जीवन की 11वीं कठिन तपस्या थी, जबकि वर्ष 2026 में यह उनकी तीसरी बड़ी तपस्या रही। उन्होंने अपनी साधना को जग सेवा, लोककल्याण, सनातन धर्म तथा गुरु गोरखनाथ जी की शिक्षाओं, आदर्शों और विचारधारा के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित किया। तपस्या के दौरान महंत जी ने अन्न, नमक और मिर्च का पूर्ण त्याग करते हुए मुख्य रूप से दूध एवं पानी का सेवन किया। इस दौरान वे गुरु गोरखनाथ जी और जगत जननी मां दुर्गा जी के जाप में लीन रहे। मौन साधना के चलते वे श्रद्धालुओं की समस्याओं और जिज्ञासाओं का समाधान कागज पर लिखकर देते रहे। महंत सुरेश भगत जी का मानना है कि भक्ति और साधना के माध्यम से समाज में सकारात्मक ऊर्जा, आध्यात्मिक चेतना और मानव कल्याण की भावना का संचार किया जा सकता है। गुरु गोरखनाथ आश्रम में सभी धर्मों के लोगों का स्वागत किया जाता है। तपस्या के सफल समापन पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। आश्रम की और से बताया गया कि जल्द ही महंत सुरेश भगत जी गुरु गोरखनाथ टीला, हनुमानगढ़ के दर्शन के लिए प्रस्थान करेंगे।
रिपोर्टर विवेक जैन






