सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम कार्यशाला में १५० से अधिक उद्यमियों ने जाना आत्मनिर्भरता, निर्यात और वैश्विक बाजार का मार्ग
शिक्षा, पत्रकारिता एवं सामाजिक-सांस्कृतिक क्षेत्र में योगदान के लिए भगवत प्रसाद शर्मा सम्मानित

— भगवत प्रसाद शर्मा की विशेष रिपोर्ट
ग्रेटर नोएडा:किसी राष्ट्र का भाग्योदय केवल ऊँची अट्टालिकाओं, विशाल कारखानों अथवा आर्थिक आंकड़ों से नहीं होता; राष्ट्र की वास्तविक समृद्धि तब आकार लेती है, जब उसके अंतिम छोर पर खड़ा श्रमिक, छोटा उद्यमी और साधारण नागरिक भी विकास की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक सहभागी बनता है। इसी संवेदनशील राष्ट्रचेतना को आत्मसात करते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के विकास एवं सुविधा कार्यालय, ओखला, नई दिल्ली, औद्योगिक व्यवसाय संघ, ग्रेटर नोएडा तथा आईआईएलएम विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में १५० से अधिक उद्यमियों ने सहभागिता की। ‘खरीद एवं विपणन सहायता योजना’ पर केंद्रित इस आयोजन में वित्तीय सहायता, सरकारी खरीद, विपणन, गुणवत्ता संवर्धन, निर्यात तथा वैश्विक बाजार की संभावनाओं पर सार्थक विमर्श हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी श्रीमती मेधा रूपम, भारतीय प्रशासनिक सेवा द्वारा दीप प्रज्वलन एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ। उन्होंने जिले में परिधान, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा औद्योगिक निवेश की निरंतर बढ़ती संभावनाओं का उल्लेख करते हुए उद्यमियों का आह्वान किया कि वे स्थानीय सीमाओं को लांघकर वैश्विक बाजार में भारतीय प्रतिभा और उत्पादों की पहचान स्थापित करें।
उनका संदेश इस तथ्य का द्योतक रहा कि प्रशासनिक संवेदनशीलता और औद्योगिक पुरुषार्थ का समन्वय विकास की गति को न केवल तीव्र करता है, बल्कि उसे जनकल्याण की सार्थक परिणति तक भी पहुँचाता है।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के उप निदेशक श्री ओ. पी. सिंह ने ऋण प्रत्याभूति योजनाओं एवं वित्तीय सहायता की जानकारी प्रदान की। राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम के मुख्य प्रबंधक श्री ऋषि भाटिया एवं श्री राजन उप्रेती ने अंतरराष्ट्रीय विपणन तथा निर्यात संवर्धन के व्यावहारिक पहलुओं से उद्यमियों को अवगत कराया।
इंडियन ऑयल तथा ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन के खरीद अधिकारियों ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए उपलब्ध व्यापक अवसरों की जानकारी दी।
वहीं सरकारी ई-बाजार, शून्य दोष–शून्य प्रभाव प्रमाणन तथा दक्ष एवं मितव्ययी विनिर्माण प्रणाली जैसी पहलों के माध्यम से गुणवत्ता, उत्पादकता, दक्षता और आधुनिक तकनीक को अपनाने पर विशेष बल दिया गया।
औद्योगिक व्यवसाय संघ के अध्यक्ष श्री अमित कुमार उपाध्याय एवं महासचिव श्री सुनील दत्त शर्मा ने उद्योग, प्रशासन और उद्यमियों के मध्य सुदृढ़ संवाद एवं समन्वय को समय की अपरिहार्य आवश्यकता बताया। कार्यशाला के संवादात्मक सत्र में उद्यमियों की जिज्ञासाओं और व्यावहारिक समस्याओं का समाधान भी किया गया।
इस अवसर पर आईआईएलएम विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. जयशंकर वरियार, प्रति-कुलपति डॉ. निहार अमोनकर, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के राज्य निदेशक डॉ. आर. के. भारती सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
भगवत प्रसाद शर्मा को सम्मान—सेवा और सरोकार का अभिनंदन
कार्यक्रम में शिक्षा, पत्रकारिता तथा सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए श्री भगवत प्रसाद शर्मा को औद्योगिक व्यवसाय संघ के अध्यक्ष श्री अमित कुमार उपाध्याय द्वारा स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया।
यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का अभिनंदन नहीं, बल्कि उन सामाजिक सरोकारों, जनचेतना और राष्ट्रहित की भावभूमि का सम्मान है, जिसके माध्यम से समाज में सकारात्मक चिंतन और संवेदनशील संवाद को निरंतर गति देने का प्रयास किया जाता रहा है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा परिकल्पित ‘विकसित भारत@२०४७’ केवल आर्थिक प्रगति का लक्ष्य नहीं, बल्कि ऐसे भारत के निर्माण का राष्ट्रीय संकल्प है, जहाँ आत्मनिर्भरता के साथ आत्मसम्मान, आधुनिकता के साथ भारतीयता, समृद्धि के साथ सामाजिक संवेदना और विकास के साथ अंतिम व्यक्ति का कल्याण सुनिश्चित हो।
इस विराट संकल्प की आधारशिला में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। देश के छोटे-छोटे उद्यम जब अपने श्रम और नवाचार से उत्पादन बढ़ाते हैं, तो वे केवल वस्तुओं का निर्माण नहीं करते—वे रोजगार गढ़ते हैं, परिवारों को संबल देते हैं, स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देते हैं और राष्ट्र की आर्थिक आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करते हैं।
भगवत प्रसाद शर्मा के शब्दों में—
“भारत के विकास की असली कहानी उस छोटे उद्यमी की सफलता में लिखी जाएगी, जिसने सीमित साधनों के बावजूद अपने पुरुषार्थ से असंभव को संभव बनाया। जब उसके श्रम को नीति का संबल और बाजार का विस्तार मिलता है, तब उसकी सफलता राष्ट्र की सामूहिक उपलब्धि बन जाती है।”
आज आवश्यकता है कि ‘स्थानीय के लिए मुखर’, ‘भारत में निर्माण’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत@२०४७’ के संकल्प जन-जन की सहभागिता से जनांदोलन का स्वरूप ग्रहण करें।
वर्ष २०४७ में स्वतंत्र भारत अपनी शताब्दी की ओर अग्रसर होगा। उस समय का भारत कैसा होगा, इसकी आधारभूमि आज के हमारे निर्णय, परिश्रम, नवाचार और संकल्प ही तैयार कर रहे हैं।
स्वर्णिम युग की ओर बढ़ता भारत
“जहाँ श्रम का सम्मान हो,
जहाँ उद्यम को अवसर मिले,
जहाँ युवा के स्वप्नों को पंख मिलें,
जहाँ मातृशक्ति की प्रतिभा को पूर्ण आकाश मिले,
और जहाँ विकास का प्रकाश अंतिम व्यक्ति की देहरी तक पहुँचे—
वही विकसित भारत का सच्चा स्वरूप होगा।”
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को सशक्त बनाने की यह कार्यशाला इसी विराट यात्रा की एक सार्थक कड़ी है। यह संदेश देती है कि भारत का स्वर्णिम भविष्य केवल सरकारों की नीतियों से नहीं, बल्कि करोड़ों नागरिकों के पुरुषार्थ, उद्यमिता, नवाचार और राष्ट्रनिष्ठा से निर्मित होगा।
२०४७ का विकसित भारत किसी दूर क्षितिज पर टिमटिमाता स्वप्न नहीं, बल्कि आज के कर्म, संकल्प और सामूहिक पुरुषार्थ से आकार लेता हुआ वह स्वर्णिम युग है, जिसकी नींव वर्तमान पीढ़ी अपने श्रम से रख रही है।






