शिक्षण संस्थान

नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए शिक्षकों को मिला समग्र एवं समकालीन प्रशिक्षण

आठ दिवसीय ऑनलाइन NEP ओरिएंटेशन एवं संवेदनशीलता कार्यक्रम का सफल समापन

दनकौर:श्री द्रोणाचार्य पी.जी. कॉलेज, दनकौर एवं यूजीसी–मालवीय मिशन–टीचर ट्रेनिंग सेंटर, कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित आठ दिवसीय Online NEP Orientation & Sensitisation Programme – September B 2026 का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के सचिव श्री रजनीकान्त अग्रवाल जी के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की भावना, उद्देश्यों एवं प्रावधानों की समझ विकसित करने के साथ शिक्षकों को समकालीन शैक्षणिक आवश्यकताओं, नवाचारों, शोध एवं तकनीकी परिवर्तनों के अनुरूप सशक्त बनाना रहा।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. गिरीश कुमार वत्स का मार्गदर्शन एवं सहयोग तथा कार्यक्रम समन्वयक डॉ. रश्मि गुप्ता के समन्वित प्रयास विशेष रूप से उल्लेखनीय रहे। देश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े शिक्षकों एवं शिक्षाविदों ने ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम में सहभागिता की तथा विषय विशेषज्ञों के साथ अकादमिक संवाद एवं विचार-विमर्श किया।

आठ दिनों तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS), उच्च शिक्षा एवं समाज, कौशल विकास, शोध विकास, विद्यार्थी विविधता एवं समावेशी शिक्षा, शैक्षणिक नेतृत्व, शासन एवं प्रबंधन, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, समग्र विकास तथा बहुविषयक शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान एवं संवाद आयोजित किए गए।

कार्यक्रम के दौरान भारतीय ज्ञान प्रणाली के माध्यम से भारतीय ज्ञान, दर्शन, संस्कृति एवं परंपराओं को समकालीन शिक्षा से जोड़ने पर विस्तार से चर्चा हुई। उच्च शिक्षा एवं समाज से संबंधित सत्रों में शिक्षा की सामाजिक भूमिका, शिक्षक की बदलती जिम्मेदारियों तथा विकसित भारत @2047 के निर्माण में उच्च शिक्षा की भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया।

कौशल एवं शोध विकास से संबंधित सत्रों में संज्ञानात्मक कौशल, आधुनिक मूल्यांकन अवधारणाओं, शोध समस्या एवं परिकल्पना निर्माण तथा गुणवत्तापूर्ण शोध के विभिन्न आयामों पर विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन प्रदान किया। विद्यार्थी विविधता एवं समावेशी शिक्षा के अंतर्गत दिव्यांगजन, सामाजिक एवं आर्थिक रूप से वंचित वर्गों (SEDGs), सहायक तकनीक तथा समावेशी शैक्षणिक वातावरण जैसे विषयों को प्रमुखता दी गई।

कार्यक्रम में शैक्षणिक नेतृत्व, शासन एवं प्रबंधन के माध्यम से संस्थागत नेतृत्व, प्रभावी प्रशासन तथा उच्च शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता उन्नयन पर भी चर्चा हुई। शिक्षकों को बदलती शैक्षणिक परिस्थितियों में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने तथा संस्थागत विकास में सक्रिय योगदान के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में ICT एवं Artificial Intelligence (AI) के शिक्षा में बढ़ते उपयोग पर विशेष अकादमिक चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने AI आधारित व्यक्तिगत एवं अनुकूली शिक्षा, डिजिटल सामग्री निर्माण, प्रभावी Prompt Writing, Zero-shot एवं One-shot Prompting तथा Retrieval-Augmented Generation (RAG) जैसी तकनीकों की शैक्षणिक उपयोगिता से प्रतिभागियों को परिचित कराया। साथ ही AI को शिक्षक का विकल्प न मानकर एक सहायक शैक्षणिक साधन के रूप में जिम्मेदारी, विवेक एवं नैतिकता के साथ प्रयोग करने पर बल दिया गया।

समापन दिवस पर समग्र विकास एवं बहुविषयक शिक्षा पर भी विस्तृत अकादमिक विमर्श हुआ। प्रतिभागियों को अंतर्विषयक एवं बहुविषयक दृष्टिकोण विकसित करने तथा विभिन्न विषयों के ज्ञान को एकीकृत कर वास्तविक जीवन की जटिल समस्याओं के समाधान की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रो. दिव्या यू. जोशी, निदेशक, यूजीसी–एमएमटीटीसी, कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. रश्मि गुप्ता ने यूजीसी–एमएमटीटीसी, कुमाऊँ विश्वविद्यालय के प्रो. लेफ्टिनेंट रीतेश शाह सहित सभी निदेशकों, विशेषज्ञ वक्ताओं, कार्यक्रम अधिकारियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने महाविद्यालय के सचिव श्री रजनीकान्त अग्रवाल जी के मार्गदर्शन तथा प्राचार्य डॉ. गिरीश कुमार वत्स के निरंतर सहयोग के लिए विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया।

डॉ. रश्मि गुप्ता ने कहा कि इस प्रकार के शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल ज्ञानवर्धन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि शिक्षकों को बदलती शिक्षा व्यवस्था, तकनीकी नवाचार, शोध, समावेशिता और बहुविषयक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने के लिए तैयार करते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान एवं अनुभवों को अपने कक्षा-कक्ष, शोध तथा संस्थागत कार्यों में प्रभावी रूप से लागू करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के सफल ऑनलाइन संचालन में श्री जतीन का तकनीकी सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा। आठ दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को ज्ञान, कौशल, तकनीक, शोध, नेतृत्व और भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध आयामों से जोड़ते हुए NEP 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक सार्थक अकादमिक पहल का रूप लिया।

महाविद्यालय परिवार ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के सतत शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम उच्च शिक्षा में गुणवत्ता, नवाचार, समावेशिता, शोध संस्कृति एवं समग्र विकास को सुदृढ़ करने में निरंतर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!