ग्रेटर नोएडा

आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान के संगम से स्वस्थ भविष्य की राह: जीबीयू में 11वां आयुर्वेद दिवस

ग्रेटर नोएडा:गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विद्यालय द्वारा 11वें आयुर्वेद दिवस का आयोजन किया गया। इस वर्ष की विषय-वस्तु “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” रही। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, विद्यार्थी एवं विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य आयुर्वेद के महत्व तथा स्वास्थ्य, अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में इसकी प्रासंगिकता को रेखांकित करना था।
आयुर्वेद दिवस भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा इसके समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करने के लिए मनाया जाता है। आयुर्वेद स्वस्थ जीवनशैली, रोगों की रोकथाम तथा शरीर, मन और पर्यावरण के बीच संतुलन पर बल देता है। यह अवसर आयुर्वेद के सिद्धांतों के वैज्ञानिक अध्ययन तथा आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ उनके संभावित समन्वय को भी प्रोत्साहित करता है।


कार्यक्रम का शुभारंभ धन्वंतरी वंदना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जो स्वास्थ्य, ज्ञान एवं प्रज्ञा का प्रतीक है। इसके पश्चात डॉ. अंकिता शर्मा, सहायक आचार्य, जैव प्रौद्योगिकी विद्यालय द्वारा स्वागत संबोधन प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने आयुर्वेद दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला।
उद्घाटन सत्र में आयुर्वेद के मूलभूत सिद्धांतों तथा वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में उनकी प्रासंगिकता पर विचार-विमर्श हुआ। प्रो. एस. धनलक्ष्मी, अधिष्ठाता, जैव प्रौद्योगिकी विद्यालय ने अपने संबोधन में आयुर्वेद में वर्णित अग्नि की अवधारणा तथा आधुनिक विज्ञान में उभरती आंतों के सूक्ष्मजीव समुदाय की अवधारणा के बीच संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने आयुर्वेद में वर्णित व्यक्ति-विशिष्ट संवैधानिक भिन्नताओं को मानव शरीर के सूक्ष्मजीव समुदाय के संबंध में विकसित हो रही वैज्ञानिक समझ से जोड़ते हुए महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए।
माननीय कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने आयुर्वेद के मूलभूत सिद्धांतों तथा वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए इसके व्यापक क्षेत्र पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान को व्यवस्थित अनुसंधान एवं आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों के माध्यम से प्रमाणित और अध्ययन करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम में दो विशेषज्ञ व्याख्यान भी आयोजित किए गए। डॉ. शालिनी राय, सह-आचार्य, आर.एन.वी.वी. विभाग, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान ने “आयुर्वेद को समझना: आज और कल के लिए वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित स्वास्थ्य” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने आयुर्वेदिक चिकित्सा के प्रमाण-आधारित आधार तथा वर्तमान स्वास्थ्य आवश्यकताओं के संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता पर चर्चा की।
दूसरा विशेषज्ञ व्याख्यान डॉ. पी. शिफा शेट्टी, आयुष मंत्री की विशेष कार्य अधिकारी एवं सहायक आचार्य, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान द्वारा “आयुर्वेद और जैव प्रौद्योगिकी के बीच सेतु: स्वस्थ भविष्य की ओर” विषय पर प्रस्तुत किया गया। उन्होंने पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी के साथ जोड़ने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम को विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम ने और भी समृद्ध किया। “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” विषय पर आधारित प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने स्वस्थ जीवनशैली तथा आयुर्वेद के महत्व का संदेश दिया।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर 21 सितंबर 2026 को आयोजित पोस्टर एवं चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। डॉ. कुरागंती गौतमी, सहायक आचार्य, जैव प्रौद्योगिकी विद्यालय द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
यह आयोजन आयुर्वेद की समृद्ध परंपरा के प्रति सम्मान व्यक्त करने तथा स्वस्थ भविष्य के निर्माण में आयुर्वेद के संभावित योगदान को रेखांकित करने के उद्देश्य से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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