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आस्था, एकता और संस्कारों का महापर्व बना भगवान चित्रगुप्त का तृतीय वार्षिकोत्सव

ग्रेटर नोएडा वेस्ट :जब आस्था संकल्प का स्वरूप धारण करती है, परंपराएं संस्कारों से जुड़ती हैं और समाज सामूहिक सहभागिता के साथ किसी पावन उद्देश्य के लिए एकजुट होता है, तब धार्मिक आयोजन केवल उत्सव नहीं रह जाता, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक चेतना और सामूहिक शक्ति का प्रेरणापुंज बन जाता है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट में भगवान चित्रगुप्त का तृतीय वार्षिकोत्सव इसी आस्था, एकजुटता और सांस्कृतिक गौरव का अनुपम उदाहरण बनकर सामने आया।

छोटी मिलक स्थित प्राचीन शिव मंदिर में तीन वर्ष पूर्व, 23 अक्टूबर को समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों के सामूहिक प्रयासों और प्रभु की प्रेरणा से लेखनी के आराध्य देव भगवान चित्रगुप्त की प्राणप्रतिष्ठा संपन्न हुई थी। इस पुनीत कार्य में चित्रांश समाज ने अग्रणी भूमिका निभाते हुए धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता की सशक्त मिसाल प्रस्तुत की थी। उसी श्रद्धा, विश्वास और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष भी तृतीय वार्षिकोत्सव उत्साह, उल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। बताते चलें इस तृतीय वार्षिकोत्सव को सफल, भव्य और स्मरणीय बनाने के लिए चित्रांश समाज के लोगों ने व्यापक स्तर पर सामूहिक प्रयास किए थे। सुपरटेक-3, अजनारा ली गार्डन, निराला सोसायटी, ऐस सिटी और सौंदर्य सहित विभिन्न सोसायटियों में बैठकों का आयोजन कर कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई थी। इन बैठकों ने न केवल आयोजन की तैयारियों को गति दी, बल्कि समाज के लोगों के बीच परस्पर सहयोग, आत्मीयता और एकजुटता की भावना को भी सुदृढ़ किया। फलस्वरूप तृतीय वार्षिकोत्सव के अवसर पर छोटी मिलक स्थित प्राचीन शिव मंदिर में भगवान चित्रगुप्त की स्तुति एवं आराधना के साथ धार्मिक कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। भगवान चित्रगुप्त की कथा आयोजन का प्रमुख आकर्षण रही। कथा के माध्यम से उपस्थित श्रद्धालुओं को भगवान चित्रगुप्त की महिमा, धार्मिक मान्यताओं और लेखनी के आध्यात्मिक महत्व से परिचित कराया गया। कार्यक्रम का समापन भगवान चित्रगुप्त की विधिवत पूजा-अर्चना और आरती के साथ हुआ।

इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रसाद स्वरूप कलम प्रदान की गई। कलम का यह प्रतीकात्मक प्रसाद ज्ञान, विवेक, सत्य, न्याय और उत्तरदायित्व के प्रति समर्पण का संदेश देता नजर आया। भगवान चित्रगुप्त को लेखनी और कर्मों के लेखाजोखा से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं में विशेष स्थान प्राप्त है। ऐसे में कलम का प्रसाद केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि ज्ञान के प्रकाश को आत्मसात करने, सत्य के मार्ग पर चलने और अपने कर्मों के प्रति सजग रहने की प्रेरणा भी है। उपस्थित लोगों ने भगवान चित्रगुप्त की महिमा का व्यापक प्रसार करने तथा समाज में धार्मिक सांस्कृतिक चेतना को मजबूत बनाने का संकल्प लिया। इस आयोजन की विशेषता केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों और सोसायटियों से जुड़े लोगों की सहभागिता भी रही। सामूहिक प्रयासों से संपन्न यह वार्षिकोत्सव इस बात का प्रमाण बना कि जब समाज अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़कर आगे बढ़ता है, तब परंपराएं नई पीढ़ियों तक पहुंचती हैं और सामाजिक संबंधों में आत्मीयता का नया संचार होता है।

कार्यक्रम में कृष्ण दयाल निगम, हरिशंकर प्रसाद सिन्हा, अजय कुमार लाल, देवेश्वर सक्सेना, अजीत कुमार अस्थाना, नरेंद्र श्रीवास्तव, बद्री नारायण श्रीवास्तव, डॉ. राजीव वर्मा, विवेक श्रीवास्तव ‘विक्कू’, ए.के. खरे, ए. कुलश्रेष्ठ, नीरज श्रीवास्तव, विशाल श्रीवास्तव, राकेश श्रीवास्तव तथा एस.के. वर्मा सहित अनेक श्रद्धालु भक्तिभाव के साथ उपस्थित रहे। भगवान चित्रगुप्त का यह तृतीय वार्षिकोत्सव श्रद्धा, संस्कार, ज्ञान और सामाजिक समरसता के संगम के रूप में स्मरणीय बना। कलम को प्रसाद स्वरूप ग्रहण कर श्रद्धालुओं ने मानो यह संदेश आत्मसात किया कि कलम की शक्ति तभी सार्थक है, जब उसके माध्यम से सत्य का सम्मान हो, न्याय की प्रतिष्ठा हो और समाज में सद्भाव एवं सकारात्मक चेतना का विस्तार हो।

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