औरंगाबाद नगर पंचायत की गौशाला में दो गायों की भूख से हुई मौत
कमीशनखोरी के चलते गौशाला में पड़ा हुआ है हरे चारे का अकाल ,जिलाधिकारी लें संज्ञान

औरंगाबाद (बुलंदशहर )योगी जी के राज में औरंगाबाद नगर पंचायत की अस्थाई कान्हा गौशाला में दो गायों ने भूख से तड़प कर दम तोड दिया। तमाम जिम्मेदार और नगर पंचायत के सर्वेसर्वा मामले से अनभिज्ञता जता रहे हैं।
कस्बे में शमशाबाद रोड़ पर नगर पंचायत औरंगाबाद की अस्थाई कान्हा गौशाला में शनिवार को दो गाय अकाल मृत्यु का शिकार हो दम तोड गईं। गौशाला में मौजूद कर्मचारियों ने आनन-फानन में मृत गौवंश को बिना पोस्टमार्टम कराये ठिकाने लगा दिया और मामले पर पर्दा डाल दिया।
गौवंश की मौत होने से नगर पंचायत में चल रहे खेल की पोल खुल गई है। यहां गौवंश भूखे पेट रहने को विवश हैं। भूसा डालकर कर्तव्यों की इतिश्री कर ली जाती है।
जानकार बताते हैं कि गौशाला में हरा चारा नदारत रहता है। गौवंश के भोजन व्यवस्था पर हर महीने लाखों रुपए खर्च दिखाया जाता है लेकिन हकीकत इसके विपरीत है। फर्जी बिलों को पास कर हर महीने लाखों रुपए जिम्मेदार सर्वे सर्वा डकार रहे हैं लेकिन गौ वंश को भूखा रखा जाता है।
उल्लेखनीय है कि नगर पंचायत के पास गौ शाला के हरे चारे की फसल बोने के लिए लगभग सत्तर अस्सी बीघा जमीन मौजूद है। अपने दौरे के समय उच्चाधिकारी समय समय पर नगर पंचायत की भूमि पर हरे चारे की फसल बोने के निर्देश देते आ रहे हैं लेकिन उनपर कोई अमल नहीं किया जाता। ऐसा नहीं है कि नगर पंचायत के पास चारा फ़सल बोने के लिए संसाधनों की कमी है। हकीकत में कर्मचारियों की भारी भरकर फौज,टैक्टर, ट्राली सभी कुछ मौजूद हैं लेकिन यदि हरा चारा बो दिया गया तो ठेकेदार से कमीशन खोरी संभव नहीं है इसलिए मोटी रकम वसूल कर हरे चारे की सप्लाई का ठेका चहेते ठेकेदारों को दे दिया जाता है।
आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि ऐसा खेल भाजपा की सरकार में योगी आदित्यनाथ जी के मुख्यमंत्री काल में खुलकर खेला जा रहा है। लेकिन शासन प्रशासन के किसी अधिकारी को इस सब से कोई सरोकार दिखाई नहीं देता है। नवागत जिलाधिकारी स्वयं गौशाला का जायजा लें और शासन की मंशा का समुचित पालन करायें तब जाकर यहां गौवंश को समुचित भोजन नसीब हो सकता है उससे पहले कदापि नहीं।
रिपोर्टर राजेंद्र अग्रवाल






