गुरु पूर्णिमा पर ‘विद्यारंभ संस्कार’ कार्यक्रम का हुआ भव्य एवं गरिमामय आयोजन

नोएडा:सरस्वती शिशु मंदिर, सी-41, सेक्टर-12, नोएडा में आज गुरु पूर्णिमा के पावन एवं पुण्यमय अवसर पर ‘विद्यारंभ संस्कार’ कार्यक्रम का भव्य एवं गरिमामय आयोजन संपन्न हुआ। यह संस्कार बालक के शैक्षिक जीवन का प्रथम सोपान है, जो उसे ज्ञान, सद्गुणों एवं भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के पथ पर अग्रसर होने की प्रेरणा प्रदान करता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार एवं हवन-पूजन के साथ हुआ, जिसे श्रीमान राघवेंद्र जी (पंडित जी) ने पूर्ण विधि-विधान एवं आध्यात्मिक गरिमा के साथ संपन्न कराया। यज्ञ की पावन अग्नि में समर्पित आहुतियों के साथ नन्हें-मुन्ने भैया-बहिनों के उज्ज्वल, संस्कारवान एवं सफल जीवन की मंगलकामना की गई। माँ सरस्वती की आराधना के मध्य बच्चों को अक्षर ज्ञान के प्रथम स्पर्श से परिचित कराया गया, जो उनके जीवन में ज्ञान के आलोक का शुभारंभ है।
इस पावन अवसर पर कक्षा नर्सरी-अ, नर्सरी-ब एवं नर्सरी-स के भैया-बहिनों के साथ उनके अभिभावकों की उत्साहपूर्ण एवं श्रद्धामयी सहभागिता रही। लगभग 90 अभिभावकों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को पारिवारिक आत्मीयता एवं सांस्कृतिक चेतना से ओत-प्रोत कर दिया। विद्यारंभ संस्कार ने एक बार पुनः यह संदेश दिया कि बालक के जीवन में शिक्षा और संस्कार का समन्वय ही उसके सर्वांगीण विकास का आधार है।

कार्यक्रम में यजमान के रूप में उपस्थित परिवारों ने वैदिक परंपरा के अनुरूप अपने पाल्यों के उज्ज्वल भविष्य एवं मंगलमय जीवन की कामना करते हुए पूर्ण श्रद्धा के साथ सहभागिता निभाई।
यजमान परिवार चैरित्य शर्मा, रजनीश शर्मा,शैलेश शर्मा,जानवी शेखावत,रविंद्र सिंह,श्रीमती प्रियंका चौहान,अक्षत शर्मा,मोहित शर्मा,श्रीमती शीतल शर्मा शामिल रहे,
विद्यालय के प्रधानाचार्य देवेंद्र कुमार शर्मा जी ने समस्त भैया-बहिनों को अपना स्नेहिल शुभाशीष प्रदान करते हुए कहा कि “विद्यारंभ संस्कार केवल शिक्षा का प्रारंभ नहीं, बल्कि जीवन में श्रेष्ठ संस्कारों, अनुशासन, आत्मविश्वास एवं राष्ट्रभाव के बीजारोपण का शुभ अवसर है। बालक के व्यक्तित्व का निर्माण तभी संभव है, जब शिक्षा के साथ संस्कारों का समन्वय हो।” उन्होंने अभिभावकों से आह्वान किया कि वे बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु विद्यालय के साथ निरंतर सहयोग एवं सहभागिता बनाए रखें।
विद्यारंभ संस्कार का यह पावन आयोजन नन्हें-मुन्ने भैया-बहिनों के जीवन में ज्ञान, संस्कार एवं सद्गुणों के आलोक का मंगलमय शुभारंभ सिद्ध हुआ। गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर संपन्न यह संस्कार कार्यक्रम गुरु-शिष्य परंपरा, भारतीय सांस्कृतिक चेतना एवं संस्कारयुक्त शिक्षा की गौरवशाली परंपरा को सुदृढ़ करने वाला प्रेरणादायी आयोजन रहा।
विद्यालय परिवार माँ सरस्वती एवं परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना करता है कि सभी बालक-बालिकाएँ ज्ञान, विवेक, विनम्रता एवं श्रेष्ठ संस्कारों से युक्त होकर राष्ट्र के आदर्श, उत्तरदायी एवं चरित्रवान नागरिक बनें तथा अपने जीवन से समाज एवं राष्ट्र को गौरवान्वित करें।
“सा विद्या या विमुक्तये” — जो विद्या हमें श्रेष्ठ जीवन मूल्यों एवं आत्मोन्नति की ओर ले जाए, वही सच्ची विद्या है।






