शिक्षण संस्थान

कालेज संस्थापक स्वर्गीय रायबहादुर चौधरी अमर सिंह की प्रतिमा सूनी रह गई अपने 147 वें जन्मदिवस पर 

कालेज स्टाफ ने दिखाई बेरुखी एक माला तक नहीं हुई नसीब 

औरंगाबाद (बुलंदशहर )क्षेत्र के ख्याति प्राप्त कृषि महाविद्यालय अमर सिंह महाविद्यालय एवं इंटर कॉलेज लखावटी के संस्थापक स्वर्गीय रायबहादुर चौधरी अमर सिंह जी का कल दस अप्रैल को 147 वां जन्मदिन था। लेकिन अपने महामना संस्थापक स्वर्गीय रायबहादुर चौधरी अमर सिंह की प्रतिमा इस महत्वपूर्ण अवसर पर भी सूनी ही रह गई। दोनों ही कालेजों के तमाम स्टाफ को इस अवसर पर रायबहादुर की तनिक भी याद नहीं आ सकी जिसके चलते महाविद्यालय परिसर में स्थित उनकी प्रतिमा और समाधि पर किसी ने एक फूल अर्पित करना तक गवारा नहीं किया।

अमर सिंह महाविद्यालय एवं अमर सिंह इंटर कालेज लखावटी के रूप में समूचे देश प्रदेश और क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगाने वाले महामना रायबहादुर स्वर्गीय चौधरी अमर सिंह जी का जन्म 10 अप्रैल 1879 में क्षेत्र के पाली परतापुर गांव में हुआ था। क्षेत्र के बच्चों को साक्षरता का अलख जगाने वाले रईस पाली नाम से विख्यात चौधरी अमर सिंह ने वर्ष 1905 में पाली गांव में कक्षा पांच तक का प्राइमरी स्कूल स्थापित किया था। वर्ष 1910 में इस स्कूल को गांव से लखावटी में स्थानांतरित कर दिया जिससे इसका लाभ मात्र पाली तक सीमित ना हो कर समूचे क्षेत्र के बच्चों तक सुलभ हो जाये। वर्ष 1911 में अंग्रेजी हुकूमत ने शिक्षा की अलख जगाने वाले रईस पाली चौधरी अमर सिंह जी को रायबहादुर की उपाधि से नवाजा।वर्ष 1913 में इस विद्यालय को जूनियर हाईस्कूल की मान्यता प्राप्त हुई और वर्ष 1916 में इस विद्यालय को हाईस्कूल की मान्यता दिलाई। शिक्षा के विकास के लिए तत्पर रहते चौधरी साहब ने इसी से संतोष नहीं किया और वर्ष 1921 में इसे इंटरमीडिएट कालेज के रूप में स्थापित कर दिया गया।

17 जून 1935 को रायबहादुर चौधरी साहब का स्वर्ग वास हो गया। लेकिन उनकी चलाई मुहिम को उनके निकट संबंधी राव हरपाल सिंह जी ने मंद नहीं पड़ने दी और वर्ष 1941 में इस विद्यालय के साथ साथ डिग्री कालेज की मान्यता प्रदान की गई।

कृषि महाविद्यालय के रूप में समूचे देश प्रदेश में विख्यात इस महाविद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने क्षेत्र के साथ साथ कश्मीर तक के छात्र भी आते रहे हैं और यहां शिक्षा ग्रहण कर विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा के बल पर उच्च पदों पर आसीन हुए हैं।

ऐसे महामना का जन्मदिवस भूलना कदापि उचित नहीं कहा जा सकता है। कम से कम शिक्षाविद् और शिक्षक समाज से तो यह अपेक्षा अनुचित नहीं कि वो अपने महाविद्यालय और इंटर कालेज के संस्थापक के जन्मदिन पर दो पुष्प अर्पित कर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर अपने दायित्व का निर्वहन पूर्ण निष्ठा से करने की शपथ ले।

रिपोर्टर राजेंद्र अग्रवाल

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