साहित्य जगत

‘बाज़िंग्ग ख्वाताई’ का गुवाहाटी में भव्य प्रीमियर, दर्शकों से मिला जबरदस्त रिस्पॉन्स

गुवाहाटी : बहुप्रतीक्षित हिंदी फीचर फिल्म ‘बाज़िंग्ग ख्वाताई’ का भव्य प्रीमियर 7 मई को PVR City Centre, गुवाहाटी में आयोजित किया गया। फिल्म को दर्शकों, मीडिया और फिल्म इंडस्ट्री से शानदार प्रतिक्रिया मिली। लोककथाओं, मनोवैज्ञानिक रहस्य और रिचुअलिस्टिक हॉरर के अनोखे मिश्रण ने दर्शकों को पूरी तरह बांधे रखा।

फिल्म का निर्देशन FTII पुणे के प्रोफेसर एवं हेड ऑफ स्क्रीन एक्टिंग सिद्धार्थ शास्ता ने किया है। फिल्म असम और अरुणाचल प्रदेश की रहस्यमयी और खूबसूरत लोकेशंस पर आधारित है, जो इसकी कहानी को और अधिक प्रभावशाली बनाती हैं।

फिल्म की कहानी रहस्यमयी हत्याओं की जांच से शुरू होती है, जो धीरे-धीरे एक प्राचीन कल्ट और उसके खौफनाक रिवाजों की परतें खोलती है। दर्शकों ने फिल्म के वातावरण, क्षेत्रीय संस्कृति के वास्तविक चित्रण और पारंपरिक हॉरर फिल्मों से अलग इसके प्रस्तुतिकरण की जमकर सराहना की।

निर्देशक सिद्धार्थ शास्ता ने कहा कि “हमने करीब पांच साल पहले इस फिल्म का सपना देखा था। आज दर्शकों का प्यार देखकर ऐसा लग रहा है कि हमारी मेहनत सफल हो गई। बड़े बजट और भारी VFX के दौर में हमने पूरी फिल्म वास्तविक लोकेशंस पर शूट की, जिससे कहानी की प्रामाणिकता और भावनात्मक गहराई और मजबूत हुई।”

फिल्म में सिद्धार्थ शर्मा, नोवकिशोर दत्ता, अंशुल त्यागी, पूजा चेत्री, विवेक मिश्रा और एल्विन मुख्य भूमिकाओं में नजर आए हैं। कलाकारों की परफॉर्मेंस को भी दर्शकों ने खूब सराहा।

अभिनेता सिद्धार्थ शर्मा ने कहा कि “दर्शकों की प्रतिक्रिया बेहद उत्साहजनक रही। यह ऐसी फिल्म है जो देखने के बाद लंबे समय तक लोगों के मन में बनी रहती है।”

अंशुल त्यागी ने कहा कि “यह फिल्म ईमानदारी और सांस्कृतिक कहानी कहने का प्रयास है। प्रीमियर पर मिला प्यार पूरी टीम के लिए बेहद खास है।”

वहीं पूजा चेत्री ने कहा कि “मेरे लिए यह फिल्म देवी की शक्ति और आस्था का प्रतीक है। मुझे विश्वास है कि कई महिलाएं इस भावना से खुद को जोड़ पाएंगी।”

असम और अरुणाचल प्रदेश की वास्तविक लोकेशंस पर शूट हुई यह फिल्म अपने विजुअल ट्रीटमेंट और मनोवैज्ञानिक गहराई के कारण एक अलग पहचान बनाती है।

बाज़िंग्ग ख्वाताई’ 8 मई 2026 से असम के 74 स्क्रीन्स सहित अरुणाचल प्रदेश और देश के अन्य चुनिंदा सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है।

लोककथाओं, डर और आस्था के अनोखे मेल के साथ यह फिल्म भारतीय सिनेमा में एक अलग और विचारोत्तेजक अनुभव के रूप में सामने आई है।

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