औरंगाबाद में घरेलू गैस का पड़ा है अकाल
एजेंसी संचालकों की बद इंतजामी का खमियाजा भुगत रहा है आम उपभोक्ता ,प्रशासन मलाई मारकर साधे है मौन,बिना ओटीपी लिए बांट दिए 739 सिलेंडर जिम्मेदार कौन?

औरंगाबाद( बुलंदशहर)औरंगाबाद कस्बे में घरेलू गैस सिलेंडरों पर कालाबाजारी, घोटाले और रिश्वतखोरी के चलते अकाल पड़ा हुआ है। आलम यह है कि असरदारों को बिना किसी बुकिंग ओटीपी लिए गैस सिलेंडर थोक में दिये जा रहे हैं जबकि आम उपभोक्ता गैस सिलेंडर लेने के लिए एक एक महीने से बाट जोह रहा है। उसकी सुनने वाला कोई नहीं है क्योंकि आपूर्ति विभाग व प्रशासनिक अधिकारी मलाई मारकर गूंगे-बहरे बने मौन साधे हुए हैं। घोर आश्चर्य की बात यह है कि ऐसा किसी सपा बसपा अथवा कांग्रेस सरकार में नहीं बल्कि भृष्टाचार पर जीरो टालरेंस की नीति का ढिंढोरा पीटने में मशगूल भाजपा और उसके कड़क तेवरों वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के कार्यकाल में हो रहा है।
बुलंदशहर जनपद मुख्यालय से मात्र 16 किलोमीटर फासले पर बुलंदशहर स्याना गढ़ मार्ग पर स्थित औरंगाबाद कस्बे में प्रिस एच पी गैस एजेंसी संचालकों की बद इंतजामी और घटिया कार्य शैली के चलते घरेलू गैस का अकाल पड़ा हुआ है। ऐसा नहीं है कि एजेंसी पर गैस सिलेंडरों की आपूर्ति नहीं हो रही है। बाकायदा आपूर्ति हो रही है लेकिन आम उपभोक्ता गैस सिलेंडर लेने दर दर की ठोकरें खाने को महीनों से विवश होकर रह गया है जबकि असरदार दबंगों को गैस आपूर्ति थोक में की जा रही है। हाल ही में एक आडियो वायरल हुई है जिसमें एजेंसी प्रबंधक दीपक कुछ असरदार दबंगों को थोक में गैस सिलेंडरों को देना स्वीकार रहा है। उसने कालाबाजारी करने और आम उपभोक्ता की आवाज उठाने वाले पत्रकारों को भी गैस वसूली करने वाले बता दिया। लेकिन ऐसे झूठे आरोपों से दबाब बेईमानों पर बनाया जा सकता है। निष्पक्ष पत्रकारों पर कदापि नहीं। आडियो वायरल होने पर पत्रकारों ने थाना प्रभारी को मामले की लिखित तहरीर देकर निष्पक्ष जांच पड़ताल कराकर दूध का दूध और पानी का पानी कराने की तथा झूठे मनगढ़ंत आरोप लगाने वाले एजेंसी कर्मचारी पर कठोर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
एक सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार प्रिंस एच पी गैस एजेंसी औरंगाबाद पर 11568 कनेक्शन धारक उपभोक्ता अटैच हैं। 28 फरवरी 26 से 20 अप्रैल 26 तक की अवधि में कुल 7252 सिलैंडर की आवक एजेंसी पर हुई।
इनमें से 6554 सिलैंडर वैध उपभोक्ताओं को नियमानुसार ओटीपी लेकर वितरित किए गए हैं और नेताओं की धौंस से 739 सिलैंडर बिना किसी बुकिंग बिना किसी ओटीपी लिए गैर कानूनी तरीके से तमाम सरकारी आदेशों को ताक पर रखकर वितरित किए गए हैं। आखिर इस धांधली का जिम्मेदार कौन है?
जिला पूर्ति अधिकारी मौन,एस डी एम सदर नये आसीन हुए हैं। पूर्ति निरीक्षक मलाई मारकर गूंगे-बहरे बने हुए हैं। अब बचा कौन? जिलाधिकारी वो भी हाल ही में जिले में आसीन हुए हैं। जिलाधिकारी जांच पड़ताल कराकर दोषी पाए जाने वाले अधिकारी कर्मचारियों को कानून के कठघरे में खड़ा करें।तभी सुशासन और सबका साथ सबका विकास का सपना पूरा होगा उससे पहले कदापि नहीं,
रिपोर्टर राजेंद्र अग्रवाल






